7cb6fb0d 0598 4ef7 996a a57eeeafd5d9 नेपाल में छाए राजनीतिक संकट के बादल, नए साल पर पीएम केपी ओली कर सकते हैं भारत का दौरा
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारत और नेपाल दोनों के रिश्ते कुछ दिनों से अच्छे नहीं चल रहे थे। जिसके चलते आए दिन बयानबाजी सुनने को मिल जाती थी। लेकिन अब ऐसा अहसास हो रहा है कि दोनों देशों में रिश्तों में फिर मजबूती देखने को मिलेगी। इन दिनों नेपाल में राजनीतिक संकट के बादल छाए हुए हैं। जिसके चलते भारत-नेपाल के रिश्तों को मजबूती देने के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत आएंगे। माना जा रहा है कि केपी ओली नए साल के मौके पर भारत की यात्रा कर सकते हैं। कहा जा रहा है कि केपी ओली 4 जनवरी को भारत की यात्रा कर सकते हैं। वहीं केपी ओली से पहले नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली इस यात्रा की तैयारी के लिए भारत आएंगे।

केपी ओली 4 जनवरी को भारत की यात्रा कर सकते हैं-

बता दें कि भारत-नेपाल के रिश्तों को मजबूती देने के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत आएंगे। नेपाल के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक केपी शर्मा ओली की भारत यात्रा की तारीख लगभग तय हो गई है। कहा जा रहा है कि केपी ओली 4 जनवरी को भारत की यात्रा कर सकते हैं। वहीं केपी ओली से पहले नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली इस यात्रा की तैयारी के लिए भारत आएंगे। इससे पहले भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने पिछले महीने ही नेपाल का दौरा किया था। उस यात्रा के बाद नेपाल और भारत की उच्च-स्तरीय यात्रा के लिए रास्ता खोला गया। वहीं नेपाल के राष्ट्रपति कार्यालय ने सूचित किया है कि नेपाल की वर्तमान सरकार अस्थायी प्रकृति की है। सूत्रों ने कहा कि नेपाल में जारी राजनीतिक संकट के कारण विदेश यात्राओं के दौरान किसी भी दूरगामी मुद्दों पर कोई समझौता नहीं होगा। बता दें कि नेपाल में राजनीतिक संकट देखा जा रहा है। हाल ही में नेपाल के राष्ट्रपति विद्या भंडारी ने प्रधानमंत्री ओली की अनुशंसा पर प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया था और मध्यावधि चुनावों की घोषणा कर दी थी।

उसे अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत फैसला लेना- भारत

वहीं भारत ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के संसद को अचानक भंग करने और नए सिरे से चुनाव कराने के फैसले को पड़ोसी देश का आंतरिक मामला करार दिया है। नेपाल में जारी राजनीतिक घटनाक्रम पर सतर्क प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि वह पड़ोसी देश और वहां के लोगों का शांति, समृद्धि और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने में समर्थन करना जारी रखेगा। यह नेपाल का आंतरिक मामला है और उसे अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत फैसला लेना है।

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