December 3, 2021 12:53 pm
featured लाइफस्टाइल हेल्थ

अब टूथब्रश सूंघ कर बताया किस को है कैंसर, हो रही नई तकनीक तैयार

CANSER 2 अब टूथब्रश सूंघ कर बताया किस को है कैंसर, हो रही नई तकनीक तैयार

सार्वजनिक स्थानों को खुशबूदार रखने के लिए हम इत्र और डियोडरेंट लगाते हैं. और हो सकता कि ये सुगंध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल से क्रांतिकारी रूप से बदलने वाले सबसे नए तत्व हों। सुगंध के नए रुझानों की पहचान करने और उत्पादों को पहले से अधिक तेज़ी से तैयार करने के लिए इन दिनों बिग डेटा और सुपर-फास्ट कंप्यूटर का उपयोग हो रहा है। एआई के इस्तेमाल से अब ऐसी तकनीक का विकास हो रहा है कि एक दिन बीमारियों को उनके शुरुआती दिनों में ही सूंघा जा सके, ताकि हमें स्वस्थ रहने और लंबे समय तक जीने में मदद मिले।

इस आलेख में ये बताया गया है कि कैसे एआई आज हमारी दुनिया को प्रभावित कर रही है। बात चाहे हमारे इस्तेमाल के इत्र की हो या बीमारियों के इलाज के तरीकों की समस्याओं को सूंघना । फ्रांस का टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप ‘अरिबाल’ गंधों का विश्लेषण करता है। ऐसा करके वो ये पता करता है कि कोई गंध कैसे हमारी ज़िंदगी पर असर डालती है और वे हमारे स्वास्थ्य के बारे में हमें क्या जानकारी दे सकती है। हालांकि गंधों को महसूस करना काफी कठिन है। प्रकाश या ध्वनि की ख़ास प्रकार की तरंग की लंबाई होती है, लेकिन गंध को मापने और आंकने का कोई आसान तरीका नहीं होता।

इसके लिए अरिबाल सिलिकॉन चिप्स पर लगे प्रोटीन के टुकड़ों का उपयोग अणुओं को सूंघने के लिए करती है। इसके तहत ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी कई गैसों के गंध की उपेक्षा की जाती है, क्योंकि हमारी नाक इन्हें सूंघ नहीं पाती। कंपनी के सीईओ सैम गिलौम कहते हैं, “क्योंकि हम गंधों को वैज्ञानिक तरीके से नहीं बता सकते, इसलिए हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ज़रूरत है। इसके लिए केवल एक चीज़ करनी है कि हमें मशीन को सिखाना है कि ये पनीर है, ये स्ट्रॉबेरी है, ये रास्पबेरी है।

इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जिन जगहों पर हम रहते हैं, उसकी निगरानी के लिए हो सकती है. इससे हमें व्यस्त जगहों को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी. अब लोग महामारी से बचने के लिए भी जागरूक हो रहे हैं।

गंधों का पता लगने से हमारा जीवन प्रभावित हो सकता है। हमें पिछले कई सालों से मालूम है कि गंधों के जरिए कई बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। पिछले साल फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी के एयरपोर्ट पर कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए कुत्तों को लगाया गया। कुत्ते सूंघकर ये बताते थे कि भीड़ में कौन कोरोना से संक्रमित हैं और कौन नहीं। इस अवधारणा से ऐसे उत्पादों का विकास हो सकता है, जो किसी रोग के शुरुआती लक्षणों की जांच करके हमारे स्वास्थ्य की निगरानी कर सकते हैं।

Related posts

लगातार आठवें दिन पेट्रोल-डीजल की कीमत में स्थिरता जारी, जानें क्या है आपके शहर का हाल

Neetu Rajbhar

देहरादूनःसाइबर क्राइम की अब कर सकते हैं ऑनलाइन शिकायत

mahesh yadav

सुरक्षाबलों ने आतंकियों का सुरंग से घुसपैठ करने का प्रयास किया नाकाम

Samar Khan