काबिलियत और कामयाबी का दूसरा नाम है Jyotsna

लखनऊ। काबिलियत हो तो कामयाबी हर कदम पर आपके साथ चलती है। आप जो करते हैं, वह दूसरों के लिए मिसाल बन जाता है। उत्तर प्रदेश की बेटी ज्योत्स्ना (Jyotsna) की कहानी कुछ ऐसी ही है।

मेहनत, लगन और काबिलियत से अपना मुकाम बनाने वाली ज्योत्स्ना अब जीवन में कुछ करने की चाह रखने वाली प्रदेश की दूसरी बेटियों के मन में उम्मीद की ज्योत जला रही हैं। अब तक वह तमाम बेटियों के आइडिया को बिजनेस में बदलने में उनकी मदद कर चुकी हैं।

ज्योत्स्ना इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, लखनऊ की डिप्टी डायरेक्टर हैं। इस पद पर पहुंचने वाली वह यूपी की पहली महिला उद्यमी हैं। एक बेहतरीन संपादक हैं। कैंपेन मैनेजमेंट, ईवेंट मैनेजमेंट, वेंडर मैनेजमेंट, चैनल एंड डीलर मैनेजमेंट, एंड टू एंड कस्टमर लाइफ साइकिल मैनेजमेंट समेत तमाम विधाओं में उन्हें पारंगत हासिल हैं।

नए उद्योगों, स्टाटर्अप के आइडिया, बाजार में उनके लिए संभावनाएं, अपने उद्योग को मुकाम तक लाने की कोशिश में जुटे उद्यमियों खासतौर पर महिला उद्यमियों की राह आसान करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। नए उद्यम और उद्यमियों को आगे बढ़ाना, सरकार-उद्यम और उद्यमियों के बीच अच्छा तालमेल, प्रदेश में उद्योगों के लिए बेहतर माहौल तैयार करने जैसे विषयों पर भी वह रोज अपनी टीम के साथ काम करती हैं।
काबिलियत और कामयाबी का दूसरा नाम है Jyotsna
गोरखपुर से शुरू हुआ जिंदगी का सफर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नगरी गोरखपुर ज्योत्स्ना की जन्मभूमि है। पिता प्रदेश सरकार में अफसर थे। सो जिंदगी उनके ट्रांसफर के साथ इस जिले से उस जिले में दौड़ी रहती थी। गोरखपुर में बचपन का कुछ गुजरा। आगे की स्कूलिंग प्रयागराज और वाराणसी में हुई। वाराणसी से ग्रेजुएशन करने के बाद इलाहाबाद से एमबीए किया और फिर अपने कदमों से दुनिया नापने निकल पड़ीं।

प्रयागराज से शुरू किया कॅरियर का सफर, पहली नौकरी रिलायंस में

जब ज्योत्स्ना (Jyotsna) के हाथ में एमबीए की डिग्री आई उस वक्त रिलायंस पूरे देश में तेजी से अपना कारोबार फैला रहा था। ज्योत्स्ना को पहली नौकरी रिलायंस इंडस्ट्रीज में कॉरपोरेट मार्केटिंग एंड कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव के तौर पर मिली। जगह थी प्रयागराज। रिलायंस उस वक्त पूरे प्रदेश में रिलायंस फ्रेश के नाम से अपने स्टोर खोलने जा रहा था। सो, ज्योत्स्ना भी उस टीम का हिस्सा बन गई।

उन दिनों राजनीतिक कारणों से रिलायंस के यूपी में तेजी से बढ़ते कदम रुक गए तो ज्योत्स्ना और उनके कुछ साथियों का ट्रांसफर मुंबई कर दिया गया। रिलायंस की सेंट्रल सप्लाई टीम में काम कर रही ज्योत्स्ना यूपी लौटना चाहती थीं। मैनेजमेंट के सामने इच्छा जताई तो उन्हें गुड़गांव में नई पोस्टिंग दे दी गई।

एंबिएंस मॉल में रिलायंस स्टोर खोलने वाली टीम का हिस्सा थीं ज्योत्स्ना

ज्योत्स्ना गुड़गांव के एंबिएंस मॉल में रिलायंस का स्टोर खोलने वाली टीम का हिस्सा थीं। उनके काम से प्रभावित होकर प्रबंधन ने उन्हें गाजियाबाद के शिप्रा मॉल का काम भी सौंपा। वह दोनों जगह कस्टमर रिलेशनशिप मैजमेंट देखती रहीं।

उत्तर भारत के कई जिलों तक पहुंचाया तनिष्क का कारोबार

रिलायंस के बाद ज्योत्स्ना ने टाइटन इंडस्ट्रीज की ओर रुख किया। तनिष्क से जुड़ने के बाद उन्होंने पूरे उत्तर भारत में कंपनी का कारोबार फैलाने में मदद की। हर छोटे-बड़े शहर और जिले को देखा। वहां कामकाज और बिजनेस का माहौल समझा। यह भी जाना कि कंपनी से किस क्षेत्र के लोग किस तरह का प्रोडक्ट चाहते हैं। इस नौकरी ने उनकी जिंदगी में तमाम नए अनुभव जोड़े।

जिस सॉफ्टवेयर पर काम कर रही थीं उसे डीआरडीओ ने ड्रोन में किया इस्तेमाल

पुणे में नौकरी के दौरान वह अपनी टीम के साथ जिस सॉफ्टवेयर पर काम कर रही थीं, उसे डीआरडीओ ने सेना के ड्रोन में इस्तेमाल किया। यह ड्रोन सीमा पर दुश्मनों की हरकतों पर नजर रखने के लिए बनाया गया था। ज्योत्स्ना कहती हैं, मुझे खुशी है कि मेरी कोशिश देश के किसी काम आई।

बेहतरीन संपादक भी है यूपी की यह उद्यमी

ज्योत्स्ना बेहतरीन संपादक भी हैं। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड एप्लाएंसिस मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन से जुड़ने के बाद उन्होंने संस्था की मैगजीन का प्रकाशन भी किया। इसमें उनके काम को उद्योग जगत और सरकार से सराहना मिली।
काबिलियत और कामयाबी का दूसरा नाम है Jyotsna
कॅरियर के हर कदम पर चुनी चुनौती

रिलाइंस इंडस्ट्रीज से कॅरियर शुरू करने वाली ज्योत्स्ना (Jyotsna) ने अपनी हर अगली नौकरी में खुद के लिए सुकून की बजाय चुनौती का चुनाव किया। रिलायंस के बाद टाइटन इंडस्ट्रीज, आईवेयर लॉजिक प्राइवेट लिमिटेड पुणे, इंफ्लेक्सिस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, पेल्फ इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड, वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में अलग तरह की नौकरी चुनी। इसके बाद कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड एप्लाएंसिस मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री नई दिल्ली में अहम पद पर रहने के बाद अब वह आईआईए लखनऊ की डिप्टी डायरेक्टर हैं।

लोग महिला सशक्तिकरण की बातें करते हैं मगर उसे जीवन में नहीं उतारते

अपने अनुभव साझा करते हुए ज्योत्स्ना (Jyotsna) कहती हैं, मैंने सार्वजनिक मंचों पर तमाम लोगें को महिला सशक्तिकरण के लंबे-चौड़े भाषण देते देखा है। कुछ ऐसी कंपनियों के अधिकारियों को भी, जहां महिला कर्मचारियों की नियुक्ति प्राथमिकता पर की जाती है। लोग कहते हैं कि महिलाओं को आगे बढ़ना चाहिए, ऐसा करना चाहिए, वैसा करना चाहिए। मगर जब आगे बढ़ने और कुछ करने का वक्त आता है तो पूछते हैं कि कैसे करोगी। बस इसी सोच को बदलने की जरूरत है। सोच बदलेगी तो माहौल अपने आप बदल जाएगा।

सरकार की योजनाएं ठीक, जमीन पर उतारने की जरूरत

महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार ने तमाम योजनाएं शुरू की हैं। सरकार की सोच में कोई कमी नहीं है। मगर, उस सोच को जमीन पर उतारने की जरूरत है। उद्यमियों को उद्योग शुरू करने के लिए तमाम एनओसी विभागों की लेनी पड़ती है। कई बार लोग एनओसी के लिए चक्कर लगाते-लगाते इतना थक जाते हैं कि उद्योग लगाने का मन ही बदल देते हैं। तमाम महिला उद्यमियों ने मुझसे अपने अनुभव साझा किए हैं, जो परेशान करने वाले हैं। अफसरों को सरकार की सोच को जमीन पर उतारने के लिए संजीदा होना पड़ेगा। तभी तस्वीर बदलेगी।

वेस्ट में काम करना बेहद आसान, नॉर्थ में अभी थोड़ी मुश्किल

ज्योत्स्ना (Jyotsna) कहती हैं, कामकाजी महिलाओं के लिए वेस्ट इंडिया में मुफीद माहौल है। मगर, उत्तर भारत में अभी थोड़ी सी दिक्कत है। ज्यादातर इलाकों में महिलाओं का काम करना ठीक नहीं माना जाता। जहां महिलाएं काम कर रही हैं, वहां उन्हें बेहतर माहौल नहीं मिल पाता है। मुंबई और पुणे में एक लड़की रात के दो बजे अपनी ड़यूटी खत्म करके आराम से घर लौट सकती है। यूपी और आसपास के राज्यों में ऐसा करना आसान नहीं है। इसमें अभी काफी सुधार करने की जरूरत है।

प्राथमिकताएं बदलना सीखिए और बनिए वूमन नंबर-1

महिलाओं की जिंदगी की प्राथमिकताएं हर मोड़ पर बदलती हैं। अगर आपको यह पता है कि कब आपकी क्या प्राथमिकता है तो जिंदगी में कभी दिक्कत नहीं होगी। एक बेटी, एक पत्नी, एक मां होना अलग-अलग मगर एक दूसरे से जुड़ी हुई बातें हैं। हर रोल में आपको कुछ अलग करना होता है। मैंने प्राथमिकताएं तय करके जिंदगी को अपने लिए आसान बना लिया है।

घर पर पहुंचकर भूल जाएं दफ्तर को

घर और दफ्तर के बीच तालमेल बिठाने का सबसे अच्छा फार्मूला यह है कि आप दफ्तर में घर को याद न रखें और घर जाकर दफ्तर को भूल जाएं। जो वक्त घर का उसे उसे पूरी तरह घरवालों के साथ बिताएं। छुट्टी का दिन पूरी तरह उनके नाम कर दें। जिस दिन आप ऐसा करना सीख लेते हैं उस दिन परिवार आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

अपनों के सहयोग के बिना कामयाबी मुश्किल

बचपन में मां-पापा ने हर कदम पर सहयोग किया। अब पति और ससुराल वाले मुझे हर दिन आगे बढ़ने का हौसला देते हैं। मुझे प्रेरित करते हैं कि मैं रोज कुछ बेहतर करूं। सच कहूं तो मेरे अपने यानी मेरा परिवार ही मेरी असली ताकत है। इस मामले में मैं खुद को बहुत भाग्यशाली समझती हूं। मेरे पति डॉक्टर हैं। वह  मेरे लक्ष्य और मेरे सपनों को अच्छे से समझते हैं। उनकी शाबासी और उनसे मिलने वाला हौसला मेरे रास्ते की हर मुश्किल को बौना कर देता है।

खुद को सुपरवूमन न समझें कामकाजी महिलाएं

ज्योत्स्ना (Jyotsna) का मानना है कि कामकाजी महिलाओं को खुद को सुपरवूमन नहीं समझना चाहिए। महिलाओं का यह रवैया कई बार घर और दफ्तर के बीच तालमेल बिगड़ने की वजह बन जाता है। दफ्तर में आप भले ही एक सुपरवूमन हों। मगर, घर में सिंपल वूमन बनकर रहना आपके कई रास्ते आसान कर देता है। ऐसा करने से पूरे परिवार के साथ आपकी जबरदस्त बॉंडिंग रहती है। आप अलग होकर भी सबके जैसे रहते हो और सब आपसे जुड़े रहते हैं।

खाना बनाते-बनाते भूल जाती हूं दिन भर की टेंशन

नौकरी करते हुए भी मैंने ससुराल में खाना बनाने के लिए मेड नहीं रखी। दफ्तर से घर जाने के बाद मैं उद्यमी और आईआईए की डिप्टी डायरेक्टर का चोला उतारकर सिंपल बहू बन जाती हूं। ससुराल के लोगों से खुलकर बात करती हूं। उनको गरमागरम खाना बनाकर खिलाती हूं। ऐसा करके मैं दिन भर की टेंशन और थकान भूल जाती हूं। मैं इसे हमेशा एन्ज्वाय करती हूं।
काबिलियत और कामयाबी का दूसरा नाम है Jyotsna
और चलते-चलते

ज्योत्स्ना (Jyotsna) दुर्गा मां की भक्त हैं, जिंदगी की उपलब्धियों का जिक्र करने पर मुस्कुराकर कहती हैं, यह सब ईश्वर और मेरे अपनों की वजह से है। मुझ पर मां की असीम कृपा है। उसके आशीर्वाद के बगैर जिंदगी इतनी आसान नहीं होती। यकीन मानिए, IAM BLESSED.

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