September 28, 2021 1:30 am
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संविदा एमपीडब्ल्यू कर्मचारियों का आंदोलन जारी, जानिए क्या है पूरा मामला

WhatsApp Image 2021 08 13 at 5.44.25 PM संविदा एमपीडब्ल्यू कर्मचारियों का आंदोलन जारी, जानिए क्या है पूरा मामला

लखनऊ। महानिदेशालय परिवार कल्याण परिसर में संविदा एमपीडब्ल्यू कर्मचारियों ने तीसरे सप्ताह के 16वें दिन भी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन जारी रखा। इन कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग छह महीने का वेतन नहीं दे रहा है। पांच साल से इसकी मांग की जा रही है।

आंदोलन की अध्यक्षता करने वाले उत्तर प्रदेश कांटेक्ट एमपीडब्ल्यू एसोसिएशन के प्रवक्ता शिवेंद्र मिश्रा ने बताया कि धरना स्थल पर सभी संविदा कर्मचारियों का जोश बना हुआ है। वह अपनी मांग को माने जाने से कम पर बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। लगातार इस संबंध में विधायकों, मंत्रियों,सांसदों और भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों से मिलकर अपनी बात रख रहे हैं।

संगठन संरक्षक विनीत मिश्रा ने बताया भारत सरकार के मेमोरेंडम में दिए गए दिशा-निर्देश के विरुद्ध शासन की कार्रवाई को लेकर संविदा एमपीडब्ल्यू कार्मिकों द्वारा न्याय पाने के लिए उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ तथा इलाहाबाद में वाद दायर किए गए। जिसमें उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ द्वारा रिट याचिका संख्या 1453/2014 में न्यायमूर्ति ने संविदा कार्मिकों को विभाग में रखने और मानदेय देने का आदेश भी दिया है।

उन्होंने बताया कि एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल अभिनव एन त्रिवेदी ने 11 अक्टूबर 2014 को प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य, महानिदेशक परिवार कल्याण सहित अन्य अधिकारियों को आदेश से अवगत कराते हुए संविदा कार्मिकों को कार्य पर लेने के आदेश दिए। अब तक दोनों जगहों पर मिलाकर 46 वाद दायर किए जा चुके हैं इन सभी ने कंसीडरिंग आदेश पारित हैं।

उन्होंने बताया कि रिट याचिका संख्या 5624/ 2014 में पारित स्थगन आदेश सभी 46 रिट याचिकाओं पर लागू है। इन्हीं में से एक रिट याचिका संख्या 59726/2015 में पारित आदेश को विभाग में लागू कराने के लिए रिट याचिका संख्या 5520/ 2016 लानी पड़ी। जिससे घबराकर शासन अपने निरीह अधिकारियों पर कार्यवाही करके विशेष अपील दाखिल कर रहा है। जबकि रिट याचिका संख्या 59726/2015 में दिए गए आदेश के विरुद्ध तत्कालीन सचिव एवं उत्तर प्रदेश हेल्थ स्ट्रेंथनिंग परियोजना निदेशक झिओमी हेकाली ने 26 सितंबर 2016 को संविदा एमपीडब्ल्यू को विभाग से निकालने के नियम विरुद्ध आदेश जारी किए थे।

विनीत मिश्रा ने दावा किया कि न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर सचिव ने जिस तरह संविदा एमपीडब्ल्यू के विरुद्ध कार्यवाही की है, वह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। यही नहीं उस रिट याचिका में अंतरिम आदेश दिनांक 16 अक्टूबर 2015  के विरुद्ध शासन द्वारा स्टे बक्केट एप्लीकेशन कोर्ट में अवमानना याचिका को देखते हुए 24 फरवरी 2020 को डाली गई और आज लगभग 6 वर्ष बाद अंतरिम आदेश के विरुद्ध विशेष अपील कर रहा है।

विनती मिश्रा ने कहा कि यहां पर प्रश्न उठता है जो अधिकारी दोषी है उस पर क्या कार्रवाई की गई? उसको बचा कर ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करके अपील का ग्राउंड बनाया गया है, जिसका कोई मतलब ही नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन ने शासन की इस साजिश को बेनकाब करने का फैसला लिया है। इस अपील को खारिज कराने का पुरजोर प्रयास किया जाएगा। इससे ऐसे लगता है कि यह अधिकारी पूर्णत: निरंकुश हैं इनके ऊपर सरकार का कोई दबाव नहीं है। उन्होंने बताया कि ध्यान देने योग्य है कि उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ ने रिट याचिका संख्या 1453 2014 में दिनांक 30 मार्च 2016 को 6 माह का मानदेय दिए जाने का आदेश दिया था। आज तक इन अधिकारियों ने उस मानदेय को दबा कर रखा है।

विनीत मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान सरकार में विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री योगी से प्रदेश के युवाओं को रोजगार पाने की उम्मीद थी। लेकिन अधिकारी उनके उद्देश्यों पर पानी फेर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन विभागीय मंत्री अधिकारियों के चश्मे से देखना बंद कर देंगे उसी दिन इस समस्या का निराकरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि मंत्री तक संगठन संरक्षक द्वारा 06 बार इस प्रकरण से अवगत कराया गया लेकिन अभी तक निराशा ही हाथ लगी है। लेकिन संगठन ने पुनः निर्णय किया है एक बार फिर मंत्री  के समक्ष इस विषय को रखा जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री तक भी यह विषय पहुंच सके उसके लिए तमाम रास्तों से इसके प्रयास किए जा रहे हैं।

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