बिहार में पासवान भी महादलित में होंगे शामिल

नई दिल्ली। दलितों को लेकर सियासत जोरों पर हैं। हर कोई दलितो का मसीहा बनने की कोशिश कर रहा हैं। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से भी एक भीमराव आंबेडकर जयंती पर शुक्रवार को एससी-एसटी के लिए कई घोषणाएं की गई जिसमें नीतीश कुमार ने कहा हैं कि पासवान जाति भी महादलित में शामिल होंगी। बता दे कि नीतीश कुमार ने कहा कि जो योजनाएं दलितों को मिल रही हैं वो अब पासवान को भी मिलेगी यानि कि पासवान भी महादलितों में शामिल होगी। उन सभी का लाभ इन्हें भी मिलेगा। चाहे वह घर बनाने के लिए जमीन हो, दशरथ मांझी कौशल विकास योजना हो या कोई और योजना। मुख्यमंत्री शनिवार को सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र परिसर के बापू सभागार में आयोजित दलित सेना के राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि हाशिए पर रहे जाति के लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए महादलित में कुछ को शामिल किया गया था। अब पासवान जाति भी इसमें शामिल करने का निर्णय हो चुका है। गौरतलब हो कि एससी की पासवान ही एक जाति थी, जो महादलित से अलग थी। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा किया कि अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण छात्रावासों में रह रहे विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के अलावा अलग से कुछ राशि दी जाएगी। ताकि वे आराम से वहां रह सकें। साथ ही इन्हें बीपीएल की दर पर अनाज भी मिलेगा। सभी एससी-एसटी टोले में सामुदायिक भवन बनेंगे।

राजद शासन में कुछ नहीं मिला
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 साल के राजद के शासन काल में राज्य को कुछ नहीं मिला। दलितों की ये लोग बात करते हैं, पर उनके लिए भी कुछ नहीं किया। पति-पत्नी को 15 साल मौका मिला पर ये सेवा को भूल कर सिर्फ मेवा ग्रहण करने में लगे रहे। 2005 में एससी-एसटी के लिए छात्रवृत्ति पर 32.71 करोड़ खर्च होते थे, जिसे बढ़ा कर अब 428 करोड़ किया गया है। इस विभाग का बजट 2005 में 40.48 करोड़ था, जो बढ़ कर इस साल 1550 करोड़ हो गया।

सच्चाई सामने है, अब लोगों को फैसला करना है कि वे किसके साथ हैं। कहा कि हमलोग सभी वर्गों के लिए काम करते हैं। कुछ लोग समाज में तनाव और टकराव पैदा करने की कोशिश करते हैं, उनसे बचें। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, सांसद चिराग पासवान आदि ने अपना संबोधन दिया।

चौकीदार-दफादार के आश्रितों को नौकरी
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि चौकीदार-दफादार अगर अपनी सेवा समाप्त होने के कुछ माह पहले लिख कर यह देते हैं कि उनकी जगह उनके किसी आश्रित को नौकरी पर रखा जाय, तो उनके इस आग्रह को सरकार मान लेगी। चौकीदार को तीन हजार की जगह सात हजार और दफादार को आठ हजार सालाना उनके पोशाक के लिए राज्य सरकार देगी।