महज 15 दिन की आयु में मां ने त्यागा, आज बना स्विट्जरलैंड का पहला भारतीय सांसद

नई दिल्ली। दक्षिण भारत के कर्नाटक में जन्में निकलॉस-सैमुअल गगर स्विट्जरलैंड में सांसद बनने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। इसके साथ ही वो स्विस संसद के सबसे युवा सांसदों में भी शुमार हो गए हैं। कर्नाटक के उडुपी में एक मई 1970 को सीएसआई लॉम्बर्ड में मेमोरियल हॉस्पिटल में जन्मे निकलॉस को उनकी मां अनुसूया ने पैदा होते के साथ त्याग दिया था। मां के त्यागने के एक हफ्ते के अंदर ही उन्हें एक स्विस दंपति ने गोद ले लिया था। उनके नए माता-पिता फ्रित्ज और एलिजाबेथ उन्हें लेकर केरल चले गए उस समय निकलॉस मात्र 15 दिन के थे।

पिछले सप्ताह हुए पहले भारतीय मूल के लोगों के संसद सम्मेलन (पीआईओ) में हिस्सा लेने आए निकलॉस ने बातचीत में कहा कि मेरी जैविक मां ने मेरे जन्म के साथ ही मुझे डॉक्टर ईडी पीफ्लगफेल्डर को सौंप दिया था। मेरी जैविक मां ने उनसे अनुरोध किया था कि मेरे बच्चे को किसी ऐसे दंपति को दें जो मेरा बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर सके जिससे मैं बेहतर कैरियर बना सकूं। उनके अनुरोध को मानते हुए डॉक्टर पीफ्लगफेल्डर ने मुझे फ्रित्ज और एलिजाबेथ गगर को सौंप दिया था।

निकलॉस ने कहा कि जीवन के शुरुआती 4 साल मैंने केरल के थालेस्सरी में बिताए।  यहां मेरी नई मां एलिजाबेथ अंग्रेजी और जर्मनी पढ़ाती थीं और मेरे पिता फ्रित्ज नट्टूर टेक्निकल ट्रेनिंग फाउंडेशन में काम करते थे।बाद में मेरे नए माता-पिता स्विट्जरलैंड चले गए. यहां पर मैंने ट्रक ड्राइवर, माली और मिस्त्री का काम किया, जिससे की मैं अपनी उच्च शिक्षा का खर्च उठा सकूं क्योंकि मेरे माता-पिता ऐसा करने में असमर्थ थे इसलिए उन्होंने मुझे कपड़ा और खाना दिया इसके साथ ही कई चीजें सिखाई। बता दें कि निकलॉस उन 143 लोगों मे शामिल हैं जो दुनिया के अलग-अलग 24 देशों में सांसद हैं और भारतीय मूल के हैं।

 

पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय की तरफ से आयोजित भारतीय मूल के सांसदों (पीआईओ) के कार्यक्रम में निकलॉस समेत 143 सांसदों ने हिस्सा लिया था। पढ़ाई के बाद जीवन यापने करने के लिए निकलॉस ने समाजिक कार्य भी किया और कुछ समय अमेरिका के कोलंबिया स्थित एक अनाथालाय में भी काम किया। उन्होंने अपने इस भारत दौरे को एक भावुक पल बताया. निकलॉस ने अपनी सफलता के लिए अपनी जैविक माता को बधाई भी दी।  निकलॉस अपनी जैविक माता तक पहुंचने में असफल रहे हैं, उन्होंने कहा कि मैं अपनी जैविक मां की यादों को जिंदा रखने के लिए अपनी बच्ची का नाम अनुसूया रखूंगा।