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जानें फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले वैज्ञानिकों ने Black Hole के बारे में क्या बताया?

Black Hole

फिजिक्स नोबेल पुरस्कार 2020 ब्रिटिश वैज्ञानिक रोजर पेनरोस, जर्मनी के रिनहार्ड गेनजेल और अमेरिका की वैज्ञानिक एंड्रेया गेज को दिया गया। रोजर को Black Hole की खोज के लिए जबकि रिनहार्ड और एंड्रेया को हमारी आकाशगंगा के केंद्र में सुपरमैसिव कॉम्पैक्ट ऑब्जेक्ट की खोज के लिए यह पुरस्कार दिया गया हैं।

ब्लैक होल एस्ट्रोफिजिसिस्ट का एक टॉपिक है। बता दें कि पिछले साल का नोबेल प्राइज भी एस्ट्रोफिजिसिस्ट वालों ने ही जीता था। इस बार का इनाम भी एस्ट्रोफिजिसिस्ट के नाम हुआ हैं। इनाम का आधा हिस्सा रोजर पेनरोस को मिलेगा। रोजर ने दिखाया कि ब्लैक होल बन सकते हैं। इनाम का आधा हिस्सा रिनहार्ड गेनजेल और एंड्रेया गेज के नाम जाएगा। रिनहार्ड और एंड्रेया ने मिल्की वे गैलेक्सी केंद्र में बहुत भारी-भरकम चीज खोजी अब तक कि हमारी समझ कहती है मिल्की वे गैलेक्सी केंद्र में एक ब्लैकहोल है। लेकिन यह ब्लैक होल होता क्या है? पृथ्वी सूर्य के चक्कर काटती है क्यों काटती है यह रहस्य गुरुत्वाकर्षण से जुड़ा हुआ है।

ब्लैक होल यानी एक ऐसी जगह है जिसकी ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षण) से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल सकता है, वहां का गुरुत्वाकर्षण इतना ज्यादा होता है कि आसपास की सारी चीजें एक छोटी सी जगह में सिमट कर रह जाती है। हमें कोई चीज तभी दिखाई देती है जब वहां से प्रकाश हमारी आंखों तक पहुंचता हैं। ब्लैक होल से लाइट (प्रकाश) बाहर ही नहीं निकल पाती है। उसकी ग्रेविटी की वजह से इसलिए ब्लैक होल दिखाई नहीं देते।

रॉजर पेनरोज ने आइंस्टाइन की थ्योरी के जरिए यह सिद्ध करके दिखाया की ब्लैक होल बन सकता हैं। रॉजर पेनरोज और स्टीफन हॉकिंग ने ब्लैक होल पर बहुत सारा काम किया और फिजिक्स के सर्कल में बवाल मचा कर रख दिया। कई वैज्ञानिकों का मानना है कि पेनरोज और स्टीफन हॉकिंस को साथ में नोबेल पुरस्कार दिया जाना चाहिए, लेकिन स्टीफन हॉकिंस की 2018 में मौत हो गई और नोबेल मरने के बाद नहीं दिया जाता हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ब्लैक होल का काम पहचानने में नोबेल समिति ने बहुत देर कर दी, नहीं तो नोबल पुरस्कार स्टीफन हॉकिंग को भी मिलता।

आकाशगंगा जिसमें बहुत सारे सौरमंडल होते हैं जिसमें बहुत सारे तारे होते हैं और यूनिवर्स में ऐसी बहुत सारी आकाशगंगा हैं। हमारा सौरमंडल जिस गैलेक्सी में आता है उसका नाम है ‘मिल्की वे गैलेक्सी’ हैं। हमारा सौरमंडल इसके साइड में पड़ता है। लेकिन इस गैलेक्सी के केंद्र में क्या है? यह एक अजीब सी जगह है इस जगह का नाम है सेजिटेरियस ए स्टार हैं। यह अदृश्य है और किसी को दिखाई नहीं देता है, लेकिन रिनहार्ड और एंड्रेया ने पता लगाया कि यह क्या है? बता दें कि रिनहार्ड और एंड्रेया ने अलग-अलग काम किया हैं। ये दोनों अलग-अलग टीम के साथ काम करते थे, लेकिन दोनों ने एक ही चीज पर अध्ययन किया इन दोनों ने मिल्की वे गैलेक्सी केंद्र पर अध्ययन किया।

वेजिटेरियन स्टार से अजीब सी अजीब सी रेडियो वेव निकलती है। यह जगह दशकों से रहस्य बनी हुई है। रिनहार्ड और एंड्रेया ने पता लगाया कि ‘मिल्की वे गैलेक्सी’ के केंद्र में एक बहुत भारी भरकम चीज है। जिसका नाम सुपरमैसिव ऑब्जेक्ट है। इसका वजन लगभग 40 लाख सूर्य मार्स के बराबर हैं यानी यह 40 लाख सूर्य जितनी भारी है। बता दें कि सूर्य है वह पृथ्वी से लाखों गुना भारी है। रिनहार्ड और एंड्रेया ने तीन दशक तक इस जगह के आसपास मौजूद तारों का अध्ययन किया इन्होंने इस जगह का अध्ययन करने के लिए कई जटिल टेक्नोलॉजी विकसित की और कई जटिल मेथड्स तैयार की और इन्हें अपनी इस मेहनत या कार्य के लिए नोबेल पुरस्कार मिला दिया गया। इन तीनों वैज्ञानिकों को 10 दिसंबर 2020 को ‘नोबेल पुरस्कार’ दिया जायेगा। अभी केवल इनके नाम का ऐलान किया गया है।

LIGO, Virgo को सबसे बड़े ब्लैक होल विलय से संकेत मिले

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