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मेरे पास दो ही विकल्प, सरकार बचाऊँ या फिर कारसेवकों को : कल्याण सिंह

सरकार बचाऊँ या फिर कारसेवकों को

लखनऊ। पूर्व नेता विधान परिषद एवं प्रदेश महामंत्री विंध्यवासिनी कुमार की कल्याण सिंह से नजदीकियां थी। विंध्यवासिनी कुमार ने बाबरी विध्वंस के समय कल्याण सिंह के साथ हुयी बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि जब मैंने कल्याण सिंह से पूछा की अब क्या होगा, तो उनका जवाब था की देखो मेरे पास दो ही विकल्प है  या तो मैं अपनी सरकार बचाऊँ या फिर अपने कारसेवकों को।

जब इतना बड़ा आन्दोलन आज अपने परिणाम को पहुचने को है, तो अब इस कलंक को मिट जाने देते है, ताकि सैकड़ो-हजारों लोगो का बलिदान व्यर्थ न जाने पाए और हम सब के साथ करोड़ो लोगों के स्वप्न के साकार होने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।
विन्ध्यवासिनी कुमार ने कहा कि मैंने अपने कार्यकर्ताआंे के लिए इतनी चिंता किसी अन्य राजनेता में नहीं देखी। इसके बाद कल्याण सिंह ने बाबरी विध्वंस के बाद अपना इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण आज राम मंदिर बनते हुए हम सभी देख रहे है। अब उनके साथ की गयी गतिविधियों की याद केवल जेहन में या फिर चित्रों में है।

विन्ध्यवासिनी कुमार ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण प्रशस्त करने के लिए अपनी सरकार अपनी इच्छा से छोड़ने वाले कुशल प्रशासक,योग्य राजनेता और हिंदुत्व के पुरोधा थे कल्याण सिंह। कल्याण सिंह का निधन दुखद है, मेरा उनके साथ निकट का संबंध रहा भाजपा को आगे बढ़ाने में उनका एक महत्वपूर्ण योगदान रहा। विंध्यवासिनी कुमार ने कहा की कल्याण सिंह राजनीती में अपराध और उससे जुड़े लोगों के सख्त खिलाफ थे। प्रदेश की राजनीती में बड़ते अपराध के दखल को रोकने के लिए ही उन्होंने एसटीएफ का गठन किया था।

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