November 25, 2022 10:41 pm
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अगर किसी हिन्दू राष्ट्र में मुस्लिमों के लिए जगह नहीं, तो वह हिन्दुत्व भी नहीं: मोहन भागवत

mohan bhagwat 2 अगर किसी हिन्दू राष्ट्र में मुस्लिमों के लिए जगह नहीं, तो वह हिन्दुत्व भी नहीं: मोहन भागवत

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की कार्यशैली स्पष्ट करने के साथ देश में अल्पसंख्यकों के मन में पनप रही आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की। मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि अगर किसी हिन्दू राष्ट्र में मुस्लिमों के लिए जगह नहीं, तो वह हिन्दुत्व नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि आरएसएस हमेशा से संविधान की शक्ति में यकीन करता है।

mohan bhagwat 2 अगर किसी हिन्दू राष्ट्र में मुस्लिमों के लिए जगह नहीं, तो वह हिन्दुत्व भी नहीं: मोहन भागवत

हिन्दू राष्ट्र होने का मतलब यह कतई नहीं कि वहां मुस्लिमों के लिए जगह न हो

बता दें कि दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में तीन दिनों तक चलने वाले ‘भविष्य के भारत’ संवाद कार्यक्रम के दूसरे दिन मोहन भागवत ने कहा कि एक हिन्दू राष्ट्र होने का मतलब यह कतई नहीं कि वहां मुस्लिमों के लिए जगह न हो। जिस दिन ऐसा होगा, तो वह हिन्दुत्व नहीं रह जाएगा। हिन्दुत्व पूरी दुनिया को परिवार मानने की बात करता है। मोहन भागवत ने बीते मंगलवार को ये भी दावा किया कि संघ ने अपने स्वयंसेवकों से किसी पार्टी विशेष के लिए काम करने को कभी नहीं कहा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय हितों के लिए काम करने वाले लोगों का समर्थन करने की सलाह जरूर दी है।

बीजेपी के काम के बीच फर्क बताने का प्रयास किया

वहीं आरएसएस के तीन दिवसीय सम्मेलन में दूसरे दिन भागवत ने इस टिप्पणी के ज़रिए आरएसएस के कामकाज और बीजेपी के काम के बीच फर्क बताने का प्रयास किया। बीजेपी को आम तौर पर वैचारिक तौर पर संघ से जुड़ा माना जाता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित इसके कई शीर्ष नेताओं की आरएसएस बैकग्राउंड से रहे हैं। भागवत ने बीजेपी का नाम लिए बिना कहा कि ऐसी धारणा है कि आरएसएस किसी पार्टी विशेष के कामकाज में मुख्य भूमिका निभाता है, क्योंकि उस संगठन में इसके बहुत सारे कार्यकर्ता हैं।

राष्ट्रीय हितों के मुद्दे पर उसका दृष्टिकोण है

वहीं भागवत ने कहा कि हमने कभी स्वयंसेवक से किसी पार्टी विशेष के लिए काम करने को नहीं कहा। हमने उनसे राष्ट्रीय हित के लिए काम करने वालों का समर्थन करने को जरूर कहा है। आरएसएस राजनीति से दूर रहता है, किन्तु राष्ट्रीय हितों के मुद्दे पर उसका दृष्टिकोण है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ का मानना है कि संविधान की परिकल्पना के अनुसार सत्ता का केन्द्र होना चाहिए तथा यदि ऐसा नहीं है तो वो इसे गलत मानता है।

आरएसएस प्रभुत्व को इसकी कोई परवाह नहीं है कि सत्ता में कौन आता है

साथ ही भविष्य का भारत, आरएसएस का दृष्टिकोण’ नाम से चल रहे सम्मेलन के पहले दिन सोमवार को मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस प्रभुत्व नहीं चाहता तथा इसकी कोई परवाह नहीं है कि सत्ता में कौन आता है। भागवत ने सोमवार को इस सम्मेलन के ज़रिए आरएसएस और उसकी विचारधारा को लेकर आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस तानाशाह नहीं, बेहद लोकतांत्रिक है।

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