December 7, 2022 11:38 am
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हमीरपुरः तीस फीट गहराई में स्थित पर शिवलिंग, जुड़ा है खजाने का रहस्य

हमीरपुरः तीस फीट गहराई में स्थित पर शिवलिंग, जुड़ा है खजाने का रहस्य

हमीरपुरः कानपुर जिले की सीमा से सटा हुआ एक गांव भगवान शिव की आस्था और श्रद्धा के लिए मश्हूर हैं। गौरीशंकर बाबा ने नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। इस मंदिर के गर्भ में तीस फीट की गहराई में शिवलिंग स्थापित है।

सावन के महीने में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। सोमवार को यहां बड़े स्तर पर श्रृंगार और रुद्राभिषेक का आयोजन होता है। इस आयोजन के लिए शनिवार से ही तैयारी शुरु हो गई हैं।

यमुना नदी पार बीबीपुर गांव में तकरीबन एक हजार साल पुराना शिव मंदिर है। इस पूरे क्षेत्र में ये मंदिर गौरीशंकर के नाम से विख्यात है। कई दशकों से मंदिर की देखरेख करने वाले पंडित रमाकांत बाजपेई बताते हैं कि गांव में राम प्रताप पांडेय और भगवान प्रसाद पांडेय सगे भाई थे। इन्होंने ही एक हजार साल पहले यहां मंदिर बनवाया था।

शिवलिंग के पास रहता है काला सर्प

मंदिर में स्थापित शिवलिंग काले रंग का है। जिसमें पूजा करते समय अपनी परछाई भी साफ दिखती है। शिवलिंग में मां पार्वती का चेहरा भी बना है। यह दिन में तीन बार रंग बदलता है। शिवलिंग के गर्भ में आज भी काला सर्प रहता है जो श्रृंगार के दौरान रात में लोगों के सामने शिवलिंग पर बैठ जाता है।

कुएं के नीचे छिपा है तहखाना

पंडित रमाकांत बाजपेई ने बताया कि गांव में मंदिर के लिए सैकड़ों साल पहले वाराणसी से शिवलिंग लाया गया था। शिवलिंग में मां पार्वती भी विराजमान हैं। वाराणसी के पुरोहितों ने यहां कई दिनों तक गांव में रहकर विधि-विधान से शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा कराई थी। शिवलिंग के तीस फीट की गहराई में तहखाना बना है। तहखाने में एक तख्त पड़ा है। जिसे आज भी देखा जा सकता है। मंदिर के अंदर दो सौ फीट की गहराई में सुरंग भी है। इसी सुरंग से प्राचीन कुआं और आसपास के कई मंदिर जुड़े हैं। मंदिर के ठीक सामने संवत 1884 का कुआं बना है, जो मंदिर से सुरंग के जरिए जुड़ा है।

अपमान करने वाले बंजारे हो गए थे पागल

गांव के शिवाकांत बाजपेई सहित कई बुजुर्गों ने बताया कि इस मंदिर का शिवलिंग बहुत ही चमत्कारी है। इसमें माथा टेककर दर्शन करने मात्र से ही भगवान भोलेनाथ मन की मुरादें पूरी कर देते हैं। हमीरपुर के कई लोगों की मुरादें भी इस मंदिर से पूरी हुई हैं। पैंतालीस साल पहले बाहर से बंजारे (नट) यहां आए थे। जिसने खजाने के चक्कर में साधु का रूप धारण कर मंदिर में रहने लगा। उसने शिवलिंग का अनादर किया तो उसे भगवान भोलेनाथ ने ऐसा दंड दिया कि वह पागल हो गया था। परिजनों ने उसे शिवलिंग के सामने बैठाकर माफी मांगी और सोमवार को विशेष प्रकार की पूजा अर्चना कराई। जिससे बंजारा ठीक हो गया था। बाद में वह कहीं चला गया था।

रात में सुनाई देती हैं घुघंरू की आवाजें

पंडित रमाकांत बाजपेई का कहना है कि इस मंदिर के वैभव को देख हमीरपुर और आसपास के तमाम इलाकों के लोग सावन मास में बड़े ही उत्साह के साथ यहां आकर पूजा करते हैं। इस मंदिर में कभी भी ताला नहीं डाला गया है, लेकिन रात 12 बजे के बाद मंदिर और सौ फीट के दायरे में कोई भी रुक नहीं सकता है। उनका दावा है कि आधी रात के बाद मंदिर में अचानक प्रकाश होता है। साथ ही घुंघरू की भी आवाजें आती हैं। घुंघरू की आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती हैं। मंदिर में ऐसा लगता है कि जैसे कि वहां नृत्य कोई कर रहा हो। खजाने के चक्कर में भी 15 फीट खुदाई कराने पर चार लोग बीमार हुए थे। तब से किसी ने खुदाई कराने का साहस नहीं किया।

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