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छोटे राज्य की बड़ी व्यवस्था ने कोरोना को दी टक्कर, ‘ना बेड कम ऑक्सीजन कम’, सुलभ इलाज: सचिव स्वास्थ्य

12 छोटे राज्य की बड़ी व्यवस्था ने कोरोना को दी टक्कर, 'ना बेड कम ऑक्सीजन कम', सुलभ इलाज: सचिव स्वास्थ्य

कोरोना महामारी के नए रूप ने पूरे देश में कहर मचा रखा है। इस कहर और किल्लतों के बीच अच्छी खबर देश के एक छोटे से राज्य उत्तराखंड यानी पहाड़ों से आ रही है।

इस विकराल महामारी के सामने उत्तराखंड की व्यवस्थाएं ढाल बनकर खड़ी हुई हैं। इस छोटे राज्य की बड़ी व्यवस्थाओं ने कोरोना को दी टक्कर दी है। न यहां बेड की कमी है और न ही ऑक्सीजन की किल्लत।

इतना ही नहीं ये राज्य देश केई राज्यों तक ऑक्सीजन पहुंचा रहा है। यहां कोरोनाौ मरीजों का आसानी से इलाज भी हो रहा है। इन सबकी विस्तृत जानकारी सूबे स्वास्थ्य सचिव पंकज पांडे ने दी है। सचिव स्वास्थ्य के मुताबिक सीएम तीरथ सिंह रावत के निर्देश पर सारी व्यव्स्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है।

ऑक्सीजन की नहीं कोई कमी

सचिव स्वास्थ्य पंकज पांडे ने बताया कि प्रदेश ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। यहां पर मौजूद 3 बड़े ऑक्सीजन प्लांट से सिर्फ 20 फीसदी सप्लाई ली जा रही है। बची हुई 80 फीसदी ऑक्सीजन देश के कई बड़े राज्यों जैसे यूपी, हरियाणा तक पहुंचाई जा रही है।

मतलब साफ है कि ऑक्सीजन के आपातकाल में उत्तराखंड की ये सेवाएं देश के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।

अस्पतालों की क्षमता को बढ़ाया गया

राज्स के सचिव स्वास्थ्य ने बातया कि प्रदेश के अस्पतालों की क्षमता को पहले के मुताबिक कापी बढ़ा दिया गया है। इससे मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। बड़े अस्पतालों में नए प्लांट लगाए गए हैं इसके साथ ही BHEL के हरिद्वार के प्लांट को भी मंजूरी दे शुरू किया जा रहा है।

टेस्ट की क्षमता भी बढ़ी

देहरादून में पहले एक दिन में करीब 8 हजार टेस्ट किए जा रहे थे, इसे बढ़ाकर अब 10 हजार प्रतिदिन तक लाया गया है। सूबे करीब 50 हजार कोरोना टेस्ट हर रोज हो रहे हैं।

स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक सूबे में प्रदेश में अभी 10375 के करीब आइसोलेशन बेड हैं। जिनमें से 90 फीसदी खाली ही हैं। इसके अवाला 3781 ऑक्सीजन बेड हैं जिनमें से करीब 60 फीसदी खाली हैं। वहीं ICU- 301, वेंटीलेटर- 340 बेड खाली हैं।

देखा जाए तो उत्तराखंड के हालात बाकी के राज्यों से बहुत बेहतर नजर आ रहे हैं। इसकी वजह स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर किए जा रहे काम ही हैं।

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