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फतेहपुर में धर्मांतरण गैंग का गढ़, क्षेत्र में गुपचुप तरीके से होती थी एंट्री

फतेहपुर की ऐसी जगह, जहां आता रहा है धर्मांतरण गैंग, ऐसे बदलवाते थे धर्म

 

फतेहपुर: उमर गौतम जैसे लोग केवल एक ही धर्म में नहीं है बल्कि ऐसे लोग दूसरे धर्म में भी हैं। वो एजेंडे के तहत गुपचुप तरीके से अपना काम करते रहते हैं। तभी तो धर्मांतरण गैंग बेहद शातिराना तरीके से अपने मंसूबों को अंजाम देने में लगा है, जिससे उनकी गोपनीयता भंग न हो और काम भी होता रहे।

कुछ ऐसा ही षणयंत्र फतेहपुर जनपद में भी हो सकता है। क्योंकि ऐसे लोग गांव, कस्बों और नगरों में जाकर लोगों को उनके हिन्दू धर्म के प्रति भड़काते हैं और अपना धर्म स्वीकारने के लिए प्रलोभन देते हैं। समय रहते यदि ध्यान नहीं दिया गया तो यहां भी धर्मांतरण की स्थितियां देखने को मिल सकती हैं।

गुपचुप तरीके से आते थे विशेष घर में

जनपद के असोथर थाना क्षेत्र में क्रिश्चियन धर्म के लोग सक्रिय हैं। ये लोग क्षेत्र से नहर निकलने वाले मार्ग पर किसी विशेष घर में आते रहे हैं। रास्तों से गुजरते समय ये लोग अपनी पहचान छिपाने का प्रयास करते थे और फिर जब लोगों को विशेष घर में एकत्रित कर लेते थे तब अपनी वेशभूषा धारण करते थे। इसके बाद अपने धर्म की विशेषताओं को बताते हुए प्रार्थना करते थे।

बाहर किसी को कोई शक न हो इसलिए ये लोग जिन्हें कथित दीक्षा देते हैं, उन्हें गोपनीय तरीके से रहने का प्रशिक्षण भी देते हैं। नवंबर 2019 में एक बच्चा चर्चाओं में ‘जीजस के लोग आते हैं’ बोल गया तो पास में खड़े व्यक्ति ने उसे डांट-डपट कर चुप करवा दिया। लेकिन बातों ही बातों में उसने अपने गले में पहने क्रॉस को दिखा दिया, जो उसे छिपाकर रखने के लिए कहा गया था।

कोरोना के कारण आना-जाना और भी गोपनीय

बालक अपना नाम बता पता कि उसके पहले ही उसे मौके से चलता कर दिया गया। बालक का कहना था, ‘जीजस के लोग आते हैं, वो लोग हमें हिंदू धर्म छोड़कर क्रिश्चियन बनने के लिए कहते हैं।’ कुछ घरों में क्रिश्चियन धर्म की पूजा भी होने लगी थी, लेकिन कुछ दिन बाद कोरोना वायरस ने हमला बोल दिया। जिसके बाद उनका आना-जाना और भी गोपनीय हो गया।

ऐसे में सवाल यह है कि आसपास के ना जाने कितने गांवों में यह खेल खेला जा रहा होगा। प्रलोभन के जरिए धर्म की रोटी सेकने वाले ये लोग बेहद गोपनीय तरीके से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए बड़ी योजना और स्थानीय सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में यदि समय रहते इन सबके खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो एक दिन प्रदेश में धर्मांतरण का फिर से बड़ा भूचाल आएगा।

कोरोना काल में बंद है आना-जाना

मिशनरियों के आने की जानकारी पर स्थानीय लोग कम बात कर रहे हैं। इसका कारण यह भी हो सकता है कि उन्हें लगता होगा कि हम कहीं किसी पचड़े में न फंस जाएं। हालांकि, कुछ लोगों ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि जब से कोरोना महामारी शुरू हुई है, तब से मिशनरियों का आना बंद है। वो लोग आते थे और दलित परिवार के लोगों को पीपल के पेड़ के नीचे ले जाकर प्रार्थना आदि कराते थे। इसमें महिलाएं, बच्चे, बूढ़े सभी लोग शामिल होते थे।

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