Terrorist Attack In Lucknow: संदिग्ध के फोन का डेटा नहीं हुआ रिकवर, एटीएस ने फोन भेजा हैदराबाद

लखनऊ: उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आतंकी संगठन अलकायदा के दो संदिग्‍ध आतंकवादी मौजूद होने की सूचना मिलते ही पूरे शहर में खलबली मच गयी। यूपी एटीएस ने काकोरी थाना क्षेत्र स्थित एक घर से संदिग्‍ध आतंकियों को पकड़ने के  साथ ही प्रेशर कुकर बम, एक अर्ध निर्मित टाइम बम बरामद किया।

रविवार को दुबग्गा चौराहे के पास सीते विहार कॉलोनी में देर शाम तक चले सर्च ऑपरेशन में बम के निष्क्रिय होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। फिलहाल, एटीएस की टीम आतंकियों समेत अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही है और सोमवार को उनकी कोर्ट में पेशी भी है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मिनहाज पुत्र सिराज निवासी दुबग्गा व मसीरूद्दीन उर्फ मुशीर निवासी मडिय़ांव मोहिबुल्लाहपुर के रूप में हुई। ऐसे में लखनऊ में इससे पहले आतंकी गतिविधियां कब-कब हुईं, इस पर भी एक नजर डाल लीजिए…

2017 में पकड़े गए थे आतंकी

आपको याद दिला दें कि, इससे पहले यूपी एटीएस ने वर्ष 2017 में अभियान चलाकर आइएसआइएस के एक के बाद एक कई संदिग्ध आतंकियों को पकड़ा था। एटीएस ने तेलंगाना पुलिस के इनपुट पर आइएसआइएस के खुरासान मॉड्यूल के आतंकी सैफुल्ला को भी एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। खुरासान मॉड्यूल का उस समय एटीएस टीम ने पूरी तरह से खात्मा कर दिया था।

एटीएस की छापेमारी में खुरासान मॉड्यूल ग्रुप के 10 में से 9 सदस्‍यों को गिरफ्तार किया गया था और आतंकी सैफुल्लाह को ढेर कर दिया गया था। इसके बाद लखनऊ करीब शांत हो गया था, लेकिन अब एक बार फिर से राजधानी में आतंकियों के पकड़े जाने के बाद शहरवासियों में दहशत है। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्‍या आतंकी लखनऊ को अपना सेंटर या पनाहगार बनाना चाहते हैं?

2016 में इंदिरानगर से पकड़े गया था संदिग्‍ध आतंकी

वहीं, एनआइए के इनपुट पर जनवरी 2016 में एटीएस ने राजधानी के इंदिरानगर से एक संदिग्ध आतंकी अलीम को पकड़ा था। इससे पूछताछ में पता चला था कि, ISIS के आठ आतंकियों ने इंदिरानगर में बसंत विहार स्थित घर के पास गुपचुप बैठक की थी। इस बैठक में तय हुआ था कि बम विस्‍फोट करके हरिद्वार में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई जाएगी, जिसके लिए विस्फोटक व अन्य सामग्री भी जुटा ली गई थी। अलीम की गिरफ्तारी के साथ ही एसटीएस ने कुशीनगर और हरदोई से भी ISIS के दो अन्य संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था।

2007 में हुआ था ब्लास्ट

आपको बता दें कि इससे पहले वर्ष 2007 में भी लखनऊ में कचहरी के बाहर ब्लास्ट हुआ था। इसके अलावा वाराणसी और अयोध्या में भी कचहरी के बाहर सीरियल ब्लास्ट होने से हड़कंप मच गया था। उस वक्‍त गिरफ्तार किए गए कई आतंकी आज भी जेल में बंद हैं।

कानपुर में भी धरे गए थे आतंकी

यही नहीं, कानपुर में एक ऑपरेशन के दौरान पकड़े गए खुरासान मॉड्यूल के आतंकियों के पास से आइएसआइएस से जुड़े होने के कई सबूत मिले थे। एटीएस ने इस दौरान दो लैपटॉप बरामद किए थे, जिसमें बम बनाने के वीडियो के अलावा आइएसआइएस के लिटरेचर बरामद हुए थे। उस वक्‍त एटीएस ने दावा किया था कि, 27 मार्च के बाद यह आतंकी लखनऊ के आसपास बड़े धमाके करने की प्लानिंग में थे।

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