रेल टिकट में फर्जीवाड़ा रेलवे पुलिस फोर्स ने किया टिकट रैकेट का पर्दाफाश, हर महीने करोड़ों कमा कर आतंकी फंडिंग में करता था इस्तेमाल

नई दिल्ली। रेलवे पुलिस फोर्स ने टिकट रैकेट का पर्दाफाश करते हुए कथित ‘सॉफ्टवेयर डिवेलपर’ को भी अरेस्ट किया है। इस रैकेट के तार पाकिस्तान, बांग्लादेश और दुबई तक से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। यह रैकेट टिकटों की धांधली कर हर महीने करोड़ों कमाता था और आतंकी फंडिंग में इस्तेमाल करता था। आरपीएफ ने बताया कि झारखंड के रहने वाले गुलाम मुस्तफा को भुवनेश्वर से अरेस्ट किया गया है और सोमवार को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरपीएफ ने मुस्तफा समेत 27 लोगों को अरेस्ट किया है। अब मामले की जांच से आईबी और एनआईए भी जुड़ गए हैं।

बता दें कि यह रैकेट महज 1.48 मिनट में 3 टिकट बुक कर लिया करता था। आमतौर पर एक टिकट को मैन्युअली बुक करने में 2.55 मिनट तक का वक्त लगता था। साफ है कि इस गैंग के चलते कई जरूरतमंदों को यात्रा के लिए टिकट नहीं मिल पाते थे और उन्हें परेशान होना पड़ता था। आरपीएफ के मुताबिक यह गैंग कई बार 85 फीसदी टिकट अकेले ही बुक कर लेता था, जिन्हें मनमाने दामों पर यात्रियों को दिया जाता था। हालांकि रेलवे की कमाई पर इससे कोई असर नहीं पड़ा था, लेकिन आम यात्रियों से काफी रकम ऐंठ ली जाती थी।

आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि मुस्तफा से दो लैपटॉप बरामद किए हैं, जिनमें एएनएमएस नाम का एक सॉफ्टवेयर भी है। इस सॉफ्टवेयर के जरिए यह रैकेट बड़ा खेल करता था। अरुण कुमार ने बताया कि सॉफ्टवेयर इंजिनियरिंग जैसी किसी भी पढ़ाई से नाता न रखने वाले मुस्तफा ने इसे डिवेलप किया था। इस सॉफ्टवेयर के जरिए रैकेट ने आईआरसीटीसी की ओर से टिकट फ्रॉड रोकने के लिए लागू सभी बैरियर्स का तोड़ निकाल लिया था। कैप्चा और बैंक ओटीपी जैसी कई प्रक्रियाओं के बिना ही ये लोग टिकट बुक कर लिया करते थे। यह गैंग इस घोटाले के जरिए हर महीने 10 से 15 करोड़ रुपये तक समेट रहा था। इस गैंग का पहला टारगेट कैश कमाना होता था।

कैश कमाने के बाद ये लोग इस रकम से टेरर फाइनैंसिंग करते थे। आरपीएफ की ओर से गिरफ्तार लोगों से अब तक पूछताछ में यह पता चलता है कि इस पूरे रैकेट के तार पर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हुए हैं। यही नहीं सुरक्षा एजेंसियों को मुस्तफा के लैपटॉप में एक ऐसा ऐप्लिकेशन भी मिला है, जिसके जरिए फर्जी आधार कार्ड तैयार किए जाते थे। आरपीएफ ने यूपी के बस्ती जिले के रहने वाले हामिद अशरफ की पहचान रैकेट के मुखिया के तौर पर की है। अशरफ बीते साल पड़ोस के ही जिले गोंडा में हुए बम धमाकों में वॉन्टेड रहा है। गिरफ्तारी के डर से वह नेपाल के रास्ते दुबई चला गया था।

आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने बताया कि मुस्तफा ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी। वह ओडिशा में एक मदरसे में पढ़ा था। आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर उसने अपने 563 आईडी बना रखी थीं। इसके अलावा 2,400 एसबीआई शाखाओं और 600 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में भी उसके खाते थे। इस गैंग ने टिकटों के घोटाले में कितनी महारत हासिल कर ली थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 20,000 एजेंट्स और अन्य लोगों ने इस रैकेट से सॉफ्टवेयर खरीदा था। इस मामले में एक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी पर भी जांच एजेंसियों की नजर है। आरपीएफ ने डीजी ने कहा कि हमें इस कंपनी के भी रैकेट से जुड़े होने का संदेह है। यह कंपनी सिंगापुर में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में भी शामिल रही है। आरपीएफ के मुताबिक मुस्तफा पाकिस्तान में सक्रिय तबलीक-ए-जमात का समर्थक है।

Rani Naqvi
Rani Naqvi is a Journalist and Working with www.bharatkhabar.com, She is dedicated to Digital Media and working for real journalism.

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