supreme court 1 सुप्रीम कोर्ट द्वारा ख़ारिज की गयी याचिका, आईपीएस अधिकारियों को अपने पास प्रतिनियुक्ति पर बुलाने का केंद्र सरकार के पास अधिकार बरक़रार

नई दिल्ली – बताया जा रहा है कि IPS अधिकारियों को अपने पास प्रतिनियुक्ति पर बुलाने के केंद्र के अधिकार को चुनौती देने वाली याचिका पश्चिम बंगाल के रहने वाले वकील अबु सोहेल ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी जिसे आज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। बता दे कि आज यह मामला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव और एस रविंद्र भाट की बेंच में लगा। याचिकाकर्ता अबू सोहेल ने दलीलें रखने की कोशिश की। लेकिन IPS कैडर रूल्स, 1954 के नियम 6(1) को असंवैधानिक बताने वाली इस याचिका से जज सहमत नहीं थे जिसे चलते उन्होंने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया गया।

क्यों दाखिल की गयी थी यह याचिका –
बताया जा रहा है कि हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम पर हुए हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल कैडर के 3 आईपीएस अधिकारियों भोलानाथ पांडे, प्रवीण त्रिपाठी और राजीव मिश्रा को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला लिया था। जिसका पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कड़ा विरोध किया गया और साथ ही सरकार ने यह कहा कि वह अपने अधिकारियों को रिलीज नहीं करेगी। जिसको लेकर के पश्चिम बंगाल के रहने वाले वकील अबु सोहेल ने सुप्रीम कोर्ट में IPS अधिकारियों को अपने पास प्रतिनियुक्ति पर बुलाने के केंद्र केअधिकार को चुनौती देने वाली यह याचिका दाखिल की थी जिसे आज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है।

यह है नियम –
बता दे कि भारतीय पुलिस सेवा (IPS) एक अखिल भारतीय सेवा है। इनमें अधिकारियों की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। IPS अधिकारियों का कैडर आवंटन केंद्रीय गृह मंत्रालय करता है। उसका इन अधिकारियों पर नियंत्रण होता है। हालांकि, एक बार किसी राज्य कैडर में आवंटित हो जाने के बाद IPS अधिकारी उस राज्य सरकार के तहत काम करता है। राज्य सरकार उसे किसी पद पर नियुक्त करती है। तथा जब ज़रूरी हो उसका ट्रांसफर करती है। केंद्र सरकार ज़रूरी पड़ने पर किसी IPS अधिकारी को सेंट्रल डेप्यूटेशन यानी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अपने पास बुला सकती है। ऐसा एक निश्चित समय तक के लिए किया जा सकता है। बाद में वह अधिकारी अपने मूल कैडर में लौट जाता है। केंद्र सरकार एक सीमित समय के लिए किसी IPS अधिकारी को दूसरे राज्य में भी भेज सकती है। इंडियन पुलिस सर्विस (कैडर) रूल्स, 1954 के नियम 6 के मुताबिक केंद्र सरकार, राज्य की सहमति से किसी IPS अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है। यानी राज्य सरकार की सहमति को महत्व दिया गया है। लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। इसी नियम में यह लिखा गया है कि अगर राज्य सरकार केंद्र से सहमत न हो तब भी अंतिम फैसला केंद्र का ही होगा। राज्य सरकार को उसका पालन करना होगा।

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