22e96740 a597 42c9 a0bf 2f9e0e01f8e2 आरबीआई ने जारी किया बड़ी कंपनियों को बैंकों का प्रमोटर बनने का प्रस्ताव, पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने की आलोचना
फाइल फोटो

नई दिल्ली। देश में इन दिनों कोरोना के चलते आर्थिक हालात कुछ ठीक नजर नहीं आ रहे हैं। बैंको पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। जिसके चलते कई बैंको पर आरबीआई ने प्रतिबंध लगा दिया है। बैंको के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ऐसे में रिजर्व बैंक के द्वारा गठित एक आंतरिक कार्य समूह (IWG) ने पिछले हफ्ते कई सुझाव दिए थे। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गठित इंटरनल वर्किंग ग्रुप ने बैंकिंग नियमन कानून में जरूरी संशोधन के बाद बड़ी कंपनियों को बैंकों का प्रमोटर बनने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया है। जिसके चलते इस प्रस्ताव की रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कॉरपोरेट घरानों को बैंक स्थापित करने की मंजूरी देने की सिफारिश की आलोचना की है।

गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों को दिया जा सकता है बैंकिंग लाइसेंस-

बता दें कि रिजर्व बैंक के द्वारा गठित एक आंतरिक कार्य समूह (IWG) ने पिछले हफ्ते कई सुझाव दिए थे। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गठित इंटरनल वर्किंग ग्रुप ने बैंकिंग नियमन कानून में जरूरी संशोधन के बाद बड़ी कंपनियों को बैंकों का प्रमोटर बनने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया है। यही नहीं, वर्किंग ग्रुप ने बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को बैंकों में तब्दील करने का भी प्रस्ताव दिया है। RBI इस रिपोर्ट के आधार पर अंतिम गाइडलाइंस जारी करेगा। जिसके चलते रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कॉरपोरेट घरानों को बैंक स्थापित करने की मंजूरी देने की सिफारिश की आलोचना की है। दोनों का कहना है कि आज के हालात में यह निर्णय चौंकाने वाला और बुरा विचार है। राजन और आचार्य ने एक संयुक्त लेख में यह कहा कि इस प्रस्ताव को अभी छोड़ देना बेहतर है। इन सिफारिशों में सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसे गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFC) को बैंकिंग लाइसेंस देने की वकालत की गई है, जिनका एसेट 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है और जिनका कम से कम 10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड है और साथ ही बड़े औद्योगिक घरानों को भी बैंक चलाने की अनुमति दी जा सकती है।

इस प्रस्ताव के बाद बैंक पर क्या पड़ेगा असर-

रिजर्व बैंक की समिति की सिफारिशें आने के साथ ही बहस भी शुरू हो गई है। राजन और आचार्य ने एक संयुक्त लेख में यह कहा कि इस प्रस्ताव को अभी छोड़ देना बेहतर है। लेख में कहा गया है, बैंकिंग का इतिहास बेहद त्रासद रहा है. जब बैंक का मालिक कर्जदार ही होगा, तो ऐसे में बैंक अच्छा ऋण कैसे दे पाएगा? जब एक स्वतंत्र व प्रतिबद्ध नियामक के पास दुनिया भर की सूचनाएं होती हैं, तब भी उसके लिये फंसे कर्ज वितरण पर रोक लगाने के लिये हर कहीं नजर रख पाना मुश्किल होता है। लेख रिजर्व बैंक के कार्य समूह के प्रस्ताव की ओर इशारा करते हुए कहा गया इसमें कहा गया है कि बड़े कॉरपोरेट घरानों को बैंकिंग क्षेत्र में उतरने की मंजूरी दी जाए। भले ही यह प्रस्ताव कई शर्तों के साथ है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। ऐसा अभी क्यों? यह आलेख रघुराम राजन के लिंक्डइन प्रोफाइल पर सोमवार को पोस्ट किया गया।

Trinath Mishra
Trinath Mishra is Sub-Editor of www.bharatkhabar.com and have working experience of more than 5 Years in Media. He is a Journalist that covers National news stories and big events also.

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