January 28, 2023 2:33 am
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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने ग्लेशियर जोखिम और संकट पर कार्यशाला का आयोजन किया

apda prabandhan राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने ग्लेशियर जोखिम और संकट पर कार्यशाला का आयोजन किया
  • संवाददाता, भारत खबर

नई दिल्ली। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण(एनडीएमए),स्विस विकास और सहयोग एजेंसी(एसडीसी) के साथ भागीदारी में ग्लेशियर जोखिम और संकट,विशेष तौर पर ग्लेशियर झील से आने वाली बाढ़(जीएलओएफ) के आंकलन और प्रबंधन पर विचार विमर्श करने के लिए दो दिवसीय बैठक का आयोजन कर रहा है।

जीएलओएफ, ग्लेशियर की सतह,किनारो या भूगर्भ में बने जलाशय के अचानक निकलने को कहा जाता है। इसे वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान देखा गया गया था जिसके परिणाम लोगो और आधारभूत ढांचो पर प्रलयकारी रहा था।

भारतीय हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर और वातावरण तेजी से परिवर्तित हो रहा है, जो जीएलओफ जैसे खतरो को बढा रहा है। यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है और एल्पाइन घाटी में आवासीय, पर्यटन और जलविद्युत आधारभूत ढांचे के तेजी से बढ़ने के कारण प्रमुख नीतियो में ग्लेशियर खतरो के आंकलन और प्रबंधन की आवश्यकता है। जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरूणाचल प्रदेश ग्लेशियर खतरो के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।

बैठक के दौरान एसडीसी के सहयोग प्रमुख सुमेरील्योर क्रिटाज ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञो को एक मंच में लाना है।

इस अवसर पर एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल एन सी मारवाह ने कहा कि भारतीय हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और भू प्रयोग के गिरते स्तर के कारण ये गहरे दबाव में हैं। मारवाह ने इसके साथ ही खतरो से निपटने के लिए सभी भागीदारको के समन्वय पर जोर दिया।

इस अवसर पर एनडीएमए के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि विभिन्न केंद्रीय एंजेसियां ग्लेशियर झीलों और अन्य जल क्षेत्रो की निगरानी कर रही हैं लेकिन ग्लेशियर जोखिम प्रबंधन के क्षेत्र में काफी काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने बदलते हुए जलवायु परिस्थिति में राज्य प्रशासन और स्थानीय समुदाय के मध्य क्षमता बढाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

दो दिवसीय कार्यशाला में एनडीएमए के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी, एसडीसी के प्रतिनिधि, राज्य सरकार के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक संगठन एवं भागीदार भी भाग ले रहे हैं।

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