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सुषमा ने दिया भारतीय मजदूरों के परिजनों द्वारा लगाए गए सवालों का विस्तार से जवाब

sushma swaraj सुषमा ने दिया भारतीय मजदूरों के परिजनों द्वारा लगाए गए सवालों का विस्तार से जवाब

नई दिल्ली। राज्य सभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इराक के मोसुल में मारे गए भारतीय मजदूरों के परिजनों द्वारा खड़े किए गए सवालों का विस्तार से जवाब दिया। बीते मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में इस विषय पर बयान देने के बाद सुषमा स्वराज ने मीडिया से बात करते हुए इन सवालों पर अपनी बात साफ की। उन्होंने सरकार, विदेश मंत्रालय और उन पर मृतकों के परिजनों द्वारा उठाए सवालों के जवाब दिए। विदेश मंत्री ने कहा कि मृतकों के परिजनों ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों सरकार ने 39 मजदूरों के मारे जाने के बारे में नहीं बताया।

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बता दें कि सुषमा स्वराज ने कहा कि इसके सबूत मिल चुके हैं। चार साल से मोसुल में दफन भारतीयों के DNA अब इसी रेतीले मिट्टी से सैंपल लेकर परिवार वालों से मैच कर पता लगा कि चार साल पहले किस बेरहमी से IS के आतंकियों ने उनका कत्ल किया है। बीते मंगलवार को इराकी प्रशासन ने इस बीत को भी साफ किया है कि पिछले साल जो शव एक सामुहिक कब्र में मिले थे वो उन्हीं भारतीय मजदूरों के थे। जिन्हें 2014 में आइसिस ने मोसुल में बंधक बनाया था। ये शव मोसुल के उत्तर-पश्चिम में बादोश गांव के नज़दीक दफ़्न पाए गए। ये वही इलाका है, जिस पर पिछले साल जुलाई में इराकी बलों ने अपना क़ब्ज़ा जमाया था। इराक़ के शहीद संस्थान के प्रमुख ने इस बात की तस्दीक की कि 39 शवों में 38 की पहचान हो गई है।

वहीं इराक में प्रमुख शहीद संस्थान की नजीहा अब्दुल अमीर अल शिमारी ने सामूहिक कब्र विभाग को वादी एकाब में एक सामूहिक कब्र में 39 शव मिले, जिसमें से 38 की भारतीयों के तौर पर पहचान हुई। मोसुल पर कब्‍जा करने के बाद आइसिस ने भारत के कुल 40 मजदूरों को बंधक बना लिया था, जिनमें से एक हरजीत मसीह भागने में कामयाब रहा। हरजीत मसीह ने कहा है कि वो लोग पकड़े जाने के कुछ दिनों बाद बाहर ले जाए गए, जहां उनको गोली मार दी गई। जिस इलाके में भारतीय लोगों की सामूहिक कब्र मिली वहीं आस पास दो और सामूहिक कब्रें भी मिलीं थीं।

साथ ही टिप्पणिया जैसे ही सरकार ने 39 भारतीयों के मोसुल में मारे जाने की पुष्टि की, एक-दो नहीं, उनचालीस परिवार बिलख उठे। उनको ये भी लग रहा है कि सरकार ने उन्हें अंधेरे में रखा। अपनों के मारे जाने की ख़बर भी उन्होंने मीडिया के जरिए जानी। 39 भारतीयों के मासुल में मारे जाने की पहली खबर हरजीत मसीह ने दी थी। तब सरकार ने उनके दावे को खारिज कर दिया था। अब जब सरकार ने भारतीयों के मारे जाने की पुष्टि की है तो मसीह एक बार फिर सामने आए हैं और कहा कि सरकार ने 39 परिवारों को गुमराह क्यों किया।

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