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एक समान पाठ्यक्रम के विरोध में आया शिक्षकों का संगठन

new edu policy एक समान पाठ्यक्रम के विरोध में आया शिक्षकों का संगठन

लखनऊ। नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के विश्वविद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम लागू किए जाने को अव्यवहारिक बताते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने इसे ना लागू करने की मांग की है।

लुआक्टा अध्यक्ष डॉ मनोज पांडेय और महामंत्री डॉ अंशू केडिया ने कहा कि नई शिक्षा नीति  2020 के माध्यम से शिक्षा जगत मे नए बदलाव होने जा रहा है । राज्य सरकार द्वारा नए  सत्र 2021-22 से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में लागू किये जाने का निर्णय लिया गया है । राज्य सरकार द्वारा इस सम्बंध में सभी विश्वविद्यालयों में न्यूनतम एक समान पाठ्यक्रम लागू करने के लिए एक समिति का गठन किया गया था।

समिति की अनुशंसाओं को लागू करने के लिए औपचारिकताएं  8 जून 2021 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे कि सत्र 2021–22 से नई शिक्षा नीति के अनुसार पठन पाठन का कार्य किया जाय।

उन्होंने कहा कि न्यूनतम एकसमान पाठ्यक्रम लागू किये जाने पर हम अपनी आपत्ति व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कई खामियां हैं। इससे शिक्षा का बंटाधार हो जाएगा। किसी को भी इसका लाभ नहीं मिलेगा।

लुआक्टा ने इन दावों के आधार पर खारिज किया नया बदलाव
  • लुआक्टा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में न्यूनतम समान पाठ्यक्रम की कोई अवधारणा नही है। साथ ही 70% राज्य सरकार द्वारा बदलाव न्यूनतम की श्रेणी में नही आता है।
  • 70% पाठ्यक्रम राज्य सरकार द्वारा और 30% पाठ्यक्रम का निर्धारण विश्वविद्यालयों द्वारा किये जाने से विश्वविद्यालयों की आकादमिक स्वायत्तता समाप्त हो जायेगी। नई शिक्षा नीति में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को आकादमिक स्वायत्तता दिये जाने पर बल दिया गया है।
  • अकादमिक स्वायत्तता के समाप्त होने पर विश्वविद्यालय शोध केंद्र न होकर सिर्फ डिग्री देने की एक संस्था हो जायेंगे। नई शिक्षा नीति में अधिक से अधिक शोध किये जाने पर बल दिया गया है। इसके लिए महाविद्यालयों में भी शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया गया है।
  • एक क्षेत्र की अकादमिक आवश्यकता एवं आधारभूत संरंचना दूसरे से बहुत भिन्न हो सकती है।
  • अब तक विश्विद्यालय अपने विभागों, बोर्ड ऑफ स्टडीज के माध्यम से पाठ्यक्रम निर्धारित करते थे। नई प्रक्रिया उनकी स्वायतता पर भी अनाधिकृत हस्तक्षेप है।
  • एक समान पाठ्यक्रम लागू किये जाने पर विश्वविद्यालयों से नवाचार एव नवोन्मेष की परिकल्पना समाप्त हो जायेगी।
  • उत्तर प्रदेश राज्य के अंतर्गत कई केंद्रीय विश्वविद्यालय भी अवस्थित हैं, तथा उनमें भी नई शिक्षा नीति लागू होने जा रही है। लेकिन, अपने प्रदेश में अवस्थित होने के बावजूद एकसमान पाठ्यक्रम लागू नहीं किया जा रहा है, ना ही देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एकसमान पाठ्यक्रम लागू करने का कोई आदेश मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा दिया गया है।
  • समान पाठ्यक्रम लागू किये जाने से शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जायेगी, उत्तर प्रदेश राज्य के उच्च शिक्षा के शैक्षणिक संस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालयों, अन्य राज्य के विश्वविद्यालयों तथा विदेशी विश्वविद्यालयों से वर्तमान प्रतिस्पर्धा के युग में पीछे रह जायेंगे।

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