galwan 2 गलवान में हुई हिंसक झड़प का एक साल पूरा, जानिए साल बाद कैसे हैं वहां के हालात

गलवान की घाटी में हुई हिंसक झड़प को आज एक साल पूरा हो गया है। ऐसे में अब एक साल बाद वहां के हालात कैसे हैं और अब वहां स्थिती कैसी हैं पढ़िए इस खबर में ।

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प के एक साल बाद दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाल नहीं होने के बावजूद भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा पर किसी भी प्रतिकूल स्थिति से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार है। रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों ने बताया कि गलवान घाटी प्रकरण ने भारतीय सुरक्षा क्षेत्र के योजनाकारों को चीन से निपटने में देश का रुख तय करने के साथ ही छोटी अवधि में और दूरगामी खतरे का आकलन करते हुए रणनीति तैयार करने में मदद मिली।

20 सैनिक हुए थे शहीद

पिछले साल 15 जून यानि आज की ही तारीख को गलवान घाटी में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। जिसके बाद दोनों सेनाओं ने कई जगहों पर पर अपने – अपने सैनिक तैनात कर दिए थे। हालांकि इसी साल फरवरी में चीन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि भारतीय सैन्यकर्मियों के साथ झड़प में पांच चीनी सैन्य अधिकारी और जवान मारे गए थे। हालांकि यह माना गया है कि चीनी सैनिकों के मरने की संख्या ज्यादा थी।

चीन ने बढ़ाई मौजूदगी

जानकारी के अनुसार चीन ने भी ऊंचाई वाले क्षेत्र के कई इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ा ली है। झड़प के बाद सेना के तीनों अंगों के बीच तालमेल और एकजुटता भी बढ़ी है। उन्होंने समग्र चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना के एकीकृत रुख का भी हवाला दिया। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘इस झड़प के बाद थल सेना और वायु सेना के बीच तालमेल और बेहतर हो गया।’’

आपको बता दें कि मिली जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों के बीच अब भी विश्वास बहाल नहीं हो पाया है और भारत पूर्वी लद्दाख और अन्य क्षेत्रों में एलएसी के पास किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है। सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत के बाद दोनों सेनाओं ने फरवरी में पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी तट से सैनिकों और हथियारों को हटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली। टकराव के बाकी स्थानों से भी सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पर बातचीत चल रही है।

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