अन्तरात्मा की आवाज को प्रकृति के साथ जोड़ना ही साधना: चिदानन्द

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में हवाई द्वीप अमेरिका से आयी संगीतज्ञ अनन्द्रा जार्ज के मार्गदर्शन में आयोजित हार्ट आॅफ साउंड संगीत साधना विश्व के 15 देशों और छह महाद्वीपों से आये 45 से अधिक योग शिक्षकों ने विश्व ग्लोब का जलाभिषेक कर समापन इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने स्वच्छता और संगीत चले साथ-साथ का संदेश देते हुए कहा, हमारे अन्दर की आवाज अर्थात अन्तरात्मा की आवाज को प्रकृति की आवाज के साथ जोड़ना ही साधना है। इस मौके पर हार्ट ऑफ साउंड संगीत साधना में इंग्लैण्ड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, कनाडा, स्वीडन, सिंगापुर, चीन, फ्रांस, लेबनान, थाईलैण्ड, जर्मनी और यूएसए से आये योग साधकों को स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने प्रकृतिमय जीवन जीने और नदियों के संरक्षण का संकल्प कराया।

बता दें कि चिदानन्द महाराज ने कहा कि संगीत हमें ईश्वर से जोड़ता है और उसी संगीत के माध्यम से हम प्रकृति, पर्यावरण, नदियों एवं वृक्षों से जुड़े तो सारा वातावरण एक साथ गुनगुनाएगा जिससे शान्ति, स्वच्छता और सुरक्षित भविष्य रूपी मधुर संगीत का जन्म होगा। स्वामी ने कहा कि प्रकृति और प्रसन्नता का समावेश जीवन में बराबर होना चाहिए। हंसने-गाने और गुनगुनाने के साथ प्रकृति का संगीत भी चालू रहे। संगीत सीखे और गाये परन्तु जीवन में ऐसे कार्य करे जिससे प्रकृति का संगीत बंद न होने पाये अगर प्रकृति का संगीत बन्द हो गया तो सब कुछ शून्य हो जाएगा।

वहीं साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि संगीत आत्मिक विकास का मुख्य सोपान है, संगीत मन-मस्तिष्क को शांतमय बनाता है। संगीत है तो जीवन में आनन्द है, संगीत हमें ईश्वर के गुणानुवाद से जोड़ता है। विश्व के विभिन्न देशों से आये योग साधकों एवं संगीत प्रेमियों ने साध्वी भगवती सरस्वती के सांयकालीन सत्संग साधना में सहभाग कर अपनी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। साध्वी ने गीता, भागवत, रामायण और भारतीय दर्शन के माध्यम से भारतीय अध्यात्म और संस्कृति की जानकारी प्रदान की। बाद मे योग साधकों एवं संगीत प्रेमियों ने परमार्थ गंगा तट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में सहभाग भी किया।