mount kailash कैलाश की तलहटी पर पहुंचते ही तेजी से बढ़ने लगती है इंसान की उम्र, एक दिन होता है एक महीने के बराबर!

कैलाश की दिव्यता खोजियों को ऐसे आकर्षित करती रही है, जैसे खगोलविद आकाशगंगाओं की दमकती आभा को देखकर सम्मोहित हो जाते हैं. शताब्दियों से मौन खड़ा कैलाश संसार के पर्वतारोहियों और खोजियों को चुनौती दे रहा है लेकिन ‘महादेव के घर’ को देखना तो दूर, कोई उसकी तलहटी में जाकर खड़ा भी नहीं हो पाता. दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर झंडा लहरा चुका मानव कैलाश पर्वत पर आरोहण क्यों नहीं कर सका? अनुभव बताते हैं कि कैलाश की तलहटी में पहुंचते ही आयु बहुत तेज़ी से बढ़ने लगती है.

सबसे ज्यादा रूसी हैं कैलाश पर्वत की सुंदरता से प्रभावित
कैलाश पर्वत की सुंदरता, वहां सर्वत्र व्याप्त अदृश्य आध्यात्मिक तरंगों ने संसार में सबसे अधिक रूसियों को प्रभावित किया है. साल के बारह महीने रुसी खोजियों के कैम्प कैलाश पर्वत क्षेत्र में लगे रहते हैं. यहां की प्रचंड आध्यात्मिक अनुभूतियों के रहस्य का पता लगाने के लिए वे जान का जोखिम तक उठा लेते हैं.
इन लोगों के अनुभव बता रहे हैं कि कैलाश पर्वत की तलहटी में ‘एजिंग’ बहुत तेज़ी से होने लगती है. भयानक अनुभवों से गुजरकर आए उन लोगों ने बताया कि वहां बिताया एक दिन ‘एक माह ‘ के बराबर होता है. हाथ-पैर के नाख़ून और बाल अत्यधिक तेज़ी से बढ़ जाते हैं. सुबह क्लीन शेव रहे व्यक्ति की रात तक अच्छी-खासी दाढ़ी निकल आती है.

चीन ने दी थी सबसे पहले क्लाइम्बर्स को अनुमति
शुरुआती दौर में चीन ने दुनिया के धुरंधर क्लाइम्बर्स को कैलाश पर्वत आरोहण की अनुमति दी थी लेकिन सैकड़ों प्रयास असफल रहे. बाद में चीन ने यहां आरोहण की अनुमति देना बंद कर दिया. ऐसे ही एक बार चार पर्वतारोहियों ने कैलाश के ठीक नीचे स्थित ‘जलाधारी’ तक पहुंचने की योजना बनाई. इनमें एक ब्रिटिश, एक अमेरिकन और दो रुसी थे. बेस कैम्प से चारों कैलाश की ओर निकले.
बताते हैं वे कुशल पर्वतारोही थे और काफी आगे तक गए. एक सप्ताह तक उनका कुछ पता नहीं चला. जब वे लौटे तो उनका हुलिया बदल चुका था. आंखें अंदर की ओर धंस गई थी. दाढ़ी और बाल बढ़ गए थे. उनके अंदर काफी कमजोरी आ गई थी. ऐसा लग रहा था कि वे आठ दिन में ही कई साल आगे जा चुके हैं. उन्हें अस्पताल ले जाया गया. दिग्भ्रमित अवस्था में उन चारों ने कुछ दिन बाद ही दम तोड़ दिया.

एक पड़ाव पर मिलती है वापिस जाने की चेतावनी
उन्नीसवीं और बीसवीं सदी में कई बार कैलाश पर्वत पर फतह के प्रयास किये गए. जिन लोगों ने अपने विवेक से काम लिया और आगे जाने का इरादा छोड़ दिया, वे तो बच गए लेकिन दुःसाहसी लोग या तो पागल हो गए या जान गवां बैठे. कैलाश की परिक्रमा मार्ग पर एक ऐसा खास पॉइंट है, जहां पर आध्यात्मिक शक्तियां चेतावनी देती है.
मौसम बदलता है या ठण्ड अत्याधिक बढ़ जाती है. व्यक्ति को बैचेनी होने लगती है. अंदर से कोई कहता है, यहां से चले जाओ. जिन लोगों ने चेतावनी को अनसुना किया, उनके साथ बुरे अनुभव हुए. कुछ लोग रास्ता भटककर जान गंवा बैठे. सन 1928 में एक बौद्ध भिक्षु मिलारेपा कैलाश पर जाने में सफल रहे थे. मिलारेपा ही मानव इतिहास के एकमात्र व्यक्ति हैं, जिन्हें वहां जाने की आज्ञा मिली थी.

‘हाउस ऑफ़ हैप्पी स्टोन’ की अलग धारणा
रुसी वैज्ञानिक डॉ अर्नस्ट मूलदाशेव ने कैलाश पर्वत पर काफी शोध किये हैं. वे कई बार चीन से विशेष अनुमति लेकर वहां गए हैं. कैलाश की चोटी को वे आठ सौ मीटर ऊंचा ‘हाउस ऑफ़ हैप्पी स्टोन’ कहते हैं. उन्होंने अनुभव किया कि कैलाश के 53 किमी परिक्रमा पथ पर रहने से ‘एजिंग’ की गति बढ़ने लगती है. दाढ़ी, नाख़ून और बाल तेज़ी से बढ़ते हैं. एक अनुमान के मुताबिक कैलाश पर्वत की तलहटी के संपर्क में आते ही एक दिन में ही आयु एक माह बढ़ जाती है. इस हिसाब से वहां एक महीने रहने में ही जीवन के लगभग ढाई साल ख़त्म हो जाएंगे.

साल 2004 में बाप-बेटे की जोड़ी ने देखा था चमत्कार
साल 2004 के सितंबर में इसी तथ्य का पता लगाने के लिए मॉस्को से रशियन एकेडमी ऑफ़ नेचुरल साइंसेज के यूरी जाकारोव ने अपने बेटे पॉल के साथ कैलाश पर्वत जाने की योजना बनाई. वे गैरकानूनी ढंग से तलहटी के करीब पहुंचे और कैम्प लगा लिया. उन्हें अभी एक दिन ही हुआ था कि एक रात ऐसा अनुभव हुआ कि अगली सुबह उन्होंने वापस आने का फैसला कर लिया.
रात लगभग तीन बजे बेटे पॉल ने झकझोर कर यूरी को जगाया और बाहर देखने के लिए कहा. यूरी ने बार देखा तो अवाक रह गया. कैलाश के शिखर पर रोशनियां फूट रही थीं. प्रकाश के रंगबिरंगे गोले एक एक कर आते जाते और बुलबुलों की तरह फूटते जाते. कुछ पल बाद उसी स्थान पर अनगिनत ‘स्वस्तिक’ बनते दिखाई दिए. यूरी और उसके बेटे की आंखों से अनवरत आंसू बहे जा रहे थे. वे एक अदृश्य शक्ति को अनुभव कर रहे थे. उनके भीतर एक अनिर्वचनीय आनंद फूट रहा था. यूरी समझ गए कि वे ‘परमसत्ता’ के घर के सामने खड़े हैं और इस काबिल नहीं कि वहां कदम रख सके.

अज्ञात उर्जा के कारण तेजी से कम होने लगती है उम्र!
आखिर ऐसी कौनसी ऊर्जा है जो कैलाश के पास जाते ही तेज़ी से उम्र घटाने लगती है. कदाचित ये महादेव का सुरक्षा कवच है जो बाहरी लोगों को उनके घर से दूर रखने का उपाय हो. वैज्ञानिकों, खोजकर्ताओं और पर्वतारोहियों ने इसका साक्षात अनुभव किया है.
कैलाश पर्वत के पास ही ऐसा क्यों होता है, इसका ठीक-ठीक जवाब किसी के पास नहीं है. वहां मिलने वाले आनंद का अनुभव बताना भी किसी के बस में नहीं है. कुछ तो ऐसे भी हैं कि उस अबोले, विलक्षण आनंद के लिए उम्र दांव पर लगाने के लिए भी तैयार हो जाते हैं. ‘फास्ट एजिंग’ की मिस्ट्री कभी नहीं सुलझ सकेगी.

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