देहरादून में पुलिस अधिकारियों के लिए एक दिवसीय लैंगिक संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया

देहरादून। राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली के सहयोग से पुलिस लाईन, देहरादून में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय लैंगिक संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अनिल के0 रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड ने बताया की सभ्य समाज कि जो परिकल्पना है उसमें मानव की बुद्धि व मानव की गरिमा एक महत्वपूर्ण विषय है और जब तक हम इसकी महत्ता को नही समझेंगे तब तक सभ्य समाज का निर्माण असम्भव है। इस संसार में लगभग 50 प्रतिशत जनसंख्या महिलाओं की है, समाज को व्यवस्थित करने में महिलाओं की अहम् भूमिका है। महिलाओं के प्रति हिंसा विकृत मानसिकता से निकलती है।

 

 

बता दें कि समाज में व्यवस्था स्थापित करने में पुलिस की अहम् भूमिका है। एक सभ्य समाज में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है, खासकर महिलाओं के प्रति हिंसा के लिए तो बिल्कुल भी नहीं, समाज के इस मूल्य को हमारे कानून में डाला गया है। हमारे संविधान में भी Dignity of the Individual की बात है, महिला की भी उतनी गरिमा है जितनी पुरुष की। विगत में हुई घटनाओं/दुर्घटनाओं को देखते हुए कानून में भी विस्तार हुआ है। बलात्कार एवं छेड़छाड़ की धाराओं में विस्तार करते हुए उसमें और प्रभावी बनाया गया है। दहेज से सम्बन्धित जो विकृतियां हैं, उनके सम्बन्ध में कानून बनाया गया है। यह जो सामाजिक विधान हैं, इसमें कानून को लागू करने का दायित्व हमारा है। कोई भी ऐसी घटना है जो महिलाओं से हिंसा, छेड़छाड़ या किसी भी दायरे में है, उसे ठीक करने का रास्ता यही है कि तुरन्त उसका संज्ञान लेकर मुकदमा पंजीकृत करें।

वहीं सबसे महत्तवपूर्ण है की महिलाओं के प्रति संवेदनशील होना और उन्हे समानता की नजर से देखना। अब धीरे-धीरे पुलिस में इस ओर संवेदनशीलता बढ़ रही है, हमारे पास उपलब्ध 25 हजार फोर्स में से 12 प्रतिशत से अधिक महिला पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी है। पुलिस फोर्स में महिलाओं के अच्छे अनुपात में जो देश के चार-पाँच अग्रणीय राज्य हैं उनमें हमारा स्थान भी है। इससे पुलिस में मानवीय चेहरा आता है। वर्तमान में हमारे 13 जनपदों में से 03 जनपदों की महिला आईपीएस अधिकारी कमान सम्भाले हुए हैं। महिलाओं को थानाध्यक्ष बनाने में भी हम जोर दे रहे है। पिछले वर्ष हमने लगभग 1000 महिला कर्मियों को कांस्टेबल तथा 150 को महिला उपनिरीक्षक के रुप में लिया है। महिला सशक्तिकरण की ओर यह बड़ा कदम है। महिलाओं के सम्बन्ध में Status of Policing in India-2018 के सर्वे में महिला शिकायतकर्ता को अपनी बात पुलिस के पास जाकर विश्वास से कहने में उत्तराखण्ड राज्य ने प्रथम स्थान पाया है।

साथ ही NCRB की वर्ष 2016 की रिपोर्ट के अनुसार देश में महिलाओं से सम्बन्धित कुल अपराधो में से मात्र 0.5 प्रतिशत उत्तराखण्ड में हुए। 29 राज्यों की तुलना में हम महिला अपराध नियन्त्रण में 08 वें स्थान पर हैं। महिलाओं के पुलिस फोर्स में आने से हमे काफी बल मिला है। पुलिस में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से महिलाओं के विरुद्ध जो अपराध होते हैं उसमें निश्चित तौर पर अंकुश लगेगा। आज इस कार्यशाला से हमारे पुलिस कर्मियों भरपूर्व लाभ मिलेगा जिससे हम एक सभ्य समाज की परिकल्पना को साकार करने में अपना योगदान दे सकेंगे।

वहीं आलोक रावत, सदस्य राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा विभिन्न राज्यों में किये गये कार्यों के सम्बन्ध में अपने अनुभव साझा करते हुए, महिला अपराधों में पुलिस की महत्तपूर्ण भूमिका के बारे में बताया गया। महिला से सम्बन्धित अपराधों एवं महिलाओं पर होने वाले Acid Attack में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होने कहा की यह महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में सबसे भयानक अपराध है, उन्होने ऐसे अपराधों की विवेचनाओं का जल्दी निस्तारण करने की अपील की, जिससे पीड़ित को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग से आये व्याख्याताओं/विशेषज्ञों सरवेश कुमार पाण्डे, कंचन खट्टर, नितीश चन्दन, कुमारी गीता राठी सिंह, द्वारा लिंग सम्बन्ध मुद्दे एवं संवेदीकरण, एनआरआई मुद्दे और महिलाओं से सम्बन्धित अपराधों में एफआईआर का महत्तव महिलाओं के विरुद्ध साईबर क्राईम के अपराध और निवारण और महिलाओं से सम्बन्धित कानून जैसे घरेलु हिंसा, दहेज निषेध अधिनियम आदि विषयों पर जानकारी दी गई।

इस अवसर पर आलोक रावत, सदस्य राष्ट्रीय महिला आयोग, राम सिंह मीणा, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन, वी0 विनय कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, अभिसूचना एवं सुरक्षा, दीपम सेठ, पुलिस महानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, पी0वी0के0 प्रसाद, पुलिस महानिरीक्षक, कारागार, संजय गुंज्याल, पुलिस महानिरीक्षक, पी0एम0, ए0पी0 अनशुमन, पुलिस महानिरीक्षक, पीएसी, अनन्त राम चौहन, पुलिस महानिरीक्षक, सीआईडी, जी0एस0 मार्तोलिया, पुलिस महानिरीक्षक, मुख्यालय, केवल खुराना, निदेशक यातायात, निवेदिता कुकरेती, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून सहित पुलिस अधिकार/कर्मचारी उपस्थित रहे।