SC ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के संविधान के मसौदे को कुछ संशोधनों के साथ दी मंजूरी

SC ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के संविधान के मसौदे को कुछ संशोधनों के साथ दी मंजूरी

उच्चतम न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के संविधान के मसौदे को कुछ संशोधनों के साथ मंजूरी दी है। मसौदे में ये संशोधन शीर्ष न्‍यायालय द्वारा नियुक्‍त न्‍याय मित्र गोपाल सुब्रमनियम के सुझावों पर किए गए हैं।चीफ न्‍यायाधीश दीपक मिश्र की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने ‘एक राज्य, एक वोट’ की नीति में संशोधन किया है। और सौराष्‍ट्र, वडोदरा, मुम्‍बई और विदर्भ क्रिकेट संघों को स्‍थायी सदस्‍यस्‍ता की मंजूरी दी।

 

SC ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के संविधान के मसौदे को कुछ संशोधनों के साथ दी मंजूरी

 

अयोग्य करार दिए गए अधिकारी नहीं होंगे बोर्ड की बैठक का हिस्सा : लोढ़ा समिति

बता दें कि इससे पहले लोढ़ा समिति ने राज्‍य में एक ही क्रिकेट संघ होने की सिफारिश की थी। जिसकी वजह से महाराष्‍ट्र और गुजरात में मुम्‍बई क्रिकेट एसोसिशन, क्रिकेट क्‍लब ऑफ इंडिया, विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन, बड़ौदा क्रिकेट संघ और सौराष्‍ट्र क्रिकेट संघ जैसे पुराने क्रिकेट संघों को स्‍थाई सदस्‍यता खोनी पड़ी। और मतदान का अधिकार छिन गया था।

उक्त क्रिकेट निकायों के ऐतिहासिक अस्तित्व और योगदान का भी हवाला दिया

न्यायालय ने उक्त क्रिकेट निकायों के ऐतिहासिक अस्तित्व और योगदान का भी हवाला दिया। पीठ में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के अलावा न्यायमूर्ति ए.एम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे।सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज से बीसीसीआई के स्वीकृत संविधान को चार हफ्ते के भीतर अपने रिकॉर्ड में लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बीसीसीआई से परिवर्तित संविधान को चार हफ्ते के भीतर रजिस्टर करने का आदेश दिया है। साथ ही राज्यों और अन्य सदस्य एसोसिएशनों को 30 दिनों के भीतर रजिस्टर कराने को कहा है।

लोढ़ा समिति के मूल सुधारों में तीन साल के एक कार्यकाल के बाद बाहर रहने की अनिवार्यता का प्रावधान था

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि प्रत्येक पदाधिकारी को लगातार दो पदों के बाद कूलिंग ऑफ पीरियड से गुजरना होगा। ऐसे में प्रशासकों की समिति के प्रमुख विनोद राय ने बीसीसीआई पदाधिकारियों के लिये लगातार दो कार्यकाल के बाद कूलिंग ऑफ पीरियड से संबंधित आदेश और बोर्ड के चुनावों के लिये मार्ग प्रशस्त करने का स्वागत किया।आपको बता दें कि लोढ़ा समिति के मूल सुधारों में तीन साल के एक कार्यकाल के बाद बाहर रहने की अनिवार्यता का प्रावधान था। लेकिन आज के आदेश के बाद पदाधिकारी अब लगातार दो साल के कार्यकाल के बाद एक निश्चित समय के लिये कोई पद नहीं संभाल पाएंगे।

महेश कुमार यदुवंशी