14184aea f71d 4a39 a6f7 96568fcf2ba0 पाकिस्तान में पड़ रही महंगाई की मार, रोजमर्रा के सामान की कीमत छू रही आसमान
फाइल फोटो

पाकिस्तान। कोरोना महामारी ने देश को ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना की वजह से सभी देशों की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। हालांकि कुछ देशों ने अपने देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को रोक लिया तो किसी देश अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने में नाकाम साबित होते दिख रहे हैं। ऐसा ही हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ हो रहा है। बिगड़ती अर्थव्यवस्था के साथ ही वहां महंगाई की मार बहुत तेज पड़ रही है। इस दौरान वहां हर चींज के दाम आसमान छूं रहे हैं। अगर हम वहां अदरक की बात करें तो उसकी कीमत 1 हजार रुपये हो चुकी है। वहीं एक अण्डा की कीमत 30 रुपये हो गई है। लोगों की रोजमर्रा के सामान आसमान छूं रहे हैं। पड़ोसी मुल्क पाक में करीब पच्चीस फीसदी लोग अभी भी बीपीएल (गरीबी रेखा) से नीचे अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

पाकिस्तान में चीनी 104 रुपये प्रति किलो बिक रही-

बता दें कि कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में महंगाई की ऐसी मार पड़ी है कि आम लोगों की कमर टूट रही है। इमरान खान के सत्ता में आने के बावजूद वह अर्थव्यवस्था में सुधार करने में नाकाम रहे हैं। वहां की हालत अब ऐसी हो चुकी है कि अदरक 1 हजार रुपये और गेंहू 60 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। ऐसे में लोगों को अपनी जरूरत की रोजमर्रा की चीजों को पूरा करना भी संभव नहीं हो पा रहा है। पाकिस्तान में अगर आप थोक भाव से अंडा खरीदते हैं तो एक दर्जन के लिए 240 रुपये चुकाने होंगे। इतना नहीं नहीं, चिकन 300 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। पड़ोसी मुल्क पाक में करीब पच्चीस फीसदी लोग अभी भी बीपीएल (गरीबी रेखा) से नीचे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में रोजमर्रा की जरूरतों के हर सामान की कीमत पाकिस्तान में आसमान छू रही है। पाकिस्तान में चीनी 104 रुपये प्रति किलो बिक रही है। घरेलू गैस संकट से जूझ रहे इमरान खान के नए पाकिस्तान में लोगों को दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है।

घरेलू गैस संकट भी वहां विकराल रूप ले रहा-

पाकिस्तान इन दिनों खाद्यान्न के भारी संकट से गुजर रहा है। जबकि,  दूसरी तरफ घरेलू गैस संकट भी वहां विकराल रूप ले रहा है। इमरान सरकार की हालत ऐसी हो चुकी है कि चीनी और आटे की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए पीएम इमरान खान को लगातार कैबिनेट की मीटिंग बुलानी पड़ रही है।

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