September 20, 2021 10:05 pm
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अयोध्याः किशोरी के लिए फरिश्ता बनकर आए डॉक्टर्स, अपना खून देकर बचाई जान

अयोध्याः किशोरी के लिए फरिश्ता बनकर आए डॉक्टर्स, अपना खून देकर बचाई जान

अयोध्याः धरती पर भगवान दर्जा जान बचाने वाले डॉक्टर्स को दिया जाता है। अयोध्या में दो डॉक्टरों ने इस कहावत को सच साबित किया है। डॉक्टरों ने अपना खून देकर एक किशोरी की जान बचाई है।

दरअसल, गंभीर हालत में एक किशोरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। किशोरी को खून की बेहद जरुरत थी, लेकिन किशोरी की मां खून का इंतजाम नहीं कर पाई। असहाय मां और किशोरी की हालत को देखते हुए इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉक्टर्स फरिश्ता बनकर सामने आए और खुद रक्तदान करके किशोरी को बचाने का फैसला किया।

किशोरी को अपना खून देकर जान बचाने का काम जिला अस्पताल के डॉ. आशीष पाठक और डॉ. अजय तिवारी ने ये सराहनीय काम किया है। देवकाली के रहने वाली 17 साल की अंशिका यादव पिछले काफी दिनों से बीमार थी। दो दिन पहले अंशिका की तबियत ज्यादा खराब हुई तो परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल आए। उस वक्त अंशिका की हालत बेहद नाजुक थी, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने भर्ती कर लिया। डॉक्टरों ने फौरन अंशिका की मां को 2 यूनिट खून का इंतजाम करने के लिए कहा।

अंशिका की मां ब्लड डिमांड पेपर लेकर इधर-उधर भटकती रही, लेकिन उसे कहीं खून नहीं मिला। ब्लड बैंक ने भी जवाब दे दिया। रात भर परेशान होने के बाद वह सुबह अस्पताल पहुंची। इधर अंशिका की हालत भी धीरे-धीरे नाजुक होती जा रही थी। सुबह जब इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर आशीष पाठक और अजय तिवारी ने अंशिका की मां को परेशान देखा और इधर अंशिका की नाजुक हालत देख दोनों डॉक्टर बेहद चिंतित हुए।

अंशिका की गंभीर हालत देख दोनों डॉक्टर ने उसे हर कीमत पर बचाने का निर्णय लिया। जिसके बाद उन्होंने खुद ब्लड डोनेट किया। ऐसा काम करके आशीष और अजय तिवारी ने एक डॉक्टर के दायित्व से बढ़कर योगदान दिया।

मां ने जताया आभार

समय रहते खून मिलने की वजह से अंशिका की जान बच गई। डॉ. आशीष पाठक ने बताया कि उन्होने अपने सहयोगी डॉक्टर अजय तिवारी के साथ रक्तदान कर किशोरी के लिए 2 यूनिट ब्लड की व्यवस्था की। ब्लड चढ़ने के बाद किशोरी की हालत में काफी सुधार आया। वहीं, अंशिका की मां इंद्रा ने दोनों डॉक्टरों का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने मेरी बेटी को खून देकर उसकी जान बचाई है। उसका हीमोग्लोबिन 3 पॉइंट ही थी। खून चढ़ने से उसको बहुत आराम मिला है।

वहीं, जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने दोनों डॉक्टरों की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों ने बखूबी से अपना फर्ज निभाया है।

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