ब्राह्मणवाद के धुर विरोधी फुले की जयंती, निचली जातियों को दिया था ”दलित” नाम

नई दिल्ली। दलितों को उनका मान सम्मान दिलाने के लिए ब्राह्मण होते हुए ब्राह्मणवाद के विरोधी बने 19वीं सदी के समाज सुधारक ज्योतिराव गोविंदराव फुले की आज जयंती है। उन्होंने भारतीय समाज में जारी कुप्रथाओं के खिलाफ उस दौर में आवाज बुलंद की थी,जिस दौर में लोग विकृत मानसिकता के शिकार थे। फुले एक भारतीय विचारक, समाज सेवी, लेखक, दार्शनिक और क्रांतिकारी के रूप में उभरे। दलितों को उनका अधिकार दिलाने के लिए वो अपने समाज से भी लड़ गए थे।

बता दें कि महात्मा फुले मराठी थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ कुछ समय तक ही मराठी में अध्ययन किया और बाद में मराठी के अध्ययन को त्याग दिया। इसके बाद उन्होंने 21 साल की उम्र में 7वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने ही निचली जातियों को दलित शब्द से पुकारा था, जिसका अर्थ था समाज में दबे और कुचले हुए लोग। ज्योतिराव फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को कटुंग में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और उन्होंने शुरू से ही दलितों के ऊपर हो रहे अत्याचार को देखा था। 

उस दौर में दलितों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में फुले अपने पिता से भी लड़ गए थे। जब उनके पिता ने उन्हें ये सब करने से रोका तो उन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर ईसाइ धर्म अपनाने की धमकी दे डाली। उन्होंने अपने घर में सभी जातियों के लिए एक ही कुएं का निर्माण करवाया, जिसमें सवर्ण और दलित सभी पानी पी सकते थे। जातिवाद को खत्म करने के लिए ये उनका पहला कदम था पर अफसोस हमारे देश में इतने सालों के बाद भी जातिप्रथा का जहर आज तक घुला हुआ है।

उन्होंने साल 1873 के सितंबर में ‘सत्य शोधक समाज’ नामक संगठन का गठन किया था। वे बाल-विवाह के मुखर विरोधी और विधवा-विवाह के पुरजोर समर्थक थे। वे ब्राह्मणवाद के विरोधी थे और उन्होंने ही बिना किसी ब्राम्हण-पुरोहित के विवाह-संस्कार शुरू कराया और बाद में इसे बॉम्बे हाईकोर्ट से मान्यता भी दिलाई। उनकी पत्नी सावित्री बाई फुले भी एक समाजसेविका थीं। उन्हें भारत की पहली महिला अध्यापिका और नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता कहा जाता है।

फुले ने अपनी पत्नी के साथ मिल कर लड़कियों की शिक्षा के लिए साल 1848 में एक स्कूल भी खोला था। समाज सुधारक फूले की जयंती पर राष्ट्रपति कोविंद ने ट्वीट कर कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर मैं उनके प्रति अपना समादर प्रकट करता हूं। वे एक आदर्श राष्ट्र-निर्माता थे। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि महात्मा फुले को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। सामाजिक सुधार पर उनके अग्रणी और कठोर प्रयासों के कारण लोगों को आगे बढ़ने में मदद मिली।