माता ललिता देवी के मंदिर के करें दर्शन

सीतापुर: सीतापुर के नेमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक कहलाता है। नवरात्र के दिनों में यहां भक्तों का जमावड़ा लग जाता है। इस मंदिर में मांगी हर हर मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। वैसे तो यहां पर बारहों मास भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है लेकिन नवरात्र के दिन यहां का नजारा अद्भुत हो जाता है।

108 में से है प्रमुख देवीपीठ 

सीतापुर के नैनिषारण्य स्थित मां ललिता देवी भारत के 108 देवीपीठों में से एक प्रमुख देवीपीठ है। मां ललिता देवी का दरबार नवरात्र के दिनों में और पावन और जागृत हो जाता है। मान्यता है कि जो भी माता रानी का दर्शन नवरात्र के दिनों में करता है वो निहाल हो जाता है और माता रानी उसके हर कष्ट को हर लेती हैं।

माता ललिता देवी के मंदिर के करें दर्शन

मां ललिता देवी मंदिर के पुजारी ने बताया कि वासंतिक हो या शारदीय नवरात्र दोनों ही अवसरों पर वो मां ललिता देवी का श्रृंगार करते हैं। प्रात: कालीन सुबह नौ बजे माता की आरती होती है और शाम के आठ बजे सायंकालीन आरती की जाती है।

क्या है मान्यता

कहते हैं की जब माता सती ने पिता राजा दक्ष से क्रोधित होकर यज्ञ कुंड में प्राण त्याग दिए थे और वो उसमें समा गई थीं, तब उनके जलते शरीर को लेकर भगवान शिव क्रोधित होकर तांडव नृत्य करने लगे थे।

माता ललिता देवी के मंदिर के करें दर्शन

भगवान शिव के इस रौद्र रूप को देखकर भगवान विष्णु भी सहम गए थे और उन्होंने सृष्टि को शिव जी के क्रोध से बचाने के लिए सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल किया था और सती माता के जलते अंगों के कई टुकड़े कर दिए थे।

भगवान विष्णु ने कर दिए थे कई टुकड़े 

भगवान विष्णु ने माता सती के सुदर्शन चक्र से आठ सौ टुकड़े किए थे। इससे उनके गहनों के भी कई टुकड़े हो गए थे। इन गहनों और अंगों में जो भी टुकड़े धरती पर गिरे, वो ही माता के 51 शक्तिपीठ कहलाए। भगवान शिव सती माता के शांत शरीर को लेकर जहां जहां गए, वहां-वहां उनके अंग और आभूषण गिरते गए।

माता सती का ह्रदय इसी स्थान पर गिरा था

सीतापुर का नैमिषारण्य ही वो स्थान है जहां माता सती का ह्रदय गिरा था। इससे ये स्थान पवित्र हो गया और 51 शक्तिपीठों में से एक गिना जाने लगा। इस स्थान की औलोकिकता को देखकर यहां पर एक मंदिर का निर्माण करवाया गया जो कालांतर में मां ललिता देवी के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

ऋषियों की तपोस्थली है नैमिषारण्य 

वहीं नैमिषारण्य ऋषि मुनियों की तपोस्थली भी कहलाता है, कहते हैं कि यहां पर 88 हजार ऋषि मुनियों ने तपस्या की थी। वहीं आदि ऋषि वेद-व्यास ने यहीं पर बैठकर हिंदुओं के कई पवित्र ग्रंथों की रचना की थी।

माता ललिता देवी के मंदिर के करें दर्शन

इसी स्थान पर एक चक्र तीर्थ भी है। जिसमें स्नान करने से व्यक्ति के सारे रोग दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि यहां जो गोल आकार का घेरा है, वो ही भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र है। ये चक्र भगवान विष्णु के हाथ से फिसल कर इसी स्थान पर गिरा था। तभी ये ये स्थान चक्र तीर्थ के नाम से मशहूर हो गया।

कोविड नियमों का करें पालन

नवरात्र में देवी मां के विभिन्न शक्तिपीठों के अलावा साधारण मंदिरों में भी काफी भीड़ जमा होती है। ऐसे में कोरोना का खतरा इस समय अपने चरम पर हो जाता है।

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ऐसे में हम तो यही कहेंगे कि आप माता रानी के विभिन्न मंदिरों में जाएं और दर्शन भी करें लेकिन मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर करें। इसके अतिरिक्त अपने साथ सेनेटाइजर को जरूर साथ रखें। और जहां तक हो सके घर पर ही रहकर माता रानी की आराधना करें। इस नवरात्र मां दुर्गा आपकी हर मनोकामना पूर्ण करे ये ही हमारी ईश्वर से कामना है। जय माता दी।

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