टीडीपी-वाईएसआर के अविश्वास प्रस्ताव पर क्या बिगड़ जाएगा बीजेपी का समीकरण?

अगले साल देश में आने चुवान होने हैं और उससे पहले ही  उसकी सहयोगी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी ने गठबंधन तोड़कर एनडीए को बड़ा झटका दे दिया है। जिसके बाद कहीं ना कहीं अगले साल होने वाले लोक सभा चुनाव के लिए केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ती प्रतीत हो रही हैं। ंआंध्र प्रदेश को स्पेशल राज्य का दर्जा ना मिलने से खफा टीडीपी ने सदन में अविश्वास प्रत्साव प्रस्तुत किया है। क्या इस अविश्वास प्रस्ताव के बाद बीजेपी की लोकप्रियता में कोई कमी आएगी?

पार्टी सदस्यों के साथ टेलीकांफ्रेंस करने के बाद चंद्रबाबू नायडू द्वारा गठबंधन तोड़ने का फैसला लिया गया। टीडीपी के पोलित ब्यूरो ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है। साथ ही पार्टी ने शुक्रवार को नोन-ट्रस्ट प्रस्ताव जारी करने के लिए नोटिस भी जारी किया है। केंद्रीय मंत्री पी अशोक गजापति राजू और वाई एस चौधरी ने पी एम मोदी से एपी पुनर्गठन अधिनियम, 2014 पर मीटिंग के बाद इस्तीफा दे दिया था। राजू मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री और साइंस एंड टेक्नोलॉजी का कार्यभार संभाल रहे थे।

 

नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ आंध्र प्रदेश में राजनीतिक दलों के साथ खुद को राज्य के हित के एकमात्र प्रमोटर्स के तौर पर खड़ा करने के लिए, खासकर राज्य के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा हासिल करने की कोशिश में, टीडीपी के प्रतिद्वंदी वायएसआर कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। अविश्वास पत्र को केवल तब ही संसद में पास किया जा सकता है जब कम से कम 50 सदस्य इसका समर्थन करें। वायएसआर के लोकसभा में 9 सदस्य हैं, इसलिए पार्टी ने अन्य विपक्षी दलों से इसका सपोर्ट करने की अपील की थी।

 

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एनडीए से अलग होने के टीडीपी के फैसले का आह्वान किया है। बनर्जी ने कहा कि ‘वर्तमान स्थिति’ में यह कार्रवाई देश को भविष्य की आपदा से बचाने के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, उन्होंने “अत्याचार, आर्थिक आपदा और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ एक साथ मिलकर काम करने के लिए विपक्ष में सभी राजनीतिक दलों से” अपील की।

 

टीडीपी और केंद्र के बीच चल रही लड़ाई के दौरान एक सामान्य विषय यह रहा है कि केंद्र अपने शब्दों से पीछे हट गया है और राज्य के लोगों को धोखा दिया गया है। प्रधान मंत्री मोदी और भाजपा पर हमला करते हुए एन चंद्रबाबू नायडू ने उनके और टीडीपी के खिलाफ “अन्य लोगों को उकसाने” का आरोप लगाया था। नायडू ने कहा था, ‘चूंकि यह हमारे लिए कुछ भी नहीं कर सकी है, इसलिए भाजपा दूसरों को उकसा रही है और तमिलनाडु जैसे आंध्र राजनीति में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती है। अगर नरेंद्र मोदी या एनडीए सरकार हमारे खिलाफ दूसरों को भड़काती है तो क्या मुझे डरपोक की तरह ड़रना चाहिए?’

 

सोमवार को टीडीपी ने वायआरएस के समर्थन के साथ लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया हालांकि हंगामा शुरू होने के कारण इस पर चर्चा नहीं हो सकी लेकिन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा हे कि सरकार इस पर बात करने को तैयार है और सभी दल सहयोग दें। इस वक्त लोक सभा में एनडीए के 315, यूपीए की 52 और अन्य पार्टीयों की 163 सीटें हैं। टीडीपी को इस प्रस्ताव पर चर्चा  के लिए कम से कम 50 एमपी का समर्थन चाहिए होगा। अगर मौजूदा हालात देखें तो टीडीपी और वायएसआर की 16+9 सीटें जोड़कर 37 सीटें होती हैं और उसे 13 विधायकों का समर्थन और चाहिए होगा। हालांकि इस स्थिति में एनडीए पलड़ा भारी नज़र आ रहा है लेकिन अगर टीडीपी 50 विधायकों का समर्थन प्राप्त कर लेती है और प्रस्ताव पर सदन में बहस होती है तो कहीं न कहीं इस बहस का बीजेपी के अस्तित्व पर असर पड़ेगा। जो 2019 को आम चुनाव के लिए घातक साबित हो सकता है।