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भाजपा के खेल में फंसे राहुल, अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक

charo khane chit भाजपा के खेल में फंसे राहुल, अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक

नई दिल्ली। आखिरकार जनादेश आ गया है, रूझानों और परिणामों के बीच ये साफ हो गया कि मोदी का मैजिक अभी जनता के बीच तो कायम है लेकिन गुजरात भी मोदी के रंग में रंगा हुआ है। 2019 लोकसभा चुनाव के पहले गुजरात का रण काफी महत्व रखता था। इसको लेकर कांग्रेस ने पूरी तरह से अपनी ताकत झोंक दी थी। राहुल गांधी लगातार दौरे और जनसभाओं के लिए जनता के बीच जा रहे थे। उधर गुजरात के यूथ के नाम पर जातीय राजनीति को युवा रंग देने के लिए अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक भी ताल ठोंक कर मैदान में मौजूद थे। लेकिन मोदी और शाह के करिश्माई खेल के आगे सारे चक्रव्यूह ध्वस्त हो गए।

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पाटीदारों और गैर पाटीदारों के बीच हुई वोटों की जंग
पाटीदारों को साथ लेकर कांग्रेस ने अपनी गुजरात की जंग शुरू की लेकिन कई बार दो अर्थी बयानों के कारण पाटीदारों में भी कांग्रेस को लेकर विश्वास कम दिखा। इसके साथ ही गैर पाटीदार वोटर भी कांग्रेस के रूख से अलग होते दिखे। वहीं अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक को लेकर बार-बार भाजपा की ओर से हो रहे खुलासों ने इनके आंदोलन और राजनीतिक महत्वाकांक्षा की सारी पोल खोल दी। जिसका परिणाम इन्हे जनता के वोटों के रूप में देखने को मिल रहा है। भाजपा की सधी गणित में ये चौकड़ी उलझ गई और मुद्दों से बिखर कर बातों और जुबानों की जंग में उतर पर जनता और मुद्दों से दूर हो गई।

पाटीदारों को भी पाले में नहीं रख पाए
भाजपा की ओर से टिकट बंटवारे और कांग्रेस की और से सीट बंटबारे ने अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक के वोटरों को अचम्भित कर दिया। इसके चलते इनका बंटबारा हो गया। पूरा लाभ कांग्रेस के पाले में नहीं गया। भाजपा की टिकट बंटबारे की चाल यहां पर इसी वजह से कामियाब हो गई। वहीं कांग्रेस के साथ अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक भी पाटीदारों को अपने पाले में नहीं रख सके । समान अधिकार और आरक्षण की बात को लेकर सरकार को घेरने वाले टिकट और राजनीति के चक्कर में मुख्य मुद्दों से अलग हो कांग्रेस के सुर में गाने लगे। जिसका परिणाम अब दिख रहा है।

गुजरात में जातीय गणित में उलझ गई कांग्रेस
गुजरात में मुद्दों की जंग की शुरूआत करने वाले कांग्रेस चुनाव के चढ़ते ही मुद्दों की इतर भागने लगी। कभी बयान बाजी को लेकर कभी जातीय टिप्पणियों को लेकर इसके बाद कांग्रेस ने अपने नीति के खिलाफ धर्म और जातिगत राजनीति को भी शामिल करने का प्रयास किया। अब तक जिन मुद्दों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच वैचारिक मतभेद था उसी मुद्दे का सहारा कांग्रेस को लेना पड़ा । एक तरह से गुजरात चुनाव में साफ हो गया कि भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस धर्म और जातिगत समीकरणों को साधने के लिए मैदान में खड़ी है। जिसके परिणाम के चलते कांग्रेस के परम्परागत वोटर भी कटे और नए वोट उसे हासिल भी नहीं हो सके कि वह बहुमत के करीब आए।

मुख्य मुद्दे से कई बार भटके और अन्त में मुद्दे से इतर होना पड़ा भारी
गुजरात के रण की शुरूआत पाटीदार आरक्षण और कांग्रेस के पागल विकास की खोज से विपक्ष ने शुरू की लेकिन विपक्ष पहले ही बंटा रहा। चुनाव के चढ़ने के बाद राहुल गांधी,अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक के बीच सीटों और समर्थन जैसे मुद्दों पर सहमति बनी लेकिन ढाक तीन पात जैसी ही थी। पाटीदार आरक्षण को लेकर जहां गैर पाटीदार कांग्रेस से कटे वहीं भाजपा की वोट काटो रणनीति का शिकार भी कांग्रेस को होना पड़ा। जिसके परिणाम स्वरूप भाजपा ने पाटीदारों को टिकट देकर कांग्रेस के साथ उसके सहयोगियों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। इसके बाद जुबानी जंग और गैर चुनावी मुद्दों का सहारा लेकर भाजपा ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों के मुद्दे से ही भटका दिया,जो कि अन्त तक जारी रहा।

Piyush Shukla भाजपा के खेल में फंसे राहुल, अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक अजस्र पीयूष

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