seetaraman 1 पेट्रोल 100 रुपये जबकि डीजल 80 रूपए के पार, वित्तमंत्री सीतारमण ने बताया एक गंभीर मुद्दा

नई दिल्ली – देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के चलते लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पढ़ रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसको लेकर सरकार पर हमलावर है। जिसके चलते जब केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से जब इस बारे में पूछा गया कि आखिर कब तक तेल की कीमतों में कमी आएगी तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार किया और इसे ‘धर्मसंकट’ बताया।

बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमते एक गंभीर मुद्दा –
केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि उपभोक्ताओं पर बढ़े दामों के बोझ को कम करने के लिए केंद्र और राज्यों को बात करनी चाहिए। सीतारमण ने कहा कि यह तथ्य छिपा नहीं है कि इससे केंद्र को राजस्व मिलता है। राज्यों के साथ भी कुछ यही बात है। मैं इस बात से सहमत हूं कि उपभोक्ताओं पर बोझ को कम किया जाना चाहिए। साथ ही बता दे कि बढ़ी कीमतों का सीधा असर फल-सब्जियों पर पड़ा है। पेट्रोल की कीमत जहां 100 रुपये के पार जा चुकी है तो वहीं डीजल 80 के ऊपर है। देश की जनता तेल की बढ़ती कीमतों के बीच जल्द सरकार से राहत की उम्मीद कर रही है।

क्या कहना है आरबीआई गवर्नर का –
इससे पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर करों को कम करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित कार्रवाई की जरूरत है।इससे पहले केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि तेल उत्पादक देशों ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान उत्पादन बंद कर दिया या इसे कम कर दिया था। मांग और आपूर्ति में इस असंतुलन के कारण ईंधन की कीमतों पर दबाव देखा गया। वित्त मंत्री से पूछा गया कि कि कोरोना के वक्त जब कच्चे तेल की कीमत कम थी उस वक्त भी सरकार ने तेल की कीमतों में कोई कमी नहीं की, ऐसे वक्त में क्या अब कम नहीं किया जाना चाहिए। इसके जवाब में निर्मला ने कहा कि उन्हें यह बात कहते हुए झिझक नही है कि इस पर केन्द्र सरकार की तरफ से एक्साइज ड्यूटी लगाई जाती है। इसके अलावा वैट लगाया जाता है। जिसमें राज्यों का हिस्सा भी है। तेल पर टैक्स सरकार की आय का एक बड़ा स्त्रोत है।

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