Chandra dev ज्योतिष में क्या है चंद्रमा, जानिए चंद्र से जुड़ा हर रहस्य
ज्योतिष में चंद्र ग्रह का विशेष स्थान है। हालाँकि खगोल विज्ञान में चंद्रमा को पृथ्वी ग्रह का एक प्राकृतिक उपग्रह माना जाता है।
चंद्रमा नौ ग्रहों के क्रम में सूर्य के बाद दूसरा ग्रह है। वैदिक ज्योतिष में यह मन, माता, मानसिक स्थिति, मनोबल, द्रव्य वस्तुओं, यात्रा, सुख-शांति, धन-संपत्ति, रक्त, बायीं आँख, छाती आदि का कारक होता है। चंद्रमा राशियों में कर्क और नक्षत्रों में रोहिणी, हस्त और श्रवण नक्षत्र का स्वामी होता है।
ज्योतिष में इसके द्वारा व्यक्ति की चंद्र राशि ज्ञात होती है। जन्म कुंडली में स्थित 12 भावों में चंद्र ग्रह का अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। चंद्रमा क्या है और कैसा है इसका स्वभाव सुनिए पंडित अक्षय शर्मा द्वारा…
🌜मेरा नाम चन्द्र है।
🌜मैं ज्योतिष में एक स्त्री ग्रह हूँ।
🌜जब मैं किसी भाव विशेष में दृष्टि डालती हूँ, तो उसमें स्त्रियोचित गुण आ जाता है।
🌜मैं दो ग्रहों का अपना मित्र मानती हूँ, सूर्य एवं बुध क्योंकि सूर्य के प्रकाश के बिना मैं अपूर्ण हूँ तथा बुध तो मेरा नटखट युवराज है।
🌜शेष मेरे लिए सम हैं। मैं एक मां हूँ, इसलिए किसी भी ग्रह से शत्रुता नहीं रखती हूं।
🌜मैं मन हूँ, क्योंकि वह भी मेरी भांति तीव्रगति से चलता है।
🌜मेरी राशि कर्क है, जो कृ से बना है, कृ का अर्थ है, रचना करना, और मैं मां के रुप में मानव जाति को उत्पन्न करती हूं।
🌜मैं वृष राशि में उच्च अर्थात बलवान होती हूं, क्योंकि वह भी न केवल मेरी भांति स्त्री राशि है बल्कि सर्वाधिक सुविधाजनक तथा पोषणकारी है।
🌜मैं वृश्चिक राशि में नीच अर्थात क्षीण पड़ जाती हूँ, क्योंकि मैं चलायमान हूँ, नित्य अपना रूप और स्थान बदलती हूँ और वृश्चिक एक स्थिर राशि है, और स्थिरता मुझे पसंद नहीं है।
🌜मैं यात्रा कारक हूँ, क्योंकि मैं तीव्रगामी हूँ।
🌜मैं जल की कारक हूँ, क्योंकि मैं समुद्र मंथन से उत्पन्न हूँ।
🌜मैं भावनाओं की कारक हूँ, क्योंकि मेरे कारण जिस प्रकार से समुद्र में प्रभाव पड़ता है, उसी प्रकार मन में भावनाओं की लहरों पर मेरा नियंत्रण है।
🌜मैं हॄदय की भी कारक हूँ, क्योंकि कवियों ने भावनाओं का स्थान हृदय बताया है।
🌜मैं मातृभूमि सहित घर की कारक हूँ, क्योंकि ये दोनों मां से जुड़े हैं।
🌜मैं कफ कारक हूँ क्योंकि वह एक जलीय पदार्थ है।
🌜मैं समस्त जलीय क्षेत्रों तथा पदार्थ की कारक हूँ।
🌜मैं कॄषि एवं उद्यान की कारक हूँ क्योंकि बिना जल के उनका कोई अस्तित्व नहीं है।
🌜मैं प्रकाश हूँ, ज्योति प्रदान करती हूं, अतः नेत्र की कारक हूँ।
🌜मैं रक्त तथा दूध की कारक हूँ, क्योंकि उसमें भी जल का समावेश है।
🌜मैं लवण की कारक हूँ, क्योंकि वह जलीय क्षेत्र समुद्र में पाया जाता है।
🌜मैं वक्षःस्थल की कारक हूँ, क्योंकि मैं दुग्ध के रूप में वहां स्थित रहती हूं, जिससे शिशु का लालन पालन होता है।
🌜एक माँ होने के कारण, मैं बाल्यावस्था, जन्मस्थान, गर्भ, गर्भावस्था आदि की कारक हूँ।
🌜जब मैं निर्बल होती हूँ, तो समुद्र से प्राप्त मेरे ही रंग-रुप का मोती, मेरी रश्मियों को किसी अन्य वस्तु के बजाय अधिक आकर्षित करता है।
🌜जब मैं रुष्ट होती हूँ, तो भगवान शिव जिन्होंने मुझे अपने शीश में स्थान दिया है, उनकी पूजा से मैं प्रसन्न होती हूँ।
🌜मैं रात्रि में श्वेत, धवल एवं रजत के समान दिखाई देती हूं, अतः ये ही मेरे प्रिय रंग एवं धातु है।
✍️ PANDIT AKSHAY SHARMA ज्योतिष में क्या है चंद्रमा, जानिए चंद्र से जुड़ा हर रहस्य पण्डित अक्षय शर्मा , मुजफ्फरनगर🚩

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