September 28, 2022 9:59 am
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श्रीरामकृष्ण ईश्वर के पूर्ण अवतार हैं: स्वामी मुक्तिनाथानंद

WhatsApp Image 2021 07 14 at 7.42.08 PM 5 श्रीरामकृष्ण ईश्वर के पूर्ण अवतार हैं: स्वामी मुक्तिनाथानंद

लखनऊ। सोमवार की प्रात: कालीन सत् प्रसंग में रामकृष्ण मठ लखनऊ की अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बताया कि इस युग में स्वयं ईश्वर ने श्री रामकृष्ण का रूप धारण करते हुए अवतरण किए थे। स्वामी ने कहा कि लोककल्याण के लिए, धर्म संस्थापन करने के लिए एवं अधर्म की शक्ति विनाश करने के लिए ईश्वर ने अवतार लिए। यह बात स्वयं श्री रामकृष्ण शरीर त्याग के एक वर्ष पहले जब वे दक्षिणेश्वर में भक्तगणों के बीच में बैठे थे तब उन्होंने ये गोपन बात अपने शिष्य मास्टर महाशय को कहा था।

उन्होंने कहा, “यहाँ दूसरा कोई आदमी नहीं है उस दिन मैंने देखा कि मेरा शरीर छोड़कर सच्चिदानंद बाहर हो आया; निकलकर उसने कहा, ‘हर एक युग में मैं ही अवतार लेता हूँ।’ तब मैंने सोचा यह मेरी कोई कल्पना होगी। फिर चुपचाप देखने लगा-तब मैंने देखा, वह स्वयं कह रहे है, ‘शक्ति की आराधना चैतन्य को भी करनी पड़ी थी’।”

अर्थात भगवान जब नररूप धारण करके नवद्वीप में चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतीर्ण हुए थे, उस समय में भी उन्होंने शक्ति की आराधना की थी। उन्होंने कहा कि इस बार भी श्री रामकृष्ण स्वयं ईश्वर के अवतार होते हुए दक्षिणेश्वर के काली मंदिर के पुजारी थे। उन्होंने काली की उपासना करते हुए शक्ति पूजा जगत में पुनः प्रवर्तित किया। यह उनके अवतरण का एक विशेष कारण भी था।

भगवान श्री रामकृष्ण की यह बात सुनकर उस समय कोई-कोई सोच रहे थे, कि क्या सच्चिदानंद भगवान ही श्री रामकृष्ण का रूप धारण कर हमारे पास बैठे हैं? भगवान क्या फिर अवतीर्ण हुए हैं? तब श्री रामकृष्ण ने मास्टर महाशय से फिर कहा, “मैंने देखा, इस समय पूर्ण आविर्भाव है, परंतु ऐश्वर्य सत्व गुण का है।” उपस्थित सभी भक्तगण आश्चर्य होकर यह बात सुन रहे थे। परवर्ती काल में इसका लिखित विवरण भी हमें मिलता है।

स्वामी जी ने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं श्रीकृष्ण अंगीकार किए थे कि जब भी प्रयोजन होगा तब ही विभिन्न युग में वह स्वयं अवतीर्ण होंगे, धर्मसंस्थापना के लिए। इस प्रतिज्ञा के अनुसार एक बार फिर धर्मसंस्थापना के लिए स्वयं भगवान ही इस युग मे सबके उद्धार करने के लिए श्री रामकृष्ण रूप धारण करके हमारे बीच आए थे। यह हमारा स्वर्णिम अवसर है कि हम उनके जीवनी एवं संदेश अनुसरण करते हुए ईश्वर लाभ करके मानव जीवन का उद्देश्य प्राप्त कर जीवन धन्य करें।

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