बजट पेश करने से पहले निभाई जाती है हलवा रस्म, वित्त मंत्री खुद करते हैं सर्व

नई दिल्ली। विश्व के हर देश में हर साल जनता को क्या-क्या सौगात दी जाएगी और देश की अर्थव्यवस्था को किस हिसाब से आगे बढ़ाना है उसको लेकर बजट पास किया जाता है। भारत में भी इसी आधार पर बजट पेश किया जाता है, लेकिन भारत में बजट को संसद के पटल पर रखने से पहले कई पंरपराए बनाई गई हैं। इन परंपराओं के तहत बजट पेश करने से दो दिन पहले राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है, जिसमें राष्ट्रपति केंद्र सरकार द्वारा किए गए कामों और भविष्य में जनता की भलाई के लिए किए जाने वाले कामों पर अपने विचार प्रकट करते है।

राष्ट्रपति के संबोधन के बाद बजट पास करने के लिए तैयारियां शुरू हो जाती है। हमारे देश में बजट पास करने से पहले रस्मों को पूरा किया जाता है। दरअसल जब बजट तैयार हो जाता है तो उसे प्रिटिंग के लिए भेजने से पहले हलवा रस्म अदा की जाती है। इसके तहत एक बढ़ी कड़ाई में हलवा तैयार किया जाता है और वित्त मंत्री खुद हलवे को बजट तैयार करने वाली पूरी टीम को परोसते हैं। बता दें कि इस रस्म के अनुसार किसी भी विशेष धर्म की तरह पूजा-पाठ नहीं किया जाता, इसे कवल बजट तैयार करने के बाद और उसे प्रिंटिंग प्रेस में भेजने से पहले बजट तैयार करने वाली टीम अपनी खुशी जाहिर करने के लिए इस रस्म को अदा करती है। 

केंद्रीय बजट की तैयारी से उसकी छपाई होने तक, सरकार सुरक्षा में किसी भी तरह ढील नहीं होने देती। बजट के तैयार होने के बाद जब वह प्रिंटिंग के लिए जाता है तो उसके संसद में पेश किए जाने तक, बजट बनाने से जुड़े सभी अधिकारी-कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक में एक तरह से नजरबंद कर दिए जाते हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। सुरक्षा इतनी सख्त होती है कि इन लोगों को अपने परिवार से भी संपर्क नहीं करने दिया जाता। ये लोग बाहरी दुनिया से एकदम अलग कर दिए जाते हैं। ऐसे में हलवा रस्म, इन लोगों के एकांतवास में जाने से पहले सेलिब्रेट का मौका होती है।

हलवा रस्म के बाद वित्त मंत्रालय के कई विभागों को सील कर दिया जाता है और वहां आम जन की एंट्री पर भी रोक लगा दी जाती है। वहीं सिर्फ वित्त मंत्री और कुछ और बड़े अधिकारियों को ही नॉर्थ ब्लॉक की प्रिंटिंग प्रेस में जाने की अनुमति होती है जिसके लिए भी स्पेशल एंट्री पास बनते हैं। अधिकारी बजट के संसद में पेश होने तक नजरबंद रहते हैं। सरकार बजट को टॉप सीक्रेट रखती है। इन अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा का जिम्मा आईबी से लेकर दिल्ली पुलिस और सीआईएसएफ पर होता है। हाईटेक मशीनों के जरिए कड़ी निगरानी की जाती है।