इस दिन है मोहिनी एकादशी-होगी विशेष महिमा

नई दिल्ली। हिन्दू धर्मशास्त्रों में आप देखेंगे कि अलग अलग तरह के और कई प्रकार उपवास किए जाते हैं। कहते हैं कि अगर आप इन उपवासों और व्रत को करते हैं तो भग्वान आपकी कई तरह की परेशानी हो हल कर देते हैं पर अगर आप इन्हें विज्ञान के नजरिए से देखेंगे तो आप पाएंगे कि इन्हें करने से आपका जो शरीर और मन हैं वो संतुलित रहता हैं। तमाम व्रत और उपवासों में सर्वाधिक महत्व एकादशी का है, जो माह में दो बार पड़ती है।

शुक्ल एकादशी,और कृष्ण एकादशी। वैशाख मास में एकादशी उपवास का विशेष महत्व है, जिससे मन और शरीर दोनों ही संतुलित रहते हैं। ख़ास तौर से गंभीर रोगों से रक्षा होती है और खूब सारा नाम यश मिलता है। इस एकादशी के उपवास से मोह के बंधन नष्ट हो जाते हैं, अतः इसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है। जो कि 26 अप्रैल को पड़ रही है। भावनाओं और मोह से मुक्ति की इच्छा रखने वालों के लिए भी वैशाख मास की एकादशी का विशेष महत्व है। मोहिनी एकादशी के दिन भगवान के राम स्वरुप की आराधना की जाती है।


मोहिनी एकादशी के लाभ

मोहिनी एकादशी पर लोगों को कई तरह के लाभ मिलते है जैसे-मोहिनी एकादशी पर व्यक्ति की चिंताएं और मोह माया का प्रभाव कम होता है ईश्वर की कृपा का अनुभव होने लगता है पाप प्रभाव कम होता है और मन शुद्ध होता है व्यक्ति हर तरह की दुर्घटनाओं से सुरक्षित रहता है व्यक्ति को गौदान का पुण्य फल प्राप्त होता है।

मोहिनी एकादशी पर पूजा कैसे करें

मोहिनी एकादशी महत्वपूर्ण एकादशी है इसलिए इसका पूजन भी काफी अच्छे तरीके से करना चाहिए । मोहिनी एकादशी के दिन मु्ख्य रुप से मुख्य देवता भगवान विष्णु या उनके अवतार होते हैं जिनकी पूजा इस दिन की जाती है। इस दिन उठकर सुबह सुबह उठकर स्नान करके सूर्य को अर्घ्य दें और फिर उसके बाद भगवान राम की आराधना करें। इस दिन भग्वान को मुख्य रुप से पीले फूल,पंचामृत तथा तुलसी अर्पित करें , फल  अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद भगवान राम का ध्यान करें तथा उनके मन्त्रों का जप करें। इस दिन अगर आप उपवास करेंगे तो आपको इसके उचित परिणाम मिलेंगे।

भगवान राम की पूजा
भग्वान राम की पूजा के समय आप राम जी के पास बैठे और उन्हें पीले फूल और पंचामृत अर्पित करें। इस दिन आप राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें, या आप रामजी की पूजा में “ॐ राम रामाय नमः” का जप कर सकते हैं। जप के बाद समस्याओं की समाप्ति की प्रार्थना करें और फिर पंचामृत प्रसाद रूप में ग्रहण करें

अगर आप ऐसा करते है तो आप देखेंगे कि किस तरह से आपके जीवन से समस्या खत्म हो जाएगी।