September 29, 2021 3:56 am
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मुंशी प्रेमचन्द्र का प्रतापगढ़ से विशेष लगाव रहा : विन्ध्यवासिनी कुमार

मुंशी प्रेमचन्द्र का प्रतापगढ़ से विशेष लगाव

लखनऊ। साहित्य शिरोमणि मुंशी प्रेमचन्द्र की जयंती के अवसर पर हिंदी संस्थान में पूर्व नेता विधान परिषद विन्ध्यवासिनी कुमार और हिंदी संस्थान के अध्यक्ष सदानंद गुप्त की उपस्थिति में गणमान्य लोगों ने इस कलम के सिपाही की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

इस अवसर पर विन्ध्यवासिनी कुमार ने कहा की मुंशी प्रेमचन्द का प्रतापगढ़ से विशेष लगाव रहा। यहीं से उन्होंने अपनी लेखनी की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व की अनुभूति होती है की मेरा जन्मस्थल भी उसी बेल्हा से है जहां से अपनी अमरकृति ‘कर्मभूमि’ के जरिए आम जनमानस पर अमिट छाप छोड़ने वाले उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद  ने शहर के जीआईसी कालेज में चार साल तक बतौर अध्यापक कार्य किया। अध्यापन के साथ साहित्य के क्षेत्र में कार्य करते हुए उनको मुंशी की उपाधि भी यहीं से मिली । नमक का दरोगा, गोदान, गबन जैसे उपन्यास के लेखक जिनमे जीवन के बहुआयामी चरित्र जीवंत लगते प्रतीत होते है, ऐसे साहित्य शिरोमणि मुंशी प्रेमचन्द्र का जीवन अत्यंत मुफलिसी में गुजरा।  आपने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, आदि तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं।

इस अवसर पर हिंदी संस्थान के अध्यक्ष सदानंद गुप्त, वरिष्ठ पत्रकार धीरेन्द्रनाथ श्रीवास्तव, हाईकोर्ट अधिवक्ता विश्वेष कुमार, अभय शंकर शुक्ला आदि गणमान्य लोगो ने मुंशी प्रेमचन्द्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपने विचार व्यक्त किये।

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