January 31, 2023 11:33 am
featured बिहार राज्य

पार्टी के खिलाफ डाने के बाद भी बागियों को पार्टी से नहीं निकालेंगे नीतीश कुमार, जाने क्या है वजह

नीतीश कुमार 1 पार्टी के खिलाफ डाने के बाद भी बागियों को पार्टी से नहीं निकालेंगे नीतीश कुमार, जाने क्या है वजह

पटना। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने यह तय कर लिया है कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वाले उनकी पार्टी के नेता पवन वर्मा को पार्टी से नही निकालेंगे।  लेकिन साथ में ये भी तय है कि पार्टी में इनकी कोई हैसियत भी नहीं रहेगी। नीतीश कुमार ने साफ कहा है कि जिसको जहां जाना हो जाए, इसका साफ मतलब है कि वो उन नेताओं को रोकने नहीं जा रहे हैं, जिनको पार्टी की लाइन पसंद नही आ रही हैं। पार्टी किसी को शहीद का दर्जा नहीं देना चाहती हैं।

जेडीयू का इतिहास रहा है कि वो दल के नीतियों का विरोध करने वालों को जल्दी पार्टी से नहीं निकालती है लेकिन ऐसी स्थिति जरूर कर देती है, जिसमें पार्टी में रहना न रहना बराबर हो जाता है। दिल से निकाल देती है। हाल में ऐसे कई उदाहरण देखे जा सकते हैं। दिल्ली चुनाव में ऐसे नेताओं को पार्टी के स्टार प्रचारकों शामिल न करके पार्टी यह पहले ही संदेश दे चुकी है।

जेडीयू के दो नेता पवन वर्मा और प्रशांत किशोर ने पार्टी लाइन के खिलाफ कई बार बयानबाजी की है। पहले नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर और अब दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ गठबंधन करने को लेकर बयानबाजी की गई।

पवन वर्मा दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन से इतने आहत हुए कि उन्होंने  नीतीश कुमार को पत्र लिख दिया और इस गठबंधन पर सवाल खडे किए। पत्र ईमेल से भेजा गया लेकिन नीतीश कुमार ईमेल पढ़ते उससे पहले पत्र मीडिया में लीक हो चुका था। जेडीयू के नेता और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ बयान दे रहे हैं। एनआरसी को लेकर प्रशांत किशोर के ट्वीट के बाद वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिले और इस्तीफे की पेशकश भी की थी।

नीतीश कुमार ने भी कहा कि एनआरसी का कोई सवाल नही हैं। उसके बाद भी प्रशांत किशोर सीएए को लेकर भी विरोध जताते रहे, जिसका समर्थन जेडीयू सदन में कर चुकी हैं। हाल ही में प्रशांत किशोर ने गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ बयान दिया जबकि ये बात सब जानते हैं कि अमित शाह के कहने पर ही प्रशांत किशोर को जेडीयू में शामिल किया गया था।

जेडीयू पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मामले में बिलकुल साफ है कि वे लोग जिन्हें पार्टी लाइन पसंद नही है, वो जहां जाना चाहें जा सकते हैं लेकिन पार्टी उन्हें निकाल कर उसका राजनैतिक फायदा उन्हें देने के पक्ष में नहीं है। सबसे बड़ी बात पवन वर्मा पत्र लिखने के तुरंत बाद पटना आए पर न ही उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सीएम नीतीश कुमार से मुलाकत की और न ही कोई फोन किया। साफ है कि उनकी मंशा मुद्दा को खत्म करने में नहीं है बल्कि इससे फायदा लेने का है। हालांकि नीतीश कुमार आज भी कहते हैं कि वे विद्वान हैं और मैं उनका सम्मान करता हूं।

Related posts

भारतीय सेना प्रमुख नरवाणे ने किया जम्मू दौरा, सुरक्षा स्थिति का लिया जायजा

Rani Naqvi

कैप्टन-सिद्धू आमने-सामने, सिद्धू ने कहा हार के लिए सिर्फ मैं ही जिम्मेदार नहीं, अमरिंदर भी हैं दोषी

bharatkhabar

विदेश से आने वाले लोगों को 7 दिन रहना होगा होम क्वारंटाइन, सरकार ने जारी किए आदेश

Saurabh