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विश्व-भारती विवि के शताब्दी समारोह को पीएम मोदी ने किया संबोधित, जानें पीएम ने अपने संबोधन में क्या कहा-

नई दिल्ली। शिक्षा के क्षेत्र में देश पहले से ही आगे रहा है। प्राचीन के कई विश्वविद्यालय आज भी मौजूद है। इसके साथ ही सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र को और बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास कर रही है। ऐसे ही आज एक पश्चिम बंगाल में स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय शांतिनिकेतन का शताब्दी समारोह है। जिसके चलते इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे हैं। विश्व-भारती देश का सबसे पुराना केंद्रीय विश्वविद्यालय है। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि विश्वभारती मां भारती के लिए गुरुदेव के चिंतन, दर्शन और परिश्रम का एक साकार अवतार है। पीएम मोदी ने कहा, ‘विश्वभारती विश्वविद्यालय के 100 साल होना हर भारतवासी के लिए बहुत ही गर्व की बात है। मेरी लिए भी ये सुखद है कि आज के दिन इस तपोभूमि का पुण्य स्मरण करने का अवसर मिल रहा है।

विश्वविद्यालय के 100 साल होना हर भारतवासी के लिए बहुत ही गर्व की बात-

बता दें कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के 1921 में स्थापित विश्व-भारती देश का सबसे पुराना केंद्रीय विश्वविद्यालय भी है। मई 1951 में संसद के एक अधिनियम के विश्व-भारती को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित किया गया था। इस विश्वविद्यालय ने गुरुदेव टैगोर के विकसित शिक्षाशास्त्र का अनुसरण किया लेकिन धीरे-धीरे यह उस प्रारूप को अपनाया जिसमें कोई आधुनिक विश्वविद्यालय विकसित होता है। प्रधानमंत्री इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। पीएम मोदी ने कहा, ‘विश्वभारती विश्वविद्यालय के 100 साल होना हर भारतवासी के लिए बहुत ही गर्व की बात है। मेरी लिए भी ये सुखद है कि आज के दिन इस तपोभूमि का पुण्य स्मरण करने का अवसर मिल रहा है। भारत के लिए गुरुदेव ने जो स्वप्न देखा था, उस स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिए देश को निरंतर ऊर्जा देने वाला ये एक तरह से आराध्य स्थल है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इंटरनेशनल सोलर एलायंज के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्व में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। भारत पूरे विश्व में इकलौता बड़ा देश है जो पेरिस अकॉर्ड के पर्यावरण के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सही मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

भक्ति आंदोलन से हम एकजुट हुए- पीएम मोदी 

इसके साथ ही पीएम मोदी ने आगे कहा कहा कि जब हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं तो हमारे मन में सीधे 19-20वीं सदी का विचार आता है। लेकिन ये भी एक तथ्य है कि इन आंदोलनों की नींव बहुत पहले रखी गई थी। भारत की आजादी के आंदोलन को सदियों पहले से चले आ रहे अनेक आंदोलनों से ऊर्जा मिली थी। साथ ही कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता को भक्ति आंदोलन ने मजबूत करने का काम किया था। हिंदुस्तान के हर क्षेत्र, पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, हर दिशा में हमारे संतों ने, महंतों ने, आचार्यों ने देश की चेतना को जागृत रखने का प्रयास किया। वहीं आगे कहा कि भक्ति आंदोलन से हम एकजुट हुए, ज्ञान आंदोलन बौद्धिक मजबूती दी और कर्म आंदोलन ने हमें अपनी लड़ाई का हौसला और साहस दिया। सैकड़ों सालों के कालखंड में चले ये आंदोलन त्याग, तपस्या और तर्पण की अनूठी मिसाल बन गए थे।

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