November 29, 2021 7:26 am
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अमित शाह: साधारण कार्यकर्ता से देश के गृह मंत्री बनने तक का सफर, यूं ही नहीं कहा जाता ‘राजनीति का चाणक्य’

2017 11 img04 nov 2017 pti11 4 1563289483 अमित शाह: साधारण कार्यकर्ता से देश के गृह मंत्री बनने तक का सफर, यूं ही नहीं कहा जाता ‘राजनीति का चाणक्य’

केंद्रयी गृहमंत्री अमित शाह आज 57 साल के हो चुके हैं। अपनी अब तक की जिंदगी में अमित शाह ने छोटे से लेकर बड़े तक हर मुकाम को हासिल किया है। भारतीय जनता पार्टी में अमित शाह का करियर एक कार्यकर्ता से शुरू हुआ था।

अमित शाह: साधारण कार्यकर्ता से देश के गृह मंत्री बनने तक का सफर

केंद्रयी गृहमंत्री अमित शाह आज 57 साल के हो चुके हैं। अपनी अब तक की जिंदगी में अमित शाह ने छोटे से लेकर बड़े तक हर मुकाम को हासिल किया है। भारतीय जनता पार्टी में अमित शाह का करियर एक कार्यकर्ता से शुरू हुआ था। और आज पार्टी में अमित शाह हर ऊंचे पद पर विराजमान हो चुके हैं।  अमित शाह को भारतीय राजनीति की 21वीं सदी का चाणक्य कहा जाए तो गलत नहीं होगा। तो चलिए आज हम आपको बतातें है भारतीय राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह के एक साधारण कार्यकर्ता से देश के गृहमंत्री बनने तक का सफर कैसा रहा।

22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में हुआ जन्म

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई के संपन्न गुजराती परिवार में हुआ था। अमित शाह 16 साल की उम्र तक अपने पैतृक गांव गुजरात के मान्सा में ही रहे और स्कूली शिक्षा हासिल की। इसके बाद जब उनका परिवार अहमदाबाद शिफ्ट हो गया, तो वो अहमदाबाद आ गए। इसी दौरान अमित शाह साल 1980 में 16 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS से जुड़ गए थे और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता बन गए थे।

1982 में एबीवीपी की गुजरात इकाई के संयुक्त सचिव बने

अपने प्रबल विवेक और शार्प बुद्धि से शाह महज दो साल बाद 1982 में एबीवीपी की गुजरात इकाई के संयुक्त सचिव बन गए। इसी दौरान शाह अहमदाबाद से अपनी बीएससी की पढ़ाई भी कर रहे थे। शाह के पिता प्लास्टिक पाइप का बिजनेस करते थे। बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद शाह अपने पिता का कारोबार भी संभालने लगे थे। लेकिन पिता के कारोबार को संभालने के साथ ही अमित शाह राजनीति में भी एक्टिव हो रहे थे।

बीजेपी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा की ज्वाइन

राजनीति में शाह की एंट्री हो चुकी थी इसके साथ ही शाह को नई नई जिम्मेदारियां मिलनी भी शुरू हो गई थी। साल 1987 में बीजेपी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा में शामिल हुए और सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। इसी साल अमित शाह की शादी भी हो गई। 1987 में महज 23 साल की उम्र में शाह शादी के बंधन में बंध गए उनकी पत्नी का नाम सोनल शाह है। सोनल शाह भी एक आदर्श पत्नी के तरह से ही अपने पति अमित शाह का हर अच्छे बुरे समय में उनका हमेशा साथ दिया।

1989 में बीजेपी अहमदाबाद शहर के सचिव बने

1989 में शाह को बीजेपी अहमदाबाद शहर का सचिव बनाया गया। इस दौरान नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बीच दोस्ती भी गहरी हो रही थी और साथ में दोनों युवा नेता उभरकर सामने आ रहे थे। शाह को पहला बड़ा राजनीतिक मौका 1991 में मिला। लाल कृष्ण आडवाणी ने गांधीनगर सीट से पर्चा भरा था। गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में प्रचार की जिम्मेदारी तब अमित शाह को दी गई थी। इस दौरान पीएम मोदी भी वहां मौजूद थे। अमित शाह ने गांधीनगर से आडवाणी को चुनाव जीताने की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। जिसकी बदौलत उन्हें 1996 में फिर से चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी गई। इस बार प्रचार अटल बिहारी वाजपेयी के लिए करना था जो गुजरात से चुनाव लड़ रहे थे।

1997 में पहली बार लड़ा विधानसभा का चुनाव

1996 तक दूसरे नेताओं के लिए प्रचार करते-करते शाह 1997 में खुद के लिए प्रचार करने लगे। अमित शाह ने 1997 में गुजरात की सरखेज विधानसभा सीट से उप चुनाव लड़ा। इस उप चुनाव में जीत दर्ज कर शाह ने जहां अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कर ली थी तो वहीं एक नए युवा नेता के रूप में तेजी से उभरने भी लगे थे। इसके बाद अमित शाह ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1999 में वे अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के प्रेसिडेंट चुने गए थे। अमित शाह को साल 2001 में बीजेपी की राष्ट्रीय सहकारिता प्रकोष्ठ का संयोजक नियुक्त किया गया।

साल 2002 में पहली बार मंत्री पद की शपथ ली

साल 2002 में पहली बार अमित शाह ने मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद उन्होंने गुजरात सरकार के मंत्री के रूप में गृह, यातायात, निषेध, संसदीय कार्य, विधि और आबकारी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। 2003 से 2010 तक उन्होने गुजरात सरकार की कैबिनेट में गृहमंत्रालय का जिम्मा संभाला। 2014 में नरेंद्र मोदी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बने। साल 2010 से साल 2015 का दौर अमित शाह के लिए थोड़ा कठिन रहा। उस समय शाह का नाम फर्जी एनकाउंटर मामले में आया। जिसके बाद 2010 में उन्हें जेल भेज दिया गया था। हालांकि इसके बाद 2015 में CBI की एक विशेष अदालत ने इस एनकाउंटर केस में अमित शाह को बरी कर दिया।

यूं ही नहीं कहा जाता राजनीति का चाणक्य

अमित शाह को राजनीति का चाणक्य यूं ही नहीं कहा जाता। साल 2014 में बीजेपी की सत्ता में वापसी के पीछे शाह का अहम रोल था। शाह को 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय महासचिव बनाकर 80 सांसदों वाले उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया। शाह ने यहां भी अपनी पूरी जान झौंक दी और पार्टी की झोली में 80 सीटों में से 71 सीटें डाल दी। देश के सबसे बड़े सूबे में इस तरह की क्रांति देख पूरे देश में अमित शाह का नाम गूंजने लगा। इसी साल जुलाई के महीने में फिर अमित शाह को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया।

2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में अहम रोल

साल 2014 के लोकसभा चुनावो में शाह के कमाल को देखते हुए उन्हें साल 2016 में फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। 2019 के लोकसभा चुनावों की जिम्मेदारी भी शाह के कंधे पर डाल दी गई। इस बार अमित शाह और मजबूती से आगे बढ़े और बीजेपी की झोली में रिकॉर्ड सीटें डाल दी। जिसके बाद पार्टी में अमित शाह की चाणक्य नीति को हर कोई दीवाना हो गया। मोदी 2.0 में अमित शाह को केंद्रीय गृहमंत्री की जिम्मेदारी सौंप दी गई और इसी जिम्मेदारी के साथ अब शाह देश की सेवा में निस्वार्थ भाव से लगे हुए हैं।

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