January 25, 2022 9:59 am
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कोरोना को मात देने वाले डॉक्टर की इस सलाह का पीएमओ ने लिया संज्ञान

डॉ़ नीरज कुमार मिश्रा कोरोना को मात देने वाले डॉक्टर की इस सलाह का पीएमओ ने लिया संज्ञान
  • कोरोना मरीजों के इलाज में मनोवैज्ञानिक थेरेपी की जरूरत बताई
  • भाई की मौत के बाद लगा दुनिया खत्म हो गई पर अगले ही पल खुद को संभाला और वायरस को दी मात
  • अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी कर रहे हैं मरीजों की मदद

लखनऊ। कोरोना के रौद्र रूप की चपेट में पूरा भारत है। लाखों की संख्या में रोज नए केस आ रहे हैं। हजारों मौतें हो रहीं हैं। लेकिन, कई ऐसे भी हैं जो कोरोना को मात देकर नई जिंदगी पाए हैं।

एक ऐसे ही डॉक्टर हैं जिन्हें कोरोना ने बेहद गंभीर रूप से जकड़ लिया था, लेकिन अपनी इच्छाशक्ति के दम पर न सिर्फ उन्होंने कोरोना को मात दी है बल्कि दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं।

कोरोना के मरीजों के इलाज में दवाईयों के साथ एक ऐसी थेरेपी उन्होंने सुझाई है जिसकी खूब चर्चा हो रही है। इतना ही नहीं पीएमओ ने भी उनके इस सुझाव को संज्ञान में लिया है। जल्द ही उनके सुझाए गए इस थेरेपी की मदद कोरोना पीड़ितों के इलाज में ली जा सकती है। ये डॉक्टर हैं लखनऊ के डॉ नीरज कुमार मिश्रा। पेशे से सर्जन हैं और इस समय कोरोना को मात देकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।

कोरोना ने भाई को छिना

कोरोनावायरस की चपेट में आने के बाद डॉ नीरज मिश्रा के बड़े भाई की मौत हो गई थी। इतना ही नहीं माता-पिता भी अस्पताल में भर्ती थे। इसके बाद डॉक्टर नीरज मिश्रा खुद संक्रमित हो गए।

डॉ नीरज बताते हैं कि इस दौरान उनके मन में कई बार आत्महत्या के भी ख्याल आए। लेकिन, अगले ही पल उन्होंने खुद को संभाला और अब वायरस को मात दे दी है। इस दरमियान उन्होंने अपने अनुभव ट्विटर पर शेयर किए तो पीएमओ ने संज्ञान लिया और एक अधिकारी ने फोन कर उनसे बातचीत की।

डॉ नीरज ने बताया कि कोविड के इलाज के दौरान मनोचिकित्सक की सलाह बेहद जरूरी है। फिलहाल वह पीएमओ के लिए ड्राफ्ट तैयार करने में जुटे हुए हैं और वार्ड से ही मरीजों को सलाह भी दे रहे हैं।

डॉ़ नीरज मिश्रा कोरोना को मात देने वाले डॉक्टर की इस सलाह का पीएमओ ने लिया संज्ञान
डॉ़ नीरज कुमार मिश्रा
बेहद गंभीर हो गए थे डॉ नीरज

सर्जन डॉक्टर नीरज कुमार मिश्र की कहानी भी काफी उतार-चढ़ाव भरी है। करीब 25 दिन पहले पूरा परिवार संक्रमित हो गया। राजधानी के निजी अस्पताल में भर्ती हुए। इस दौरान खुद वायरस को मात दे दी लेकिन दुखद यह रहा कि भाई को नहीं बचा पाए।

भाई का अंतिम संस्कार करने के बाद उनकी हालत फिर बिगड़ गई। जांच हुई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई और ऑक्सीजन लेवल लगातार गिरता रहा। स्थिति यह हो गई कि माता पिता के साथ उन्हें भी ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा।

डॉक्टर नीरज बताते हैं कि जिस वक्त उनके भाई की मौत और माता-पिता की स्थिति गंभीर होने की जानकारी मिली तो उनके मन में कुछ पल के लिए आत्महत्या तक के ख्याल आए लेकिन इसी बीच जब वह होश में आए तो उनके कई चिकित्सक दोस्तों ने बात की और सकारात्मक संदेश दिया।

इलाज करने वाले चिकित्सक ने रिपोर्ट खराब होने के बाद भी बेहतर रिपोर्ट बताया। यहां तक की बार-बार यह समझाया गया कि माता-पिता दोनों की हालत ठीक है। लगातार सकारात्मक चीजें बताने का असर रहा कि धीरे-धीरे उनकी हालत में भी सुधार आया। स्थिति सुधरी तो उन्होंने अस्पताल में होने के बाद भी खुद को अपने मरीजों में व्यस्त किया।

डॉ नीरज खुद व्हाट्सएप के जरिए लोगों को सलाह देने लगे। हौसला बढ़ता गया और वायरस को मात देते गए। इस दौरान खाली समय में मनपसंद संगीत सुना और कई मनोवैज्ञानिक रिसर्च पेपर भी ऑनलाइन पढ़ डाला। उन्होंने ट्विटर और पीएमओ की मेल पर अपनी सलाह दी।

पीएमओ को दी ये सलाह

इसमें लिखा कि अस्पताल में मरीज़ चारों ओर मशीनों से घिरा रहता है जिस वजह से उसे घबराहट होती है और इन्हीं कारणों की वजह से ज़्यादातर मरीज़ हार्ट अटैक से मर रहे हैं। अस्पतालों में अकेलापन कहीं न कहीं उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी काफी असर डाल रहा है।

ऐसे मे चिकित्सकीय इलाज के साथ मरीजों को मानसिक पहलू को भी शामिल किया जाए। काउंसलिंग के साथ कुछ दवाएं भी दी जाए। एक तरह से साइकोलॉजिकल थेरेपी अपनाई जाए। उनकी इस सलाह को पीएमओ ने संज्ञान में लिया और साइकोलॉजिकल थेरेपी पर विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर देने के लिए कहा है।

फिलहाल डॉक्टर नीरज अस्पताल में ही अभी भर्ती हैं और पोस्ट कोविड वार्ड में इलाज करा रहे हैं। लेकिन वार्ड में रहते हुए भी वह तमाम लोगों को व्हाट्सएप के जरिए सलाह दे रहे हैं। वह कहते हैं कि खुद को सक्रिय रहने से एक नई एनर्जी मिल रही है।

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