pgi पीजीआई : बायोसेफ्टी लेवल-3 लैब खोलने के लिए निदेशक प्रो.आरके.धीमान ने प्रदेश सरकार को भेजा पत्र
लखनऊ: केंद्र सरकार द्वारा कोरोना कि वैश्विक महामारी को देखते हुए पूरे देश में बायोसेफ्टी लेवल-3 यानी (बीएसएल-3) के लैब खोलने का ऐलान किया था। लैब खोले जाने की इस ऐलान के बाद राजधानी के एसजीपीजीआई के निदेशक सहित संस्थान के सभी अधिकारी पीजीआई में लैब खुलवाने के लिए हर स्तर की प्रयास में जुट गए हैं। ताकि भविष्य में वायरस कि हर खतरे से बचा जा सके साथ उसके खिलाफ लड़ाई के लिए वैक्सीन बनाने में भी आसानी हो सके।
रिसर्च करने और वैक्सीन बनाने में होगी आसानी
बीएसएल-3 लैब की मदद से वायरस पर रिसर्च, शिक्षण के साथ  संक्रमण का समाधान आदि निकालने पर हाई लेवल की रिसर्च किया जाता है। ऐसे में भविष्य में किसी भी इंफेक्शन की वजह से कोई बड़ी दिक्कत हो रही है, तो उसका आसानी से पता चल सकता है। उस समस्या का पता चलते ही सिक्वेंसिग करना बेहद आसान हो जाए। यानि उस वायरस और उसके आर्गेनिज्म का पता चल जाएगा। इससे उसके खिलाफ वैक्सीन डवलप करने का काम ज्यादा आसान हो जाता है।जैसा की कोरोना काल में देखने को मिला है। जहां 7-8 माह में वैक्सीन बनकर सामने आ गई है। ऐसे में यह लैब बनना बेहद कारगर साबित होगी।
लैब की मांग के लिए शासन को भेजा गया प्रस्ताव
संस्थान के  निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि सरकार की घोषणा के बाद बीएसएल-3 लैब को संस्थान में लेकर आने की कोशिश कर रही है। इसके लिए सरकार को लेटर लिखकर भेजा गया है। लेटर के माध्यम से वायरोलॉजी के लिए लैब की मांग की गई है। क्योंकि संस्थान में सेंटर फॉर एक्सेलेंस खोल रहे है। जो इंफेक्शियस डिजीज और इलाज की दिशा में काम करेगा। ऐसे में यह लैब बहुत काम आएगी।यह सरकार का सोचा-समझा कदम है कि हम ऐसी उन्नत लैब पहले ही दे दे रहे है। ताकि भविष्य के खतरों से निपटने की तैयारी की जा सके।
बीएसएल-3 लैब पूरी तरह से एडवांस लैब होती है। लैब में संक्रमण का खतरा न हो इसके पूरे इंतजाम करने होते है। क्योंकि जरा से असावधानी से संक्रमण बाहर फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। यहां रिसर्च करने वालों को विशेष पीपीई किट, गलब्स व फेस मास्क आदि पहनकर ही लैब में जाने की इजाजत मिलती है। लैब को स्तर प्रदान करने के लिए इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च, काउंसिल ऑफ साइंटफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, डिपार्टमेंट ऑफ  बायोटेक्नोलॉजी, इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च और डिपार्टमेंट ऑफ  साइंस एंड टेक्नोलॉजी के मानक पूरे करने होते है।

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