cm yogi बजट की समस्या के कारण ग्रामीण इलाकों में नहीं हो पा रहा जन्म-मृत्यु का पंजीकरण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण नहीं किया जा रहा है क्योंकि सरकार ने इस संबंध में कोई बजट का आवंटन नहीं किया है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण बहुत कम है।

इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि सात रजिस्ट्रार ने 2012 और 2017 के बीच अपने जिलों में किसी भी जन्म को पंजीकृत नहीं किया जबकि 14 ने इस अवधि के दौरान अपने संबंधित क्षेत्रों में कोई भी मृत्यु दर्ज नहीं की।

सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 86 प्रतिशत राष्ट्रीय औसत की तुलना में राज्य में केवल 62.5 प्रतिशत जन्म पंजीकृत किए गए थे। मौतों के मामले में पंजीकरण का स्तर राष्ट्रीय औसत 78.1 प्रतिशत के मुकाबले सिर्फ 35.5 प्रतिशत है।

जहाँ भी मृत्यु और जन्म दर्ज किए गए थे, उत्तर प्रदेश के मुख्य रजिस्ट्रार ने उन्हें सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों से नहीं जोड़ा था, जिसका अर्थ है कि सरकार द्वारा बनाई गई योजनाएँ केवल अनुमानों पर आधारित थीं।

रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय ने, यूपी सरकार को एक पत्र में कहा कि राज्य ने ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन पंजीकरण में प्रशिक्षण देने की कोई व्यवस्था नहीं की है। “यूपी के मुख्य रजिस्ट्रार ने केवल शहरी क्षेत्रों के लिए योजनाएं तैयार कीं और शहरों के लिए वित्तीय सहायता की मांग की। पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म और मृत्यु का डिजिटल पंजीकरण शुरू करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं और यह उत्तर प्रदेश के कुल पंजीकरण आंकड़े को दर्शाता है।

Trinath Mishra
Trinath Mishra is Sub-Editor of www.bharatkhabar.com and have working experience of more than 5 Years in Media. He is a Journalist that covers National news stories and big events also.

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