शक्तिउदय से महिलाओं के भाग्योदय में जुटीं रेखा, गरीबों की जिंदगी बदलने का जरिया बन गया एक आइडिया

लखनऊ। एक आइडिया आपकी जिंदगी बदल सकता है। यह सच है। इससे बड़ा सच यह है कि कभी-कभी आपका एक आइडिया तमाम लोगों की जिंदगी बदलने की वजह बन जाता है। बशर्ते आपमें अपने विचार को बाजार तक ले जाने के लिए  प्रोजेक्ट शक्ति उदय की शुरुआत करने वाली उद्यमी व इंटरनेशनल ट्रेड एक्सपर्ट रेखा शर्मा जैसा जुनून हो।

रेखा शर्मा ने उत्तराखंड की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट शक्ति उदय शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद है। उत्तराखंड सरकार की मदद से वह इस प्रोजेक्ट को तमाम गांवों तक पहुंचाने में जुटी हैं।

शक्तिउदय से महिलाओं के भाग्योदय में जुटीं रेखा, गरीबों की जिंदगी बदलने का जरिया बन गया एक आइडिया

रेखा शर्मा मूलरूप से उत्तराखंड के टिहरी जिले की रहने वाली हैं। पिता सरकारी नौकरी पर थे। इसलिए पढ़ाई-लिखाई भोपाल में हुई। स्कूली जीवन में रेखा के दिमाग में हर रोज नए बिजनेस आइडिया आते थे। कुछ आइडिया को वह कॉपी पर उतार लेंती और कुछ रोजमर्रा की भागदौड़ में विचारों के बीच गुम हो जाते।

 

राष्ट्रीय महिला कोष से की कॅरियर की शुरुआत

एमकॉम-बीएड करने के बाद रेखा ने राष्ट्रीय महिला कोष ज्वाइन किया। कोष का मकसद महिलाओं को आगे बढ़ाना था। यह उनका पसंदीदा काम भी था। यहां नौकरी के दौरान उन्हें मेधा पाटकर और रुकमिणी भार्गव जैसी सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ तमाम आंदोलनों में भाग लेने का मौका मिला। शराब बंदी से लेकर बड़े सामाजिक सुधारों का जरिया बने आंदोलनों में वह शामिल हुईं।

 

कॅरियर में हमेशा किए नए बदलाव

टीचर के तौर पर नौकरी शुरू करने वाली रेखा की अगली कंपनी थी मैक्स न्यूयॉर्क इंश्योरेंस। यहां वह जीवन बीमा की ट्रेनर बनीं। इस नौकरी के दौरान उन्होंने एक बड़े तबके को यह समझाया कि इंसान की जिंदगी में बीमा क्यों जरूरी है।मगर कुछ अलग करने की चाह ने उन्हें बहुत दिन तक इस कंपनी में काम नहीं करने दिया।

 

तीन प्रदेशों में सफल बनाया आधार प्रोजेक्ट

कॅरियर में फिर एक नई चुनौती लेकर उन्होंने नई कंपनी अतिशय लिमिटेड ज्वाइन की। इस बार उन्होंने मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में आधार प्रोजेक्ट को सफलता से लागू कराया। इन राज्यों में आधार कार्ड प्रोजेक्ट की सफलता में उनका योगदान अहम रहा।

शक्तिउदय से महिलाओं के भाग्योदय में जुटीं रेखा, गरीबों की जिंदगी बदलने का जरिया बन गया एक आइडिया

चैंबर की सचिव बनने के बाद मिली सपनों को उड़ान

रेखा की कार्यदक्षता देखकर उन्हें मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स का सचिव बनाया गया। यहां से उनके सपनों को असली उड़ान मिली। अपने बिजनेस आइडिया को उन्होंने मूर्त रूप देना शुरू किया। अपने 24 साल के सफर में वह 17 राज्यों के 800 से अधिक उद्योगों में मददगार की भूमिका निभा चुकी हैं।

 

सब्जी खरीदते वक्त मन में आया सवाल, जवाब खोजने में जुटीं तो हुआ शक्ति उदय

रेखा बताती हैं, बार दफ्तर से लौटते वक्त एक बार मैं सब्जी लेने रुक गई। चार तरह की सब्जी ली तो पेपर वाले ने चार पेपर बैग पकड़ा दिए। उनको लेकर जाना मुश्किल काम था। मेरी तरह रोजाना हजारों लोग दफ़तर से लौटते वक्त सब्जी खरीदते हैं और उन्हें पेपर बैग को सही सलामत घर तक ले जाने में दिक्कत होती है। इसका समाधान क्या है,  इस सवाल का जवाब मैं रातभर खोजती रही।

बड़े लोग जब कहीं जाते हैं तो उनके स्वागत में रेड कारपेट बिछाया जाता है। दिक्कत छोटे आदमी के साथ होती है, जो बड़ा बनने के सपने देखता है। अपने सपने सच करने के लिए चलता है, दौड़ता है, गिर पड़ता है, मगर उसका कोई हाथ नहीं पकड़ता। मैं हमेशा सोचती थी कि क्या मैं किसी ऐसे इंसान की मददगार बन सकती हूं। जो भले ही छोटा हो, मगर सपने बड़े देखता हो।

दूसरे दिन बाजार जाकर कई तरह का कपड़ा खरीद लाई और कुछ महिलाओं की मदद से बैग तैयार करने शुरू कर दिए। पहली बार में हमने जो बैग तैयार किए उनकी लागत पांच रुपये प्रति बैग आई। मुझे लगा कि ये पहाड के उन गांवों के लिए एकदम मुफीद प्रोजेक्ट हैं जहां घर के मुखिया को त्रासदी ने छीन लिया था। यह प्रोजेक्ट वहां के परिवारों को आत्मनिर्भर बना सकता है।

शक्तिउदय से महिलाओं के भाग्योदय में जुटीं रेखा, गरीबों की जिंदगी बदलने का जरिया बन गया एक आइडिया

उत्तराखंड के गांवों से जोड़ा प्रोजेक्ट

उत्तराखंड की त्रासदी के बाद मैंने वहां के गांवों को बडे करीब करीब से देखा। तमाम गांव ऐसे हैं जहां कोई पुरुष नहीं बचा। केवल महिलाएं और बच्चे ही हैं। उनके पास जिंदगी गुजारने के लिए कोई ठोस आधार भी नहीं है। मुझे लगा कि क्या मैं इनकी कुछ मदद कर सकती हूं, अगर हां तो कैसे, इस सवाल का जवाब मुझे शक्तिउदय के रूप में मिला। तब से मैं काम पर जुटी हूं। मेरी कोशिश है कि मैं अधिक से अधिक परिवारों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ सकूं।

 

कुछ इस तरह प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

प्रोजेक्ट तैयार करने के बाद मैंने इसे मंजूरी के लिए उत्तराखंड सरकार के पास भेजा। मुझे इंवेस्टर समिट से बुलावा आया। मैं अपना प्रोजेक्ट लेकर पहुंची। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने मेरी बात बड़े ध्यान से सुनी। प्रोजेक्ट देखकर वह काफी खुश हुए। कुछ दिन बाद मेरा प्रोजेक्ट मंजूर हो गया। सरकार ने मेरी बात समझी, इसके लिए मैं उत्तराखंड सरकार की हमेशा आभारी रहूंगी। दरसल, सरकार के साथ होने से मुझे वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने में भी मदद मिल रही है।

गांवों में कैंप करके महिलाओं को दी ट्रेनिंग 

प्रोजेक्ट मंजूर होने के बाद रेखा ने अपनी टीम के साथ उत्तराखंड के गांवों में कैंप किया। महिलाओं को कपड़े के बैग बनाने और सिलाई-बुनाई की ट्रेनिंग दी। प्रोजेक्ट के बारे में सुनकर कुछ कंपनियों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उनकी मदद से हमने वहां सिलाई मशीनें और दूसरी चीजें दीं। प्रोजेक्ट के बारे में सुनकर लोग इससे जुड़ने लगे हैं।

मुझे हमेशा लगता है कि मैं बिजनेस करने के लिए ही पैदा हुई हूं, बिजनेस आइडिया मेरे रग-रग में दौड़ते हैं। राउंड द क्लॉक काम करती हूं। सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक। मेरा मानना है कि सफल जिंदगी वही है, जिसमें आप समाज और देश के लिए कुछ बेमिसाल चीजें कर जाएं। 

 

उपलब्धियों के सफर पर एक नजर

रेखा MARS नाम से अपनी एक कंपनी चलाती हैं। इसका पूरा नाम है मार्केटिंग असिस्टेंस एंड रिसर्च सपोर्ट। यह कंपनी अंतराष्ट्रीय कारोबार और निवेश करने वाले लोगों की मित्र की भूमिका निभाती है। इसके अलावा वह इन कंपनी व संस्थाओं में भी सक्रिय हैं।

ManagingDirector–arnsInfraPvt.Ltd.
Director–ShivanshInfraProjectsLimited
Advisor EagleEyeInternational–Sharjah,UAE
TradeConsultant–FederationofChambersofCommerceandIndustryofSriLanka
ManagingCommitteeMember–MahilaUdhyamiSangathan(WomenEntrepreneursAssociation)

वह द ताइवान एक्सटर्नल ट्रेड डेवलपमेंट काउंसिलंग से जुड़ी हैं। यह ताइवान की प्रमुख उद्योग प्रोत्साहन संस्था है। इस संस्था से जुड़ने के बाद वह गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, दिल्ली एनसीआर में ताइवान के उद्योगों की स्थापना करा चुकी हैं। तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने श्रीलंका में भी ताइवान के कारोबार के लिए रास्ते खोले हैं।

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इन प्रोजेक्ट पर प्रमुखता से किया काम
July2012–MadhyaPradeshPioneerProject
April2014–Jaipur,Delhi,andLucknowmarketresearch
July2014–Vadodara,Surat,Ahmedabad–GujaratPioneerProject
July2015–Pune–Maharashtramarketresearchforautoindustry
October2015–HyderabadandChennaimarketresearch
October2016–Tirupurmarketresearch
March2017–Colombomarketresearch
June2017–Ludhianamarketresearch
आईआईए में भी अहम भूमिका निभा रही हैं रेखा

रेखा शर्मा इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। वह इंटरनेशनल अफेयर्स एंड एक्सपोर्ट कमेटी की को-चेयरपर्सन हैं।

ताइवान और भारत के बीच कारोबारी रिश्ते मजबूत बनाने में बनी मददगार

रेखा शर्मा ताइवान और भारत के बीच कारोबारी रिश्ते मजबूत बनाने में मददगार बनीं। दोनों देशों के कारोबार और कारोबारियों की जरूरतों को समझकर कारोबार और निवेश का मॉडल बनाया, जो कि सफल रहा। श्रीलंका में भी उनकी मेहनत रंग लाई।

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पहाड़ों से पलायन रोकने के मिशन पर जुटी है यह बेटी

रेखा पहाड़ों में रोजगार के अधिक से अधिक मौके बढ़ाना चाहती है। कहती हैं, पहाड़ के युवाओं में टैलेंट है। मगर, उनके पास मौके नहीं है। अगर वहां छोटे-छोटे उद्योग लगा दिए जाएं तो युवाओं को रोजगार की तलाश में पहाड़ नहीं छोड़ना पड़ेगा। मैंने अपनी तरफ से एक छोटी सी कोशिश भी शुरू की है। इस उम्मीद से साथ कि उससे पहाड़ के लोगों की जिंदगी में कुछ बदलाव आएगा।

मैं चाहती हूं कि भारत में छोटे उद्योगों को अधिक से अधिक मदद मिले। उद्योग गांव, गरीब और किसान के दरवाजे तक तक पहुंचें। नौकरियां शहर से चलकर गांव तक जाएं। मैदान से पहाड़ों तक जाएं। देश में ज्यादा से ज्यादा विदेशी निवेश आए। उद्योग बढ़ेंगे तो बेरोजगारी कम होगी। लोग खुशहाल होंगे। 

 

परिवार को अपने हाथों से बनाकर खिलाती हैं खाना

दिन भर की भागमभाग के बावजूद परिवार उनकी पहली प्राथमिकता है। शाम को घर पहुंचने के बाद वह अपने हाथों से परिवार को खाना बनाकर खिलाती हैं। कहती हैं, ऐसा करना मुझे हमेशा अच्छा लगता है। मैं पहले एक अच्छी मां और एक अच्छी पत्नी हूं, उसके बाद एक अच्छी उद्यमी।

 

हर कामयाबी में पति और परिवार का अहम योगदान

रेखा कहती हैं, मेरी हर कामयाबी में मेरे पति और परिवार का अहम योगदान है। पति ने मुझे हमेशा आगे बढ़ाते हैं। मेरे सपनों की, मेरे आइडियाज और भावनाओं की कद्र करते हैं। मेरी हर सफलता को मेरा पूरा परिवार साथ सेलीब्रेट करते हैं। अपने साथ होते हैं तो सफलता का आनंद दोगुना हो जाता है। मेरे भाई-बहन भी अक्सर मेरे साथ होते हैं। सबसे जुड़कर रहने से जिंदगी का सफर बेहद आसान हो जाता है। वह अपने परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के नोयडा शहर में रहती हैं।

शक्तिउदय से महिलाओं के भाग्योदय में जुटीं रेखा, गरीबों की जिंदगी बदलने का जरिया बन गया एक आइडिया

परिवार के बारे में

रेखा शर्मा के पति मधुसूदन शर्मा सीएजी में अफसर हैं। बड़ी बेटी पलक शर्मा नोयडा की कंपनी में ई-कॉमर्स मैनेजर और छोटी बेटी पल्लवी शर्मा प्रोफेशनल फोटोग्राफर हैं। उनकी बड़ी बहन किरन खंडूरी और छोटी बहन रोशनी ढौंढियाल भी बिजनेस वूमन हैं। भाई प्रकाशमणि का भी अपना कारोबार है। रेखा कहती हैं, भगवान ने मुझे सबकुछ दिया है। अब मैं उसकी बनाई दुनिया में रह रहे लोगों को कुछ देना चाहती हूं।

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