राजस्थान की उच्च शिक्षा मंत्री को नामांकन मामले में कोर्ट से मिली राहत

जोधपुर। राजस्थान की उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी को विधानसभा चुनाव के दौरान नामांकन पत्र में हेराफेरी करने के आरोप में राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। मामले के आधार पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश देते हुए कोर्ट के शीतकालीन अवकाश से पहले जस्टिस मेहता ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसले को सुरक्षित रख दिया है। संदीप मेहता की पीठ ने अधिवक्ता डॉक्टर सचिन आचार्य की दलील स्वीकार करते हुए ये फैसला सुनाया है। दरअसल मंत्री किरण माहेश्वरी पर विधानसभा चुनाव के दौरान नामांकन पत्र मे हेराफेरी करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की गई थी।

मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने वाले जितेन्द्र खटीक ने माहेश्वरी पर फर्जी दस्तावेज के सहारे चुनाव लड़ने का आरोप लगाया था, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए माहेश्वरी को बड़ी राहत दी है और खटीक की एफआईआर को रद्द कर दिया है। मंत्री के खिलाफ दर्ज एफआईआर की बात करें तो खटीक ने एक परिवाद मुख्य न्यायिक जज राजसमंद द्वारा 4 मई 2017 को धारा 156(3) के तहत थाना राजनगर में एफआईआर दर्ज करवाई थी, लेकिन 11 मई 2017 को माहेश्वरी और अतिरिक्त कलक्टर ब्रजमोहन बैरवा ने इसका दोबारा से निरिक्षण कर इस एफआईआर के तहत जिला न्यायालाय में याचिका दायर कर दी।

जिस पर सुनवाई के बाद 27 मई को मंत्री और एडीएम के अधिवक्ता रामचंद्र देवपुरा ने नोट प्रेस कर लिया। इसके बाद जिला न्यायालय ने पुनरीक्षण याचिका खारीज करते हुए नीचली अदालत के आदेशानुसार एफआईआर राजनगर थाने मे दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। इसके चार दिन बाद राजनगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच के लिए सीआईडीसीबी उदयपुर को फाइल रेफर कर दी। वहीं मंत्री किरण माहेश्वरी ने अधिवक्ता डॉक्टर सचिन आचार्य के जरिए सीआरपीसी की विविध अपराधित धारा 482 के तहत एफआईआर को रद्द करवाने को लेकर एक याचिका दायर कर दी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस याचिका को गलत मानते हुए इसे रद्द कर दिया है।