greaternoidaauthority ग्रेनो अथॉरिटी के सीईओ के खिलाफ एफआईआर के आदेश साथ ही विभाग के खाते सील

ग्रेटर नोएडा। अब एक तरफ ग्रेनो अथारिटी ना तो अपने कर्मचारियों का वेतन दे सकती है। ना ही विकास के कार्यों पर खर्च । इसके अलावा ठेकेदारों का भी भुगतान नहीं कर सकेगी। इन सबके अलावा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करने का आदेश दिया गया। साल 2001 के एक व्यवसायिक भू खंड को लेकर विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। जिसमें अपीलार्थी ने उस भू खंड के संदर्भ में अथॉरिटी के मानकों के अनुसार उस प्राप्त करने हुए आवेदन किया था।

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इसके बाद इस सन्दर्भ में एक इन्टरव्यू हुआ और फिर अथॉरिटी ने जमीने एलाट कर दी। लेकिन अपीलार्थी को जमीन का एलाटमेंट नहीं किया था। अथारिटी का कहना था कि उसके पास जो आवेदन आया है वो 500 से 1000 वर्ग मीटर के लिए है। लेकिन उसके पास 2500 वर्ग मीटर की भूमि ही उपलब्ध है। ऐसे में प्लाटिंग हुए प्लाट में उसे अलग से नहीं दिया जा सकता है। उसे 2500 वर्ग मीटर में आवेदन करना होगा। अपीलार्थी ने जब 2500 में आवेदन किया तो भी उसे भूमि का आवंटन नहीं हुआ।

इसके बाद अपीलार्थी ने इसकी शिकायत की तो उसे वर्तमान मूल्य पर ही जमीन के आवंटन की बात कर विभाग ने टाल दिया। इसके बाद से वह जिला उपभोक्ता फोरम में चले गए। जिस पर बीते साल जुलाई में विभाग के खाते सील करने का आदेश इस बात पर दिया गया था कि विभाग ने आदेशों की अवहेलना की है। लेकिन बीते 26 मार्च को जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष न्यायधीश आर बी शर्मा का 17 साल पुराने मामले में ग्रेटर नोएडा ऑथोरिटी के सी ई ओ के खिलाफ एफआईआर के साथ ऑथरिटी के बैंक खाते सील करने का आदेश दिया है।

सूत्रों की माने तो अथॉरिटी के इतिहास में पहली बार ऐसा आदेश दिया गया है। अपीलार्थी ने अवाटंन के लिए आवेदन साल 2001 में किया था। इसके बाद साल 2003 तक विभाग ने उन्हे पहले तो कोई प्लाट नहीं दिया लेकिन जब शिकायत हुई तो 2500 वर्ग मीटर की श्रेणी में आवंटन के लिए कहा गया। अलीलार्थी ने जब 2500 वर्ग मीटर में आवेदन किया तो उसे वर्तमान दरों पर आवंटन करने के लिए कहा गया।

तो अपीलार्थी ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया । उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में अपीलार्थी के पक्ष में आदेश देते हुए कहा कि प्लाट का आवंटन किया जाए। लेकिन अथॉरिटी ने आदेश की अंदेखी की तो अपीलार्थी ने पुन इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। ऐसे में फोरम ने पहले तो कार्रवाई में खाते सील किए और सुनवाई जारी रखी। अन्तत: बीते 26 मार्च को इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने ग्रेनो अथारिटी के खाते सील करने और सीईओ पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया।

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