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भारत तिब्बत व्यापारिक संबंधो के प्रतीक अंतरराष्ट्रीय लवी मेले में दिखा महंगाई का असर

MELA 2 भारत तिब्बत व्यापारिक संबंधो के प्रतीक अंतरराष्ट्रीय लवी मेले में दिखा महंगाई का असर

हिमाचल में होने वाले भारत तिब्बत व्यापारिक संबंधो के प्रतीक अंतरराष्ट्रीय लवी मेले में महंगाई और प्रतिकूल मौसम की मार दिखने लगा है। सूखे मेवे और अन्य स्थानीय उत्पादों के दाम बीते सालों के मुकाबले हुए काफी अधिक हो गए हैं। उत्पाद विक्रेताओं का तर्क फसल कम होने और उत्पादन लागत ज्यादा होने से दरें बढ़ाना मज़बूरी बन गई है। शिमला ज़िला के रामपुर में सदियों से मनाया जाने वाला अंतर्राष्टीय लवी मेला ऑर्गेनिक उत्पादों और हस्त निर्मित वस्तुओ को मंडी दिलाता है मंडी। इस बार कोरोना की वजह से मेले को औपचारिक तौर पर मनाया जा रहा है ।

शिमला जिले के रामपुर बुशहर में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय लवी मेले पर कोरोना के साथ-साथ महंगाई की मार भी पड़ी है। इस बार हालांकि बाहरी व्यापारियों को मेला मैदान में आने की इजाजत नहीं दी गई है। केवल स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए ही मेले का आयोजन सूक्ष्म तौर से किया जा रहा है। लेकिन मेला मैदान में उत्पादों के दाम बीते वर्षो के मुकाबले अधिक होने से खरीददारों कम ही पहुंच रहे है।

Lavi Mela A Kinnauri market view from Lavi Mela भारत तिब्बत व्यापारिक संबंधो के प्रतीक अंतरराष्ट्रीय लवी मेले में दिखा महंगाई का असर

वहीं स्थानीय उत्पादों को बेचने वालों में भी खरीददार कम आने से उत्साह नहीं है। उनका कहना है कि मेले का औपचारिक उद्घाटन ना होने से खरीददार कम आ रहे हैं। इसके साथ-साथ इस बार विकट मौसम के कारण स्थानीय उत्पाद भी कम हुए। चलते कामगारो की कमी से मज़दूरी भी बढ़ी। ऐसे में उत्पाद महंगे हुए हैं. लवी मेला मैदान में गुच्छी सतारा हजार रुपए किलो, चिलगोजा 2000, काला जीरा 2000, अखरोट 300 से 600 किलो, राजमा ढाई सौ रूपये किलो, चली का तेल 1200 रूपये लीटर, सेब 900 से लेकर 13 00 रूपये गिफ्ट पैक बिक रहा है।

उल्लेखनीय हैकि अंतर्राष्ट्रीय लवी मेला हर साल 11 से 14 नवंबर तक आधिकारिक तौर से मनाया जाता है। इस विशुद्ध व्यापारिक मेले में बाहर से व्यापारी आते है। इसे ध्यान में रखते हुए बीते वर्ष और इस वर्ष मेले का औपचारिक आयोजन कर बाहर से व्यापारियों आने नहीं दिया जा रहा है। लवी मेला मैदान में गुच्छी सतारा हजार रुपए किलो, चिलगोजा 2000, काला जीरा 2000, अखरोट 300 से 600 किलो, राजमा ढाई सौ रूपये किलो, चली का तेल 1200 रूपये लीटर, सेब 900 से लेकर 13 00 रूपये गिफ्ट पैक. बिक रहा है। इस बार प्रोडक्शन कम हुआ इस का कारण विकट मौसम और दूसरा कोरोना रहा। कोरोना की वजह से लेबर का कॉस्ट ज्यादा पड़ा।

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