January 28, 2022 5:21 am
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अरब सागर में दिखने लगा खतरा, 3 अरब लोगों का घर चलाते हैं महासागर, 2050 तक डुबा देंगे मुंबई

mahasagar अरब सागर में दिखने लगा खतरा, 3 अरब लोगों का घर चलाते हैं महासागर, 2050 तक डुबा देंगे मुंबई

अरबों साल तक धरती पर जीवन सिर्फ एक सेल से बने जीवों की शक्ल में था। 57 करोड़ साल पहले जटिल जीव विकसित होने लगे। करीब 1.5 करोड़ साल तक जीवन ऐसे ही गहरे समुद्रों में रहा। वैज्ञानिकों के सामने यह सवाल रहा है कि ये जीव पैदा कैसे हुए और बिना रोशनी और खाने के कम स्रोतों के साथ कैसे जीवित रहे? तब धरती के वायुमंडल में भी ऑक्सीजन की मात्रा कम थी। स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में संकेत मिले कि महासागरों की गहराई में स्थिर तापमान की वजह से कम ऑक्सीजन के बावजूद ये जीव इतने लंबे वक्त तक जीवित रह सके। आज धरती का 50-80 प्रतिशत जीवन महासागरों में पाया जाता है लेकिन यही महासागर मानव सभ्यता से सबसे बड़ी चुनौती झेल रहे हैं।

स्टडी में बताया गया कि दुनियाभर में 3 अरब से ज्यादा लोग महासागरों पर जीविका के लिए निर्भर हैं। बावजूद इसके इनके ऊपर पड़ते असर को एक सीमित आबादी के लिहाज से गंभीर समझा जाता है। महासागरों से दूर रहने वालों को लगता है कि वहां से उपजी कोई भी समस्या उनसे काफी दूर है और वे सुरक्षित रहेंगे। अमेरिका की में प्रॉजेक्ट साइंटिस्ट डॉ. हिरोयुकी मुराकमी ने बताया है कि नई स्टडीज में पाया गया है कि ट्रॉपिकल साइक्लोन ज्यादा लंबे वक्त तक जमीन पर रह सकते हैं और गर्म तापमान में जमीनी भाग पर और ज्यादा दूर तक जा सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि जमीनी भाग में रहने वाले लोगों पर तूफान से जुड़ा नुकसान होने का ज्यादा खतरा रहता है।

अरब सागर में दिख रहा संकट

डॉ. मुराकमी के मुताबिक ऑब्जर्वेशन्स से कन्फर्म किया गया है कि महासागरों की सतह का औसतन तापमान लगातार बढ़ रहा है, खासकर 20वीं सदी के बाद से। एक चिंता यह है कि बढ़ता तापमान दुनिया में हर जगह एक जैसा नहीं है। कुछ जगहें दूसरी जगहों से ज्यादा गर्म हैं। ये अलग-अलग तापमान होने की वजह से ऐसे सर्कुलेशन होते हैं जो ग्लोबल ट्रॉपिकल साइक्लोन ऐक्टिविटी पर असर डालता है। हिंद महासागर ऐसा है जहां 1980 के बाद से काफी ज्यादा गर्मी देखी गई है। हमने हिंद महासागर में, खासकर अरब सागर में 1980 के बाद से ज्यादा संख्या में तीव्र चक्रवात देखे हैं।

गर्म पानी के ऊपर चक्रवात हो जाता है तीव्र 

अरब सागर में आमतौर पर समुद्र की सतह का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है और 1891 से 2000 के बीच सिर्फ 93 चक्रवात रिकॉर्ड किए गए। वहीं, बंगाल की खाड़ी में तापमान हमेशा 28 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहता है और इतने ही समय में यहां 350 चक्रवात आए। साल 2001 और 2021 के बीच अरब सागर में 28 चक्रवात आए और तूफानों की तीव्रता भी तेज हो गई। यह बढ़ते समुद्री तापमान का नतीजा था जो 31 डिग्री सेल्सियस तक जाता था।

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