विपक्ष कर सकता है जुकरबर्ग पर मुकदमा, संसदीय समिति के सामने बुलाने की मांग

नई दिल्ली। प्रमुख विपक्षी दलों के कुछ शीर्ष नेताओं व रणनीतिकारों ने फेसबुक के मालिक जुकरबर्ग, कैब्रिज वि.वि. के रिसर्चर एलेक्जेंडर कोहन, कैम्ब्रिज एनालिटिका के एलेक्जेंडर निक्स को एक संसदीय समिति के सामने पूछताछ के लिए बुलाने के बारे में राय व्यक्त की है । सूत्रों के मुताबिक श्याम पित्रोदा व अन्य आईटी विशेषज्ञों के अलावा कानूनविदों, विदेशी कानून विशेषज्ञों से भी राय-बात की जा सकती है।

इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय के एक वकील विनय प्रीत सिंह का कहना है कि सवाल भारत के करोड़ों फेसबुक यूजर व उनके समूह के लोगों का व्यक्तिगत डाटा बिना सहमति के थर्ड पार्टी को देने या बेचने का है। यह भारतीयों के फंडामेंडल राइट का हनन है, जिसके लिए कोई भी व्यक्ति फेसबुक या उन व्यक्ति, संस्था, सरकार के विरुद्ध कोर्ट जा सकता है जिनके एप के मार्फत, फेसबुक आईडी के मार्फत उस व्यक्ति का अपना निजी विस्तृत विवरण, डाटा उसकी सहमति के बिना ही थर्ड पार्टी को दे दिया गया। इस तरह थर्ड पार्टी को डाटा देना या बेचना बड़ा अपराध व गैरकानूनी है।

बता दें कि जब व्यक्ति के निजता हनन के इस बड़े जुर्म में फेसबुक के मालिक जुकरबर्ग, कैब्रिज वि.वि. के रिसर्चर एलेक्जेंडर कोहन, कैम्ब्रिज एनालिटिका के एलेक्जेंडर निक्स को माफी मांगने के बाद भी ब्रिटेन के सांसदों ने सीनेट के सामने पेशी के लिए व पूछताछ के लिए बुलाया है। अमेरिका के रिपब्लिकन व डेमोक्रेट ने जुकरवर्ग व अन्य फर्म के प्रमुखों को सीनेट के सामने आने के लिए सम्मन किया है। अमेरिका की फेडरल कमिशन ने भी जांच शुरू कर दी है। वहां के सूचना आयोग व अन्य एजेंसियों ने इस मामले में छापे मारने की कार्रवाई शुरू कर दी है ।

वहीं जब ये सब एजेंसियां, संस्थाएं जांच व पूछताछ कर सकती हैं, तो भारत की संसदीय कमेटी भी फेसबुक द्वारा भारतीयों के प्राइवेसी को तोड़ने के मामले में जुकरबर्ग को बुलाकर पूछताछ कर सकती है। इस बारे में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इसमें कानूनी, राजनीतिक, चुनाव प्रभावित करने के लिए मतदाताओं को प्रभावित करने वाले पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। इसमें धन व चुनावी प्रोपगंडा का भी मामला है।