September 23, 2021 11:31 am
यूपी राज्य

समाधि दे दो पर जमीन नहीं देंगे, मूर्ति बनाने को लेकर कहा

मूर्ति

5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन होना है जिसको लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं इसके चलते अयोध्या नगरी को दुल्हन की तरह सजा दिया गया है। अयोध्या के ही गांव बरहट में श्रीराम की 251 मीटर ऊंची मूर्ति बननी है जिसको लेकर गांव के लोगों का कहना है कि वह अपनी जमीन नहीं देंगे चाहे उसके लिए उनकी जान क्यों ना चली जाए। आपको बता दें कि अयोध्या के गांव बरघाट में श्री राम की 251 मीटर की मूर्ति को बनाने के लिए 86 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी और जमीन के अधिग्रहण को लेकर नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है इसको लेकर गांव के लोगों का कहना है कि हम किसी भी शर्त पर जमीन नहीं देंगे।

मूर्ति बनाने को लेकर हुआ विवाद

एक तरफ जहां राम मंदिर का भूमि पूजन किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ मूर्ति बनाने की जगह को लेकर विवाद छिड़ गया है। बरहट गांव के लोग किसी भी कीमत पर जमीन देने के लिए तैयार नहीं है और साथ ही वह किसी भी कीमत पर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिख रहे है। बरहट गांव के लोगों का कहना है कि वह अगर जमीन खाली करते हैं तो वह कहां पर जाकर रहेंगे। इसी को लेकर उन्होंने कहा है कि वह अपनी जमीन किसी भी शर्त पर नहीं देंगे। गांव के लोग इसको लेकर जिद पर अड़े हुए हैं।

गांव वालों ने जाहिर की नाराजगी

मूर्ति बनाने की जमीन को लेकर गांव के लोगों में काफी नाराजगी है उनका कहना है कि इसके अलावा भी उस मूर्ति को दूसरी जगह पर बनाया जा सकता है इसके लिए उन्होंने अयोध्या में खाली पड़ी अन्य जमीनों का उदाहरण देते हुए कहा है कि दूसरी जगह पर जाकर मूर्ति का निर्माण किया जाए। वह गांव में किसी भी शर्त पर मूर्ति का निर्माण नहीं होने देंगे और ना ही अपनी जमीन इसके लिए देंगे। उन्होंने कहा है कि इस जमीन से उनका पालन पोषण होता है और इसी जमीन से वो अपना गुजारा करते हैं। अगर यह जमीन चली जाती है तो उनके रहने के लिए भी कोई जगह नहीं रहेगी। गांव वालों ने इसको लेकर अपना दर्द भी बयां किया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने अपनी जमीनों व घरों को अपने खून पसीने से सींचकर बनाया है जिसे वह किसी भी कीमत पर देने के लिए तैयार नहीं है।

हाईकोर्ट पहुंचे ग्रामीण

गांव के लोगों का कहना है कि वह अंग्रेजों के वक्त से यहां पर रह रहे हैं और आज अचानक उन्हें जमीन खाली करने के लिए कहा जा रहा है और किसानों के पास अपनी जमीन के कागज भी नहीं है। इस मामले को लेकर गांव वाले हाईकोर्ट पहुंच गए। मामले में हाईकोर्ट ने बंदोबस्ती के आदेश दिए है। यहां पर 259 भूखंडों में से 174 महर्षि नारायण विद्यापीठ ट्रस्ट के नाम पर है। गांव के लोगों का कहना है कि अगर सरकार मुआवजा भी देती है तो ग्रामीणों को इसका फायदा नहीं मिलेगा और वह कहीं के नहीं रहेंगे।

भू- माफियाओं के नाम है जमीन

लोगों का कहना है कि जमीन को भू- माफियाओं ने अपने नाम पर करवा लिया था और वह यहां पर रहते भी नहीं है लेकिन जमीन उन्ही के नाम पर है और अगर सरकार जमीन का पैसा भी देती है तो वह है ग्रामीणों को नहीं मिलेगा।

घर ना टूटने की मांग की

1984 में जमीन की बंदोबस्ती की गई थी लेकिन कुछ वजहों के चलते बंदोबस्ती को रोक दिया गया। इस गांव में प्रधान भी होता है और लेखपाल यहां की जमीनों का बंटवारा करते हैं। प्रशासन ने गांव को नगर निगम में शामिल कर दिया है। नगर निगम में होने के कारण गांव वालों को मुआवजा भी आधा ही मिलेगा। जिसके कारण गांव वालों में काफी नाराजगी है और वह इसका जमकर विरोध कर रहे है। साथ ही गांव के लोगों ने मांग की है कि हम सबका घर नहीं टूटना चाहिए सरकार चाहे तो खाली जमीन पर मूर्ति बना सकती है। खाली जमीन पर मूर्ति बनाने को लेकर उनको कोई विरोध नहीं है। लेकिन वो अपने घर व खेती की जमीन को किसी भी कीमत पर नहीं दे सकते। गांव वाले इस बात को लेकर अड़े हुए है। और पीछे हटने को तैयार नहीं है।

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