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MSME DAY: ऑनलाइन बाजार से समन्वय कर बढ़ाएं लघु उद्योग

3 MSME DAY: ऑनलाइन बाजार से समन्वय कर बढ़ाएं लघु उद्योग

लखनऊ। देश में आज सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग यानी एमएसएमई (Micro, Small and Medium Enterprises) दिवस मनाया जा रहा है। ऐसे मौके पर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन लखनऊ के चेयरमैन अवधेश कुमार अग्रवाल ने भारत खबर के साथ अनुभव साझा करते हुए सरकार से कई महत्वपूर्ण मांग की है। साथ ही उन्होंने लघु उद्योगों को बढ़ावा देने, अपने उद्योग स्थापित करने और समस्याओं के समाधान को लेकर कई सुझाव दिए हैं। भारत खबर के संवाददाता सुशील कुमार से बात करते हुए अवधेश कुमार अग्रवाल ने युवाओं से अपील की है कि उन्हें उद्योग स्थापित कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। पेश हैं उनसे बातचीत के अंश…

खुद के और संगठन के बारे में बताईए। यह कैसे काम करता है?

मेरा नाम अवधेश कुमार अग्रवाल है और मैं आईआईए लखनऊ का चेयरमैन हूं। लखनऊ आईआईए के करीब 700 सदस्य हैं। हमारा संगठन एमएसएमई का अंग है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां करीब आठ से नौ हजार तक के सदस्य हैं। लखनऊ के अलावा उत्तराखंड और दिल्ली में भी हमारे चैप्टर हैं। आईआईए उत्तर प्रदेश में एमएसएमई का सबसे बड़ा संगठन माना जाता है। यह एमएसएमई इंडस्ट्रीज का प्रतिनिधित्व करता है।

विश्व एमएसएमई दिवस मनाया जा रहा है। आखिर यह इतना क्यों महत्वपूर्ण है?

देखिए, इसको बहुत अच्छे से समझने की जरूरत है। एमएसएमई के महत्व को समझना है तो इसके बारे में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि केंद्र और राज्य सरकार में इस क्षेत्र से सबसे ज्यादा रोजगार मुहैया होते हैं।

हर साल युवाओं की एक बड़ी फौज बेरोजगार के रूप में तैयार होती है। इन युवाओं की उम्मीद बनकर आता है एमएसएमई विभाग। देश और किसी भी प्रदेश की जीडीपी की ग्रोथ का मुख्य आधार एमएसएमई ही बनता है। बहुत आसान भाषा में यह है कि यह हमारे देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है।

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इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन लखनऊ के चेयरमैन अवधेश कुमार अग्रवाल
नाम तो इसका सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग है। लेकिन, वैश्विक पैमाने पर इसकी उपयोगिता कैसे है?

सवाल आपका वाजिब है। लेकिन, इसकी व्यापकता को ही समझने की जरूरत है। हमारा संगठन इन छोटे उद्योगों को वैश्विक पहचान दिलाने में सरकार के साथ काम कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि हमारे छोटे उद्योगों को भी वैश्विक रूप पर पहचान मिले। छोटे कारोबारी स्थापित हों। तभी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। हमारे यहां हजारों की संख्या में छोटे उद्योग हैं। अगर उनको थोड़ी सी मदद और मार्गदर्शन मिले तो इसको देश के साथ विदेशों तक पहुंचाया जा सकता है।

आपकी समस्याएं क्या हैं। उनका निदान कैसे होगा और सरकार से क्या मांगें हैं आपकी?

देखिए एमएसएमई की उपयोगिता आज की तारीख में किसी से छिपी नहीं है। छोटी इंडस्ट्री की दिक्कतों को हर सरकार मानती है। एमएसएमई इंडस्ट्री की अपनी मूलभूत समस्याएं हैं। इन उद्योगों के बारे में हर कोई जानता है कि सारी बुनियादी जरूरतें उन्हें खुद देखनी होती हैं।

मसलन, अकांउट खुद देखते हैं, सरकारी कागजात के लिए खुद भागदौड़ करते हैं, कर्मचारियों की भर्ती से लेकर उनकी सुविधाएं उन्हें खुद देखनी होती हैं। अब ऐसे में इन उद्योगों के लिए केंद्र सरकार कई छूट देती हैं। मुआवजों का भी प्रावधान है। लेकिन, ये अधिकारियों की हीलाहवाली का शिकार हो जाती हैं।

केंद्र की योजनाओं को प्रदेश सरकार अगर सही मंशा से लागू करे तो व्यवस्था में सुधार हो। कई बार प्रदेश सरकारें केंद्रीय योजनाओं को लागू भी करती हैं तो उनके अधीन आने वाले निगम पूरी व्यवस्था को ध्वस्त कर देते हैं।

भुगतान संबंधी समस्याओं को अभी तक सुधारा नहीं जा सका है। केंद्र और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार सप्लाई होने के 45 दिनों के अंदर उसका भुगतान किए जाने का प्रावधान है। लेकिन, भुगतान की प्रक्रिया इतनी सुस्त है कि छह-छह महीने तक उद्यमी सरकारी विभागों की खाक छानते हैं और हाथ कुछ नहीं आता है।

अगर सही समय पर भुगतान हो तो छोटी पूंजी के उद्यमियों की समस्याएं निस्तारित हो सकती हैं। औद्योगिक क्षेत्रों को फ्री होल्ड कर दिया जाए। फ्री होल्ड करने से सरकार को भी सुविधा हो जाएगी।

कोरोना ने कितना प्रभावित किया है?

उत्तर : कोरोना ने एमएसएमई उद्योगों को बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले साल कोरोना के बाद लॉकडाउन लगाने के बाद एमएसएमई की कमर टूट गई। क्योंकि छोटे उद्योगों के लिए महीने दो महीने सर्वाइव करना बहुत मुश्किल होता है।

दूसरे फेज में सरकार ने लॉकडाउन तो नहीं लगाया लेकिन कोरोना कर्फ्यू के बाद अधिकांश बाजार बंद रहे। ऐसे में अगर उद्योगों ने उत्पादन भी किए तो उनके माल गोदामों में ही रह गए। कई सामान नहीं मिले। मजदूर लॉकडाउन के डर से घर चले गए। इसके कारण काम बुरी तरह प्रभावित हुआ।

युवाओं में सरकारी नौकरी और उद्योगों को लेकर उलझन है। क्या सलाह देंगे?

सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण सवाल है। सरकारी नौकरी को लेकर आमधारणा यह है कि यहां काम नहीं करना पड़ता। 60 साल की उम्र तक एक तय वेतन मिलता रहता है। नौकरी जाने का खतरा नहीं था। उसके बाद पेंशन भी थी।

लेकिन, अब बदलाव हो रहे हैं। अब सरकारी नौकरी में भी खूब जमकर काम करना होता है। नौकरी पर संकट भी बना रहता है साथ ही पेंशन भी नहीं है अब। ऐसे में युवाओं को खुद के उद्योग स्थापित करने की तरफ बढ़ना चाहिए।

इससे वे खुद कई लोगों को नौकरी दे सकते हैं। साथ ही अब तो सरकार भी कई मदों में उद्योग स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद दे रही है। युवाओं के पास नए आईडियाज हैं। उनको इस तरफ आना चाहिए।

सोशल नेटवर्किंग साइट्स से कितना असर हुआ है। इसका विरोध भी हो रहा है। आप किस रूप में देखते हैं?

उत्तर : देखिए सोशल साइट्स के नुकसान तो हैं। क्योंकि लोग अब घर बैठे सामान जा रहे हैं। ऐसे में जो दुकानें खोल बैठे हैं, उनके रोजगार पर असर पड़ा है। लेकिन, अब समझने की जरूरत है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स से समन्वय स्थापित कर अपने व्यवसाय को बढ़ाने की जरूरत है।

उदाहरण के तौर पर आप देखिए कि सबसे ज्यादा दवा व्यवसायी इसका विरोध कर रहे हैं। लेकिन, उन्हें भी समझना होगा और इसके साथ जुड़ना होगा। उदाहरण के तौर एक मेडिकल स्टोर पर कई ऐसे लोग हैं जो नियमित दवा लेने आते हैं। मसलन, डायबिटीज, शुगर आदि के मरीजों की दवाएं फिक्स होती हैं।

अगर मेडिकल स्टोर संचालक उन मरीजों का डाटा तैयार करे और उनकी दवाएं नियत समय पर उनके घर तक पहुंचा दे। इससे मरीजों को भी सुविधा होगी और उनको भी नुकसान नहीं होगा। ऐसे ही दूसरे व्यवसायों से जुड़े लोग भी ऐसा कर सकते हैं।

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